गलत सुमेल है :
(a) Al धातु का शुद्धीकरण : हूप विधि
बायर प्रक्रम निष्कर्षण के लिए है, जिसमें बॉक्साइट को Al2O3 में बदला जाता है
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गलत सुमेल है :
(a) Al धातु का शुद्धीकरण : हूप विधि
बायर प्रक्रम निष्कर्षण के लिए है, जिसमें बॉक्साइट को Al2O3 में बदला जाता है
पोलिंग प्रक्रम का उपयोग किसके लिए किया जाता है:
(a) जब अशुद्ध धातु में उसी धातु के ऑक्साइड की अशुद्धि होती है, तब पोलिंग प्रक्रम का उपयोग किया जाता है, जैसे अशुद्ध Cu तथा Sn इसी विधि से शुद्ध किए जाते हैं।
पोलिंग एक धातुकर्मीय विधि है जो कॉपर (जिसमें कॉपर ऑक्साइड अशुद्धि के रूप में होता है) तथा टिन (जिसमें SnO2 अशुद्धि होती है) के शुद्धीकरण में प्रयुक्त होती है। पिघली अशुद्ध धातु को ऐनोड भट्टी में दो चरणों में परिष्कृत किया जाता है। पहले चरण (ऑक्सीकरण) में पिघली धातु में धीरे-धीरे वायु प्रवाहित करके सल्फर तथा आयरन को आयरन ऑक्साइड एवं सल्फर डाइऑक्साइड के रूप में हटाया जाता है; आयरन ऑक्साइड ऊपर से हटा लिए जाते हैं और सल्फर डाइऑक्साइड गैस भट्टी से बाहर निकल जाती है। दूसरे चरण (अपचयन अथवा पोलिंग) में अपचायक — सामान्यतः प्राकृतिक गैस या डीज़ल (अमोनिया, द्रवित पेट्रोलियम गैस तथा नैफ्था भी) — का उपयोग करके कॉपर ऑक्साइड की ऑक्सीजन से अभिक्रिया कराई जाती है और कॉपर धातु प्राप्त होती है।
पहले इसके लिए ताजी कटी हरी लकड़ी के डंडे (पोल) प्रयोग किए जाते थे; उनका रस अपचायक का कार्य करता था और गर्म कॉपर से निकलने वाली काष्ठ गैस (CO2 तथा H2) क्यूप्रस ऑक्साइड को कॉपर में अपचयित कर देती थी। इन्हीं हरी लकड़ी के डंडों के प्रयोग से 'पोलिंग' शब्द बना।
सावधानी आवश्यक है कि ऐनोड कॉपर से बहुत अधिक ऑक्सीजन न हटे, अन्यथा अन्य अशुद्धियाँ अपने ऑक्साइड से धात्विक अवस्था में आकर कॉपर में ठोस विलयन के रूप में बनी रहेंगी, उसकी चालकता घटा देंगी तथा उसके भौतिक गुण बदल देंगी। धातु के पुनः ऑक्सीकरण को रोकने के लिए ऊपरी सतह को कोक से ढका जा सकता है।
AgCl को सोडियम कार्बोनेट के साथ गलित करने पर प्राप्त होता है:
Y का अयस्क होगा:
(b)
निम्नलिखित धातुकर्मीय प्रक्रमों पर विचार कीजिए :
(I) अशुद्ध धातु को CO के साथ गर्म करना तथा बने वाष्पशील कार्बोनिल (क्व.अं.) का आसवन करना और अंत में पर अपघटन कराकर शुद्ध धातु प्राप्त करना
(II) सल्फाइड अयस्क को वायु में तब तक गर्म करना जब तक उसका कुछ भाग ऑक्साइड में न बदल जाए, फिर वायु की अनुपस्थिति में और गर्म करना ताकि ऑक्साइड शेष धातु सल्फाइड से अभिक्रिया कर सके
(III) धातु क्लोराइड तथा NaCl की लगभग बराबर मात्रा वाले पिघले विद्युत अपघट्य का विद्युत अपघटन करके धातु प्राप्त करना
मैग्नीशियम, निकैल तथा कॉपर प्राप्त करने के लिए प्रयुक्त प्रक्रम क्रमशः हैं :
(c) (I)
(III)
का निक्षालन इसे किसके तनु विलयन के साथ गर्म करके किया जाता है:
(d)
Ag2S का निक्षालन इसे O2 की उपस्थिति में NaCN के तनु विलयन के साथ गर्म करके किया जाता है। इससे विलेय संकुल [Ag(CN)2]− बनता है।
यहाँ सल्फाइड आयन ऑक्सीजन द्वारा सल्फेट आयन में ऑक्सीकृत हो जाता है। इस प्रकार विलेय पदार्थ को अविलेय पदार्थ से अलग किया जा सकता है।
उत्पाद Ag प्राप्त करने के लिए अपचयन हेतु जिंक का उपयोग किया जाता है।
निक्षालन व्यावसायिक रूप से किसके सांद्रण के लिए किया जाता है:
(b) निक्षालन अर्जेंटाइट के सांद्रण के लिए किया जाता है
जब ZnS तथा PbS खनिजों की संभावना हो तो फेन प्लवन प्रक्रम में कभी-कभी NaCN अवनमक के रूप में मिलाया जाता है, क्योंकि:
(b) अवनमक वह पदार्थ है जो अशुद्धि के रूप में उपस्थित धातु सल्फाइड के प्लवन गुण को दबाने के लिए मिलाया जाता है।
निम्नलिखित कथनों के लिए T अथवा F का सही क्रम बताइए। कथन सत्य हो तो T तथा असत्य हो तो F का प्रयोग कीजिए।
(i) गोल्डश्मिट थर्मिट प्रक्रम में ऐलुमिनियम अपचायक का कार्य करता है।
(ii) Mg का निष्कर्षण जलीय विलयन के विद्युत अपघटन द्वारा किया जाता है
(iii) Pb का निष्कर्षण कार्बन अपचयन विधि द्वारा संभव है
(iv) लाल बॉक्साइट का शुद्धीकरण सर्पेक प्रक्रम द्वारा किया जाता है
(d)
फेन प्लवन विधि में निम्नलिखित में से कौन-सा पदार्थ संग्राहक का कार्य करता है?
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