NEET प्रश्न (MCQ) हिंदी में — उत्तर और विस्तृत हल सहित

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शुष्क सेल के लिए गलत कथन चुनिए

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Explanation

 MnO2 + NH4+ + e →        MnO(OH) + NH3

NH3 आगे Zn+2 के साथ संयोग करके बनाता है Zn(NH3)4+2 

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CuSO4 विलयन से Cu धातु के इलेक्ट्रोड-निक्षेपण की धारा दक्षता क्या है, जिसमें 2 घंटे तक 5 ऐम्पियर धारा प्रवाहित करने पर 9.8 gm कॉपर निक्षेपित होता है?

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W = E96500 × i × t = 31.7596500 × 5 × 2 × 3600W = 11.84 g% of current efficiency = 9.811.84 × 100 = 82.8%

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विद्युत्-रासायनिक सेल`
Znl || ZnSO4 (0.01 M)lCuSO4(1.0M) Cu, इस डेनियल सेल का वि.वा.बल E1 है। जब ZnSO4 की सांद्रता 1.0 M तथा CuSO4 की 0.01 M कर दी जाती है, तो वि.वा.बल बदलकर E2 हो जाता है। निम्नलिखित में से E1 तथा E2 के बीच कौन-सा संबंध है ?
( दिया है, RTF=0.059)

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डेनियल सेल में इलेक्ट्रोड विभव Zn2+ तथा Cu2+ आयनों की सांद्रताओं पर निर्भर करता है। जब Zn2+ की सांद्रता बढ़ती है और Cu2+ की घटती है, तो नर्न्स्ट समीकरण के अनुसार इलेक्ट्रोड विभव (सेल वि.वा.बल) बढ़ता है : E = E° - (RT/nF) ln Q, जहाँ Q अभिक्रिया गुणांक है।

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298 K पर 5.76x10-3 S cm-1 विद्युत्-अपघटनी चालकता वाले AgNO3 के 0.5 mol/dm3 विलयन की मोलर चालकता है

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(b) मुख्य विचार : मोलर चालकता (lm) तथा विद्युत्-अपघटनी चालकता (k) के बीच संबंध है λm=k×1000M

जहाँ, M विलयन की मोलरता है।

दिया है, विलयन की सांद्रता, M=0.5mol/dm3

विद्युत्-अपघटनी चालकता, k=5.76X10-3Scm-1 

ताप, T=298K

∴ Molar conductivity,                                  λm=k×1000M                                      =5.76×10-3×10000.5                                      =11.52 S cm2/mol

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पिघले हुए सोडियम क्लोराइड के विद्युत्-अपघटन के दौरान, 3 ऐम्पियर धारा का उपयोग करके 0.10 mol क्लोरीन गैस उत्पन्न करने में लगने वाला समय है

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(b) मुख्य विचार यह प्रश्न विद्युत्-अपघटन के फैराडे के प्रथम नियम पर आधारित है, जिसके अनुसार जब किसी विद्युत्-अपघटनी विलयन में से विद्युत् धारा प्रवाहित की जाती है, तो इलेक्ट्रोड पर निक्षेपित पदार्थ की मात्रा (w) प्रवाहित विद्युत् आवेश (q) के समानुपाती होती है।

प्रश्न में प्रयुक्त सूत्र है

 w= Eit/96500  ...(i)

जहाँ, E = Cl- का ग्राम-तुल्यांकी द्रव्यमान

 i= धारा, t= समय, it = q

दिया है, w=0.10 mol = (0.10 x 71)g,

 i=3A, E=35.5

निम्न अभिक्रियाएँ होती हैं,

कैथोड पर : 2H2O →+2e-H2 + 2OH-

ऐनोड पर : 2Cl- →-2e-Cl2

  35.5g  71 g

व्यंजक (i) में सभी मान रखने पर;

(0.10 x 71) = (35.5/96500)  x 3 x t अथवा t = 6433s

अथवा t = 107.22 min ≈ 110 min    [1s = 1/60 min]

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यदि किसी दी गई अभिक्रिया के लिए E°cell का मान ऋणात्मक है, तो निम्नलिखित में से कौन-सा ∆G° तथा Keq के मानों के लिए सही संबंध देता है ?

