सही सुमेलित युग्म पहचानिए।
अर्धसूत्री विभाजन की पश्चावस्था ll में गुणसूत्रबिंदु विभाजित होते हैं तथा तर्कु तंतु अर्धगुणसूत्रों को विपरीत ध्रुवों की ओर खींचते हैं। पश्चावस्था ll के अंत में गुणसूत्रों के चार समूह बन जाते हैं।
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सही सुमेलित युग्म पहचानिए।
अर्धसूत्री विभाजन की पश्चावस्था ll में गुणसूत्रबिंदु विभाजित होते हैं तथा तर्कु तंतु अर्धगुणसूत्रों को विपरीत ध्रुवों की ओर खींचते हैं। पश्चावस्था ll के अंत में गुणसूत्रों के चार समूह बन जाते हैं।
सूक्ष्मनलिकाओं के संयोजन हेतु उत्तरदायी अनिवार्य संयोजन है
रिचर्ड वाइन्सबर्ग (1972) ने तथा मिलाने पर ट्यूबुलिन बहुलकीकरण की सूचना दी। सांद्रता बदलकर तथा तापमान घटाकर एवं बढ़ाकर सूक्ष्मनलिका को बार-बार विघटित तथा पुनःसंयोजित किया जा सकता था।
कैल्शियम आश्रित काइनेजेज़ नियंत्रित कर सकते हैं
कैल्शियम आश्रित काइनेजेज़ (CDKs) में कोशिका विभाजन के दौरान कोशिका चक्र की क्रियाओं को नियंत्रित करने की क्षमता होती है।
अर्धसूत्री विभाजन के दौरान सहोदर अर्धगुणसूत्र किसके दौरान पृथक होते हैं:
पश्चावस्था II का आरंभ प्रत्येक गुणसूत्र के गुणसूत्रबिंदु (जो सहोदर अर्धगुणसूत्रों को एक साथ जोड़े हुए था) के एक साथ विदलन से होता है, जिससे वे कोशिका के विपरीत ध्रुवों की ओर गति कर पाते हैं।
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मानव में अर्धसूत्री-I के दौरान एक संतति कोशिका प्राप्त करती है:
अर्धसूत्री विभाजन में समजात गुणसूत्रों का युग्मन तथा उनके बीच पुनर्संयोजन होता है। अर्धसूत्री-I का आरंभ तब होता है जब जनकीय गुणसूत्र S प्रावस्था में प्रतिकृतिकरण करके समरूप सहोदर अर्धगुणसूत्र बना चुके होते हैं।
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गुणसूत्र विसंघनित होकर विसरित क्रोमैटिन में बदल जाते हैं:
अंत्यावस्था के दौरान अपने-अपने ध्रुवों पर पहुँच चुके गुणसूत्र विसंघनित हो जाते हैं तथा अपनी पृथक पहचान खो देते हैं। अलग-अलग गुणसूत्र फिर दिखाई नहीं देते तथा क्रोमैटिन पदार्थ दोनों ध्रुवों पर एक पिंड के रूप में एकत्र हो जाता है।
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अर्धसूत्री विभाजन के दौरान प्रत्येक संतति कोशिका की कुल DNA मात्रा घट जाती है क्योंकि:
अर्धसूत्री विभाजन को न्यूनकारी विभाजन कहते हैं। अर्धसूत्री विभाजन के दौरान प्रत्येक संतति कोशिका की DNA मात्रा घट जाती है क्योंकि कोशिका विभाजन के समय गुणसूत्रों का प्रतिकृतिकरण नहीं होता।
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सहोदर अर्धगुणसूत्रों के लिए निम्नलिखित में से कौन सत्य नहीं है?
अर्धसूत्री-I के दौरान समजात गुणसूत्र पृथक होते हैं जबकि अर्धसूत्री-II के दौरान सहोदर अर्धगुणसूत्र पृथक होते हैं।
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निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
कोशिकाद्रव्य विभाजन के संबंध में उपरोक्त सभी कथन सत्य हैं।
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जीन विनिमय एक एंजाइम-मध्यित प्रक्रिया है। एंजाइम है:
जीन विनिमय दो समजात गुणसूत्रों के बीच आनुवंशिक पदार्थ का विनिमय है। जीन विनिमय भी एक एंजाइम-मध्यित प्रक्रिया है तथा इसमें सम्मिलित एंजाइम पुनर्संयोजनेज़ कहलाता है।
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