उस विद्युत् मात्रा द्वारा विस्थापित सिल्वर (परमाणु भार = 108) का भार, जो STP पर 5600 mL O2 विस्थापित करती है, होगा
(d)
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उस विद्युत् मात्रा द्वारा विस्थापित सिल्वर (परमाणु भार = 108) का भार, जो STP पर 5600 mL O2 विस्थापित करती है, होगा
(d)
NH4OH की सीमांत मोलर चालकता (अर्थात् Åm(NH4OH)) बराबर है :-
कोलराउश के नियम के अनुसार NH4OH की सीमांत मोलर चालकता :-
Åm(NH4OH)=Åm(NH4Cl)+Åm(NaOH)-Åm(NaCl)
298 K पर H2O(l), CO2(g) तथा पेन्टेन (g) के लिए मानक विरचन मुक्त ऊर्जाएँ (kJ/mol में) क्रमशः -237.2, -394.4 तथा -8.2 हैं। पेन्टेन-ऑक्सीजन ईंधन सेल के लिए E°cell का मान है
दिया है = -237.2
= -394.4
= -8.2
C5H12 + 16O2 5CO2 + 6H2O
G0= 5 x + 6 x -(+)
=5x(-394.4)+6x(-237.2)-(-8.2)+0
=-3387 KJ/mol
पेन्टेन-ऑक्सीजन ईंधन सेल में 32 इलेक्ट्रॉन सम्मिलित होते हैं।
-3387 x 103 = 32 x 96500 x E°cell
E°cell = -3387 x 103 / 32x96500 = 1.0968V
नीचे एक काल्पनिक विद्युत्-रासायनिक सेल दिखाया गया है A-lA+ (xM)l l B+ (yM)l B+
मापा गया वि.वा.बल +0.20V है। सेल अभिक्रिया है :-
विद्युत्-रासायनिक सेल ÅlA+ (xM)l l B+ (yM)l B+
सेल का वि.वा.बल +0.20V है। अतः सेल अभिक्रिया संभव है। अर्ध-सेल अभिक्रियाएँ निम्नलिखित हैं :-
(i) ऋणात्मक ध्रुव पर :-
A→A++e-++e- (ऑक्सीकरण)
(ii) धनात्मक ध्रुव पर :-
B++e-→B (अपचयन)
अतः सेल अभिक्रिया है
A+B+→A++B-,E°cell=+0.20V
298K पर H2O(l) की मानक विरचन मुक्त ऊर्जा –237.20kJ/mole है जबकि H+ आयन तथा हाइड्रॉक्सिल आयनों में इसके आयनन की 80 kJ/mole है, तो 298 K पर निम्नलिखित सेल का वि.वा.बल होगा
H2(g,1 bar) | H+ (1M) || OH–(1M) | O2 (g, 1bar)
सेल अभिक्रिया
कैथोड : H2O(l) + O2(g) + 2e– 2OH–(aq.)
ऐनोड : H2(g) 2H+ (aq.) + 2e–
H2O(l) + O2(g) 2H+ (aq.) + 2OH–(aq.)
साथ ही हमारे पास है
H2(g)(l) + O2(g) H2O(l)ΔG°f = –237.2 kj/mol
H2O(l) H+ (aq.) + OH–(aq.)ΔG° = 80 kj/mol
अतः सेल अभिक्रिया के लिए
ΔG° = –77.20 kj/mole
अतः, E = – = 0.40 V
निम्नलिखित में से कौन-सा सेल अधिक विद्युत् कार्य उत्पन्न कर सकता है।
Ecell = –
Ecell अधिकतम होने के लिए [H+]a कम तथा [H+]c अधिक होना चाहिए, इसीलिए ऐनोड कक्ष अधिक क्षारीय तथा कैथोड कक्ष अम्लीय होना चाहिए।
किस पर निम्नलिखित सेल की अभिक्रिया साम्य में होगी?
Ag(s) | Ag2CO3(s) | Na2CO3 (aq) || KBr(aq) | AgBr(s) | Ag(s)
Ag2CO3 के लिए KSP = 8 × 10–12 तथा AgBr के लिए KSP = 4 × 10–13
ऐनोड : Ag(s) Ag+ (aq) + 1e–
कैथोड : Ag+ (aq) + 1e– Ag
निवल :
0 = 0 + ⇒ =
⇒ ⇒ =
यह प्रेक्षित किया गया है कि अभिक्रिया M(s) + xH+ Mx+ + H2 का उपयोग करने वाले गैल्वनी सेल का वोल्टेज, हाइड्रोजन दाब के वर्गमूल तथा Mx+ सांद्रता के घनमूल के लघुगणक के साथ रैखिक रूप से बदलता है। x का मान है
वोल्टेज की, हाइड्रोजन दाब के वर्गमूल तथा M^(x+) सांद्रता के घनमूल के लघुगणक पर रैखिक निर्भरता यह दर्शाती है कि संतुलित अभिक्रिया में 3 इलेक्ट्रॉनों का स्थानांतरण तथा 1.5 H2 अणुओं का निर्माण होता है, जिसका अर्थ है x = 3।
ऐसीटिक अम्ल का Ka = 1.8 × 10–5 है जबकि फॉर्मिक अम्ल का Ka = 2.1 × 10–4 था। सेल के वि.वा.बल का परिमाण क्या होगा
Pt(H2) Pt(H2) 25°C पर
अभिक्रिया है Hc+
∴ E = = 0.0629 V
सेल पर विचार कीजिए Ag(s)|AgBr(s)|Br–(aq)||AgCl(s)|Cl–(aq)|Ag(s) 25°C पर। AgBr तथा AgCl के विलेयता गुणनफल स्थिरांक क्रमशः 5 × 10–13 तथा 1 × 10–10 हैं। Br– तथा Cl–आयनों की सांद्रताओं के किस अनुपात पर सेल का वि.वा.बल शून्य होगा ?
= log KSPAgBr = – 0.7257
तथा = log KSPAgCl = – 0.59
अब सेल अभिक्रिया है
Ag + Br– AgBr + 1e–
AgCl + 1e– AgBr + Cl–
Br–AgCl Cl– + AgBr
0 = (0.7257–0.59) +
⇒ = 0.005
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