ऐमीनों को पृथक करने की हिन्सबर्ग विधि किसके उपयोग पर आधारित है:
(a) ऐमीन नाभिकरागी की भाँति सल्फोनिल क्लोराइड पर आक्रमण करके क्लोराइड को विस्थापित करते हैं। प्राथमिक तथा द्वितीयक ऐमीनों से बने सल्फोनैमाइड अल्पविलेय होते हैं तथा विलयन से ठोस के रूप में अवक्षेपित हो जाते हैं: PhSO2Cl + 2 RR'NH → PhSO2NRR' + [RR'NH2+]Cl−। प्राथमिक ऐमीनों (R' = H) में बना सल्फोनैमाइड क्षार द्वारा विप्रोटोनित होकर जल-विलेय सल्फोनैमाइड लवण (Na[PhSO2NR]) देता है। तृतीयक ऐमीन सल्फोनिल क्लोराइड समूह का जल-अपघटन कराते हैं, जिससे जल-विलेय सल्फोनेट लवण बनते हैं।