किसी विशेष अभिक्रिया के दर स्थिरांक की विमाएँ आवृत्ति की हैं। अभिक्रिया की कोटि क्या है ?
(B) प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए K की विमाएँ समय के व्युत्क्रम की होती हैं, अर्थात् एक आवृत्ति।
NEET के NEET बहुविकल्पीय प्रश्न हिंदी में मुफ़्त हल करें — तुरंत सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या के साथ। लॉगिन की आवश्यकता नहीं।
किसी विशेष अभिक्रिया के दर स्थिरांक की विमाएँ आवृत्ति की हैं। अभिक्रिया की कोटि क्या है ?
(B) प्रथम कोटि की अभिक्रिया के लिए K की विमाएँ समय के व्युत्क्रम की होती हैं, अर्थात् एक आवृत्ति।
आयोडोमेथेन की सोडियम एथॉक्साइड के साथ अभिक्रिया इस प्रकार होती है :
Y-अक्ष पर log का, X-अक्ष पर 't' के विरुद्ध आलेख धनात्मक ढाल वाली सरल रेखा देता है। अभिक्रिया की कोटि क्या है ?
(A) द्वितीय कोटि की अभिक्रिया के लिए,
जहाँ ‘a’ तथा ‘b’ अभिकारकों की प्रारंभिक सांद्रताएँ हैं। समाकलन करने पर,
धनात्मक ढाल वाली रेखा=
किसी यौगिक का ऊष्मीय अपघटन प्रथम कोटि का है। यदि यौगिक के एक नमूने का 50 % भाग 120 मिनट में अपघटित हो जाता है, तो यौगिक के 90 % भाग के अपघटित होने में कितना समय लगेगा ?
(A)
किसी प्रथम कोटि की अभिक्रिया का वेग स्थिरांक ताप में प्रति डिग्री वृद्धि पर 11.11% बढ़ता है, जब ताप हो। दिए गए ताप परास में सक्रियण ऊर्जा को स्थिर मानते हुए, 127o C पर यह कितने % बढ़ेगा ?
(C)
के रेडियोऐक्टिव क्षय की अर्ध-आयु 5730 वर्ष है। लकड़ी युक्त एक पुरातात्विक कलाकृति में जीवित वृक्ष में पाए जाने वाले का केवल 80% ही था। नमूने की आयु का अनुमान लगाइए। [रेडियोऐक्टिव क्षय प्रथम कोटि की बलगतिकी का पालन करते हैं]
(B)
यदि जीवित वृक्ष में प्रारंभिक सक्रियता a है, तो
मृत लकड़ी में सक्रियता,
नाभिकीय / रेडियोऐक्टिव क्षय प्रथम कोटि की
बलगतिकी का पालन करते हैं। अतः,
इसलिए,
दो पदार्थ A तथा B इस प्रकार उपस्थित हैं कि तथा A की अर्ध-आयु 5 मिनट और B की 15 मिनट है। यदि वे प्रथम कोटि की बलगतिकी का पालन करते हुए एक ही समय पर क्षय होना प्रारंभ करते हैं, तो कितने समय बाद दोनों की सांद्रता समान हो जाएगी।
(A) A की शेष मात्रा अर्ध-आयु के बाद
B की शेष मात्रा अर्ध-आयु के बाद
अंत में, प्रश्नानुसार
(मान लीजिए समय t के बाद दोनों की सांद्रता समान हो जाती है)
समीकरण (1) तथा (2) से
अभिकथन : कोयले का एक ढेला वायु में मध्यम दर से जलता है जबकि कोयले की धूल विस्फोटक रूप से जलती है।
कारण : कोयले की धूल में कार्बन के अत्यंत सूक्ष्म कण होते हैं।
(A). कोयले का एक ढेला वायु में मध्यम दर से जलता है जबकि कोयले की धूल विस्फोटक रूप से जलती है क्योंकि कोयले की धूल में कार्बन के अत्यंत सूक्ष्म कण होते हैं। अतः किसी निश्चित द्रव्यमान के लिए कोयले की धूल का पृष्ठीय क्षेत्रफल ढेले वाले कोयले की तुलना में बहुत अधिक होता है। बढ़ा हुआ पृष्ठीय क्षेत्रफल ऑक्सीकारक ऑक्सीजन गैस (वायु में) के साथ निकट संपर्क बनने देता है और इसलिए कोयले की धूल बहुत उच्च दर से जलकर विस्फोट कर देती है। ढेले वाले कोयले की स्थिति में अभिक्रिया के लिए उपलब्ध पृष्ठ छोटा होता है, अतः यह वायु में मध्यम दर से धीरे-धीरे जलता है।
अभिकथन : द्रव ब्रोमीन, ब्रोमीन वाष्प की तुलना में धीमी अभिक्रिया करती है।
कारण : द्रव ब्रोमीन में ब्रोमीन के अणु एक ऐसे बल द्वारा बँधे रहते हैं जो वाष्प प्रावस्था में ब्रोमीन के दो अणुओं के बीच विद्यमान बल की तुलना में बहुत दुर्बल है।
(C). द्रव ब्रोमीन, ब्रोमीन वाष्प की तुलना में धीमी अभिक्रिया करती है क्योंकि द्रव ब्रोमीन में ब्रोमीन के अणु एक ऐसे बल द्वारा बँधे रहते हैं जो वाष्प प्रावस्था में ब्रोमीन के दो अणुओं के बीच विद्यमान बल से कहीं अधिक प्रबल है। अतः ब्रोमीन के अणुओं को मुक्त करने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
अभिकथन : अभिक्रिया,
कारण : उत्प्रेरक अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा को कम कर देता है।
(B). अभिक्रिया, अभिकारकों के उच्चतर आंशिक दाबों के कारण।
अभिकथन : किसी अभिक्रिया की आणविकता प्रयोग द्वारा निर्धारित नहीं की जा सकती।
कारण : आणविकता अभिक्रियाओं को क्रियाविधि के आधार पर दी जाती है।
(A). किसी अभिक्रिया की आणविकता प्रयोग द्वारा निर्धारित नहीं की जा सकती क्योंकि आणविकता अभिक्रियाओं को क्रियाविधि के आधार पर दी जाती है।
Ready to ace NEET?
Free access · No credit card required
हाँ। इस पेज के हर NEET प्रश्न को बिना लॉगिन किए मुफ़्त हल किया जा सकता है, और सही उत्तर व विस्तृत व्याख्या तुरंत देखी जा सकती है।
नहीं। प्रश्न हल करने और उत्तर देखने के लिए किसी खाते की आवश्यकता नहीं है। मुफ़्त खाता बुकमार्क, निजी नोट्स और प्रगति ट्रैकिंग जोड़ देता है।
इस प्रश्न बैंक में NEET के पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQ) और अभ्यास प्रश्न दोनों शामिल हैं — जहाँ लागू हो, हर प्रश्न पर उसका परीक्षा वर्ष अंकित है।