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(a) दिया है,  E°cell = ऋणात्मक

अब, ∆G° तथा E°cell के बीच संबंध है

∆G° =-nFE°cell    ...(i)

चूँकि E°cell ऋणात्मक है, अतः ∆G° धनात्मक प्राप्त होता है। पुनः, ∆G° तथा Keq के बीच संबंध है

∆G° = -2.303nRTlogKeq  ......(ii)

समी. (i) से हमें प्राप्त होता है कि ∆G° धनात्मक है। अब, यदि ∆G° धनात्मक है तो समी. (ii) से Keq ऋणात्मक प्राप्त होता है।

अर्थात् ∆G° >1 तथा Keq< 1

संक्षिप्त युक्ति : चूँकि ∆G° ऋणात्मक है अतः अभिक्रिया अस्वतःप्रवर्तित है अथवा कह सकते हैं कि अभिक्रिया पश्च दिशा में चल रही है। अस्वतःप्रवर्तित अभिक्रिया के लिए ∆G° सदैव धनात्मक होता है तथा Keq सदैव 1 से कम होता है।

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विद्युत्-अपघटन के दौरान 60 सेकंड में 1 ऐम्पियर धारा द्वारा कैथोड पर पहुँचाए गए इलेक्ट्रॉनों की संख्या है (इलेक्ट्रॉन पर आवेश = 1.60 x 10-19 C)

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(c) विद्युत्-अपघटन के फैराडे के प्रथम नियम से, 

W/E = it/96500   ......... (i)

दिया है i = 1A; t=60s

इन मानों को समी. (i) में रखने पर 

W/E = 1x60/96500

अथवा W/E = 6/9650 = इलेक्ट्रॉनों के मोलों की संख्या

इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 6/9650 x 6.022x 1023 = 3.75 x 1020

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गैल्वनीकृत लोहा बनाने के लिए लोहे पर जिंक की परत चढ़ाई जा सकती है परन्तु इसका विपरीत संभव नहीं है। इसका कारण है

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(d) जिस धातु का मानक अपचयन विभव अधिक ऋणात्मक होता है, उसमें अपचयित होने की प्रवृत्ति अधिक होती है।

Zn2+ +2e- → Zn;  E° = -0.76V

Fe2+ + 2e- → Fe;  E° =-0.44 V

यहाँ, गैल्वनीकृत लोहे में Zn का ऋणात्मक अपचयन विभव अधिक है, जिसका अर्थ है कि Zn लोहे द्वारा दिए गए इलेक्ट्रॉन लेता है तथा स्वयं अपचयित हो जाता है।

इस प्रकार Zn ऐनोड की भाँति कार्य करता है तथा लोहे को कैथोड बनाकर उसे जंग लगने से बचाता है।

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298 K पर शुद्ध जल में H2-इलेक्ट्रोड का विभव शून्य करने के लिए आवश्यक H2 का दाब है

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(d) प्रश्न से, हमें एक समीकरण प्राप्त होता है

  2H++ 2e- →         H2(g)

नर्न्स्ट समीकरण के अनुसार, 

E=E°-0.05912logPH2H+2  =0-0.05912logPH210-72 ∴H+=10-7∴ For potential of H2 electrode to be zero, PH2 should be equal to H+2, i.e. 10-14atm.∴                   log10-1410-72=0

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वह युक्ति जो हाइड्रोजन तथा मेथेन जैसे ईंधनों के दहन की ऊर्जा को सीधे विद्युत् ऊर्जा में परिवर्तित करती है, कहलाती है

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(a) ईंधन सेल वह युक्ति है जो हाइड्रोजन तथा मेथेन जैसे ईंधनों के दहन की ऊर्जा को सीधे विद्युत् ऊर्जा में परिवर्तित करती है।

विद्युत्-अपघटनी सेल विद्युत् ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलता है। डायनेमो एक विद्युत् जनित्र है
जो कम्यूटेटर की सहायता से दिष्ट धारा उत्पन्न करता है।

Ni-Cd सेल एक प्रकार की पुनः आवेशनीय बैटरी है जिसमें कैडमियम ऐनोड तथा NiO2 युक्त धातु जालक कैथोड की भाँति कार्य करता है।

विलयन X की मोललता = विलयन Y की मोललता
  = 0.2 mol/kg

हम जानते हैं कि, किसी विलयन के क्वथनांक में उन्नयन (∆Tb) विलयन की मोलल सांद्रता के समानुपाती होता है, अर्थात्

∆Tb∝m or ∆Tb=Kbm

जहाँ, m विलयन की मोललता है तथा K मोलल क्वथनांक स्थिरांक अथवा क्वथनांकमापी स्थिरांक है।

∴क्वथनांक उन्नयन संबंध से ∆Tb=iKbm or ∆Tb∝i

जहाँ, i वान्ट हॉफ गुणांक है

चूँकि, ∆Tb विलयन X का, विलयन Y के ΔΤb से अधिक है

(प्रेक्षित अणुसंख्य गुणधर्म सामान्य अणुसंख्य गुणधर्म से अधिक है)

∴ विलयन X का i > विलयन Y का i

∴ विलयन X वियोजन दर्शा रहा है।

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