ताँबा धातु की संरचना फलक-केंद्रित घनीय है जिसकी एकक कोष्ठिका की लंबाई 0.361 nm है। ताँबे के आयनों को फलक विकर्ण के अनुदिश संपर्क में मानते हुए, ताँबे के आयन की आभासी त्रिज्या है-
(A). फलक-केंद्रित घन के लिए, हमारे पास है।
त्रिज्या =
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ताँबा धातु की संरचना फलक-केंद्रित घनीय है जिसकी एकक कोष्ठिका की लंबाई 0.361 nm है। ताँबे के आयनों को फलक विकर्ण के अनुदिश संपर्क में मानते हुए, ताँबे के आयन की आभासी त्रिज्या है-
(A). फलक-केंद्रित घन के लिए, हमारे पास है।
त्रिज्या =
स्वर्ण तथा ताँबे की एक यौगिक मिश्रधातु ऐसे घनीय जालक में क्रिस्टलीकृत होती है जिसमें स्वर्ण परमाणु घन के कोनों पर जालक बिंदु ग्रहण करते हैं तथा ताँबे के परमाणु घन के प्रत्येक फलक का केंद्र ग्रहण करते हैं। इस यौगिक का सूत्र है-
(C). प्रत्येक कोने के परमाणु (Au) का एक-आठवाँ तथा प्रत्येक फलक-केंद्रित परमाणु (Cu) का आधा भाग यौगिक की एकक कोष्ठिका के भीतर होता है।
इस प्रकार, प्रति एकक कोष्ठिका Au परमाणुओं की संख्या = . यौगिक का सूत्र है .
सही कथन/कथनों का चयन कीजिए -
(a) चतुष्फलकीय छिद्र ग्रहण करने वाले धनायन की उ.सं. 4 है।
(b) अष्टफलकीय छिद्र ग्रहण करने वाले धनायन की उ.सं. 6 है।
(c) शॉट्की दोषों में जालक का घनत्व घट जाता है,
(C). चूँकि चतुष्फलकीय छिद्र 4 निकटतम पड़ोसियों से घिरे होते हैं, अतः चतुष्फलकीय छिद्र ग्रहण करने वाले धनायन की उ.सं. 4 है। चूँकि अष्टफलकीय छिद्र छह निकटतम पड़ोसियों से घिरा होता है, अतः अष्टफलकीय छिद्र ग्रहण करने वाले धनायन की उ.सं. 6 है। शॉट्की दोष में ऋणायन तथा धनायन का एक युग्म जालक छोड़ देता है। अतः जालक का घनत्व घट जाता है।
निम्नलिखित प्रकार की रिक्तियों में से कौन-सी सबसे बड़ी रिक्ति है-
(D). संवृत संकुलित संरचना में गोलों के बीच के रिक्त स्थान को रिक्ति कहते हैं। रिक्तियाँ दो प्रकार की होती हैं, चतुष्फलकीय रिक्तियाँ तथा अष्टफलकीय रिक्तियाँ। चतुष्फलकीय तथा अष्टफलकीय रिक्तियों की त्रिज्याएँ क्रमशः हैं = 0.225 × । अतः अष्टफलकीय रिक्ति चतुष्फलकीय रिक्ति से बड़ी है।
एक घनीय एकक कोष्ठिका की कोटि 4 है। कोष्ठिका का प्रकार है-
(B). sc, fcc तथा bcc एकक कोष्ठिका में उपस्थित परमाणुओं की संख्या क्रमशः 1, 4, 2 है।
संवृत संकुलन अधिकतम उस क्रिस्टल में होता है जो है-
(C). क्रिस्टल में संवृत संकुलन सरल घनीय, bcc तथा fcc के लिए क्रमशः 0.52, 0.68 तथा 0.74 है, अर्थात् संवृत संकुलन fcc में अधिकतम है।
अभिकथन : किसी क्रिस्टल का स्थायित्व उसके गलनांक में परिलक्षित होता है।
कारण : किसी क्रिस्टल का स्थायित्व अंतराकण आकर्षण बल की प्रबलता पर निर्भर करता है। किसी ठोस का गलनांक घटक कणों के बीच कार्यरत आकर्षण बल की प्रबलता पर निर्भर करता है।
(A). किसी क्रिस्टल का स्थायित्व अंतराकण आकर्षण बल की प्रबलता पर निर्भर करता है। किसी ठोस का गलनांक घटक कणों के बीच कार्यरत आकर्षण बल की प्रबलता पर निर्भर करता है। अतः किसी क्रिस्टल का स्थायित्व उसके गलनांक में परिलक्षित होता है।
अवियोजित N2O4 का वाष्प घनत्व 46 है। गर्म करने पर NO2 में वियोजन के कारण वाष्प घनत्व घटकर 24.5 हो जाता है। अंतिम ताप पर N2O4 का प्रतिशत वियोजन है:
(a) सामान्य मोलर द्रव्यमान/प्रायो. मोलर द्रव्यमान = 1+ ; (मोलर द्रव्यमान = 2 x वा.घ.)
M1 =2*46=92
m2=2*24.5=49
92/49 = 1+
... =0.87
298 K पर, 500cm3 H2O में 15.30 cm3 CH4(STP) मेथेन के एक atm आंशिक दाब पर घुलती है। यदि हेनरी का नियम लागू हो, तो 300cm3 जल में 0.001 मोल मेथेन घोलने के लिए कितना दाब आवश्यक है ?
जल के लिए मोलल अवनमन स्थिरांक=1.85 deg/molal तथा बेन्ज़ीन के लिए 5.12 deg/molal है। यदि बेन्ज़ीन तथा जल की गलन गुप्त ऊष्माओं का अनुपात 3:8 है, तो बेन्ज़ीन का हिमांक ज्ञात कीजिए।
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