ऐसीटिक अम्ल को सांद्र H2SO4 की उपस्थिति में हाइड्राजोइक अम्ल के साथ गर्म करने पर मिलता है:
(b)
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ऐसीटिक अम्ल को सांद्र H2SO4 की उपस्थिति में हाइड्राजोइक अम्ल के साथ गर्म करने पर मिलता है:
(b)
HVZ अभिक्रिया से बनता है:
(C)
कौन-सा अम्ल ज्विटर आयन बनाता है?
(d)
p-ऐमीनो बेंजीन सल्फोनिक अम्ल
जलयोजित ऑक्सैलिक अम्ल में होते हैं:
(c) जलयोजित ऑक्सैलिक अम्ल है
उपरोक्त अभिक्रिया कहलाती है:
दी गई अभिक्रिया श्मिट अभिक्रिया है, जिसमें कार्बोक्सिलिक अम्ल को हाइड्राजोइक अम्ल (N3H) तथा उत्प्रेरक के रूप में सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल की सहायता से प्राथमिक ऐमीन में बदला जाता है। इस अभिक्रिया में -COOH समूह -NH2 से प्रतिस्थापित हो जाता है।
इमली में होता है:
(a) इमली में टार्टरिक अम्ल का दक्षिण-ध्रुवण घूर्णक पोटैशियम लवण होता है।
इमली फैबेसी कुल का एक शिंबी वृक्ष है, जो उष्णकटिबंधीय अफ्रीका का मूल निवासी है। वंश Tamarindus एकप्ररूपी वर्गक है। इमली का वृक्ष फली जैसा फल देता है जिसमें खाने योग्य गूदा होता है।
तेलों के हाइड्रोजनीकरण से वनस्पति घी बनता है। इस प्रक्रिया में:
(c)
ऑक्सैलिक अम्ल का सीसा कैथोड के साथ वैद्युत अपचयन देता है :
सीसा कैथोड के साथ ऑक्सैलिक अम्ल (COOH-COOH) के वैद्युत अपचयन में ऑक्सैलिक अम्ल अपचयित होकर दो मुख्य उत्पाद — ग्लाइकॉलिक अम्ल (COOH-CH2OH) तथा ग्लाइऑक्सैलिक अम्ल (COOH-CHO) — देता है।
ऐसीटो ऐसीटिक एस्टर व्यवहार करता है:
ऐसीटोऐसीटिक एस्टर (CH3COCH2COOCH3) कीटो समूह (>C=O) की उपस्थिति के कारण कीटो यौगिक की भाँति तथा अंतराअणुक हाइड्रोजन बंध द्वारा स्थायीकृत ईनॉल रूप की उपस्थिति के कारण असंतृप्त हाइड्रॉक्सी यौगिक की भाँति व्यवहार करता है।
मधुमक्खियों, लाल चींटी तथा ततैयों के डंक में होता है :
(b) मधुमक्खियों तथा ततैयों के डंक में फॉर्मिक अम्ल होता है।
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