सोडियम धातु bcc जालक में क्रिस्टलीकृत होती है जिसकी कोष्ठिका कोर . है। सोडियम परमाणु की त्रिज्या होगी-
(B). bcc के लिए,
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सोडियम धातु bcc जालक में क्रिस्टलीकृत होती है जिसकी कोष्ठिका कोर . है। सोडियम परमाणु की त्रिज्या होगी-
(B). bcc के लिए,
एक धात्विक तत्व घनीय जालक के रूप में विद्यमान है। एकक कोष्ठिका की प्रत्येक कोर 2.88 है। धातु का घनत्व 7.20 g है। धातु के 100 g में कितनी एकक कोष्ठिकाएँ उपस्थित होंगी -
(B). एकक कोष्ठिका का आयतन
धातु के 100 g का आयतन =
इस आयतन में एकक कोष्ठिकाओं की संख्या
ताँबा, रजत तथा स्वर्ण की एक मिश्रधातु में ताँबा ccp जालक बनाता है। यदि रजत परमाणु कोर- केंद्र ग्रहण करें तथा स्वर्ण काय-केंद्र पर उपस्थित हो, तो मिश्रधातु का सूत्र है-
(C). ccp जालक = fcc जालक
(प्रत्येक कोर-केंद्रित परमाणु 4 एकक कोष्ठिकाओं द्वारा साझा होता है)
क्षार धातुओं के हैलाइडों में फ्रेंकेल दोष नहीं पाया जाता क्योंकि क्षार धातुओं में होती है
शुद्ध क्षार धातु हैलाइडों में फ्रेंकेल दोष नहीं पाया जाता। इसका कारण क्षार धातुओं के धनायनों का बड़ा आकार है; बड़े आकार के कारण ये धनायन अंतराकाशी स्थलों में नहीं समा सकते।
आयोडीन क्रिस्टल हैं-
(C). आण्विक ठोस वे पदार्थ हैं जिनमें घटक इकाइयों के रूप में अणु होते हैं तथा अंतराकण बल जैसे वान्डरवाल्स बल या हाइड्रोजन आबंध होते हैं।
CsCl का 8 : 8 उपसहसंयोजन बदल जाता है 6 : 6
उपसहसंयोजन में, किस पर:
उच्च ताप 8 : 8 उपसहसंयोजन को 6 : 6 में बदल देता है जबकि उच्च दाब 6 : 6
उपसहसंयोजन को 8 : 8 में बदल देता है।
कमरे के ताप पर सोडियम अंतःकेंद्रित घनीय कोष्ठिका में क्रिस्टलीकृत होता है जिसमें a 4.24 है। सोडियम का सैद्धांतिक घनत्व है- (सोडियम का परमाणु द्रव्यमान=23.0 g )
(C). bcc एकक कोष्ठिका के लिए Z का मान 2 है।
आयतन V=
कौन-से अक्रिस्टलीय ठोस हैं-
(D). अक्रिस्टलीय ठोसों में न तो क्रमबद्ध व्यवस्था (अर्थात् निश्चित आकृति) होती है और न ही क्रिस्टलों जैसा तीक्ष्ण गलनांक, परंतु गर्म करने पर वे तब तक मृदु होते जाते हैं जब तक उनमें सामान्यतः द्रवों जैसे गुण नहीं आ जाते। इसीलिए इन्हें अतिशीतित द्रव माना जाता है।
घनीय जालक की एकक कोष्ठिका की विमाएँ (कोरें a, b, c तथा उनके बीच के कोण, ) हैं
(A). यह घनीय जालक की परिभाषा पर आधारित है।
समान गोलों का सर्वाधिक दक्ष संकुलन प्राप्त होता है
(C). षट्कोणीय संवृत संकुलन तथा फलक-केंद्रित घनीय तंत्र में संकुलन सबसे सघन होता है क्योंकि इनकी संकुलन दक्षता 74 % है।
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