ऐमीन बनाने की मेंडियस विधि में होता है:
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ऐमीन बनाने की मेंडियस विधि में होता है:
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निम्नलिखित यौगिकों की क्षारकता का सही क्रम है:
अनुनाद संकर में N पर विकसित ऋण आवेश इसे अधिक क्षारकीय बनाता है, क्योंकि यह इलेक्ट्रॉन युग्म आसानी से त्याग देता है। साथ ही ऐमीन ऐमीन की तुलना में अधिक क्षारकीय है, क्योंकि ऐल्किल समूह का धनात्मक IE होता है। ऐमाइड में अनुनाद द्वारा विस्थानीकरण के कारण एकाकी युग्म कम उपलब्ध रहता है।
एक प्राथमिक ऐमीन को CS2 के साथ आधिक्य HgCl2 की उपस्थिति में गर्म करने पर आइसोथायोसायनेट बनता है। यह अभिक्रिया कहलाती है:
एक प्राथमिक ऐमीन की कार्बन डाइसल्फाइड (CSâ‚‚) के साथ आधिक्य मर्क्यूरिक क्लोराइड (HgClâ‚‚) की उपस्थिति में अभिक्रिया, जिससे आइसोथायोसायनेट बनता है, हॉफमान सरसों तेल अभिक्रिया कहलाती है। इस अभिक्रिया का उपयोग आइसोथायोसायनेट बनाने में किया जाता है, जिनकी गंध विशिष्ट रूप से तीखी होती है।
साइक्लोहेक्सेनोन की डाइमेथिलऐमीन के साथ किसी अम्ल की उत्प्रेरक मात्रा की उपस्थिति में अभिक्रिया एक यौगिक बनाती है, यदि अभिक्रिया के दौरान जल लगातार हटाया जाता रहे। बनने वाला यौगिक सामान्यतः कहलाता है:
ब्यूरेट परीक्षण कौन नहीं देता:
ब्यूरेट परीक्षण एक रासायनिक परीक्षण है जिसका उपयोग प्रोटीनों तथा पॉलिपेप्टाइडों में पेप्टाइड बंधों की उपस्थिति का पता लगाने के लिए किया जाता है। इसमें प्रतिदर्श को कॉपर(II) लवण विलयन के साथ अभिकृत करके बैंगनी या गुलाबी रंग परिवर्तन देखा जाता है। कार्बोहाइड्रेट में पेप्टाइड बंध नहीं होते, अतः वे धनात्मक ब्यूरेट परीक्षण नहीं देते।
एक ऐरोमैटिक ऐमीन (A) को ऐल्कोहॉलिक पोटाश तथा एक अन्य यौगिक (Y) के साथ अभिकृत किया गया, जिससे दुर्गंधयुक्त गैस बनी जिसका सूत्र C6H5NC है। (Y) एक यौगिक (Z) की Cl2 के साथ बुझे चूने की उपस्थिति में अभिक्रिया से बना। यौगिक (Z) है:
(Y) CHCl3 है; (Y), (Z) + Cl2 + Ca(OH)2 से बनता है, अतः (Z) है CH3COCH3।
ऐनिलीन का ऐसीटिलीकरण किया गया। उत्पाद के नाइट्रीकरण तथा उसके बाद क्षारीय जल-अपघटन से मिला:
ऐनिलीन का ऐसीटिलीकरण करने पर ऐसीटैनिलाइड बनता है। ऐसीटैनिलाइड के नाइट्रीकरण से o-नाइट्रोऐसीटैनिलाइड तथा p-नाइट्रोऐसीटैनिलाइड का मिश्रण मिलता है। इन यौगिकों का क्षारीय जल-अपघटन ऐसीटिल समूह हटा देता है, जिससे o-नाइट्रोऐनिलीन तथा p-नाइट्रोऐनिलीन का मिश्रण मिलता है।
पिरीडीन में होती है :
पिरीडीन एक ऐरोमैटिक विषमचक्रीय यौगिक है जिसमें छह-सदस्यीय वलय होती है, जिसमें पाँच कार्बन परमाणु तथा एक नाइट्रोजन परमाणु होते हैं। वलय में विस्थानीकृत Ï€-इलेक्ट्रॉन तंत्र की उपस्थिति पिरीडीन को बेंजीन के समान ऐरोमैटिक प्रकृति प्रदान करती है।
Ni(CN)2 का अमोनियामय विलयन C6H6 के साथ अभिक्रिया करके हल्के बैंगनी रंग का क्रिस्टलीय यौगिक बनाता है, जिसका सूत्र है:
अभिक्रिया, कहलाती है:
(b) बेंजीन डाइऐजोनियम क्लोराइड में N2Cl का CuX-HX के हैलोजन परमाणु द्वारा प्रतिस्थापन सैंडमेयर अभिक्रिया कहलाता है।
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