पुनर्संयोजनेज़ एंजाइम अर्धसूत्री विभाजन की किस अवस्था में आवश्यक होता है?
जीन विनिमय एक एंजाइमी प्रक्रिया है जो पूर्वावस्था-l की पैकीटीन अवस्था के दौरान होती है। इस प्रक्रिया में सम्मिलित एंजाइम पुनर्संयोजनेज़ कहलाता है जो समजात गुणसूत्रों के बीच जीनों के पुनर्संयोजन में सहायता करता है।
जाइगोटीन अवस्था के दौरान समजात गुणसूत्र सूत्रयुग्मन नामक प्रक्रिया द्वारा युग्म बनाते हैं तथा एक जटिल द्विसंयोजक संरचना बनाते हैं।
डिप्लोटीन सूत्रयुग्मी संकुल के विघटन तथा काइऐज्मा निर्माण द्वारा अभिलक्षित होती है। जबकि डायकाइनेसिस काइऐज्मेटा के अंतस्थीकरण द्वारा अभिलक्षित होती है (अर्थात काइऐज्मेटा गुणसूत्र की परिधि की ओर खिसक जाते हैं।)