NEET प्रश्न (MCQ) हिंदी में — उत्तर और विस्तृत हल सहित

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जंतु कोशिका में कोशिकाद्रव्य विभाजन _______ द्वारा, _______ दिशा में होता है जबकि पादप कोशिका में _______ द्वारा, _______ दिशा में:

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Explanation

जंतु कोशिका में कोशिकाद्रव्य विभाजन जीवद्रव्य झिल्ली में अभिकेंद्री दिशा में खाँच बनने से पूरा होता है जबकि पादप कोशिका में यह कोशिका के केंद्र में कोशिका पट्टिका बनने से होता है जो बाहर की ओर बढ़कर विद्यमान पार्श्व भित्तियों से मिल जाती है (अपकेंद्री)।

(पृष्ठ-166)

नारियल में तरल भ्रूणपोष किसके कारण बनता है:

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कुछ जीवों में केंद्रक विभाजन के बाद कोशिकाद्रव्य विभाजन नहीं होता जिसके परिणामस्वरूप बहुकेंद्रकी अवस्था उत्पन्न होती है और संकोशिका (सिंसाइटियम) बन जाती है (जैसे, नारियल में तरल भ्रूणपोष)।

(पृष्ठ-166)

समसूत्री विभाजन तथा अर्धसूत्री-I के बीच एक अंतर यह है कि:

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अर्धसूत्री-I की पूर्वावस्था I में सूत्रयुग्मन अर्थात जीन विनिमय होता है जबकि समसूत्री विभाजन की पूर्वावस्था में ऐसी कोई घटना नहीं होती।

निम्नलिखित में से कौन असत्य है?

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G1 प्रावस्था समसूत्री विभाजन तथा DNA प्रतिकृतिकरण के आरंभ के बीच के अंतराल के अनुरूप होती है। G1 प्रावस्था के दौरान कोशिका उपापचयी रूप से सक्रिय रहती है तथा निरंतर वृद्धि करती है किंतु अपने DNA का प्रतिकृतिकरण नहीं करती।

अर्धसूत्री विभाजन के दौरान न्यूनीकरण चरण महत्वपूर्ण है क्योंकि:

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अर्धसूत्री विभाजन लैंगिक जनन करने वाले जीवों के जीवन चक्र में अगुणित प्रावस्था का निर्माण सुनिश्चित करता है जबकि निषेचन द्विगुणित प्रावस्था को पुनःस्थापित करता है। पादपों तथा जंतुओं में युग्मकजनन के दौरान हमें अर्धसूत्री विभाजन मिलता है। इससे अगुणित युग्मकों का निर्माण होता है।

(पृष्ठ-167)

मान लीजिए किसी कोशिका का पीढ़ी काल 1 मिनट है। 20 मिनट में एक संवर्धन नलिका (संवर्धन माध्यम) कोशिकाओं से 1/8 भाग तक भर जाती है। नलिका कब पूरी भर जाएगी?

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पीढ़ी काल = 1 मिनट

1 मिनट में कोशिका विभाजन = 2^1 = 2

  2 मिनट = 2^2 = 4

  20 मिनट = 2^20 = नलिका का 1/8 भाग कोशिकाओं से भरा

नलिका की कुल धारिता = 2^20 X 8

  =  2^20 X 2^3

  = 2^23

  = 23 मिनट

उस अर्धसूत्री अवस्था को पहचानिए जिसमें समजात गुणसूत्र पृथक हो जाते हैं जबकि सहोदर अर्धगुणसूत्र अपने गुणसूत्रबिंदुओं पर संबद्ध बने रहते हैं:

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पश्चावस्था I में समजात गुणसूत्र पृथक हो जाते हैं, जबकि सहोदर अर्धगुणसूत्र अपने गुणसूत्रबिंदुओं पर संबद्ध बने रहते हैं।

(पृष्ठ-169)

वाष्पोत्सर्जन तथा मूल दाब पादपों में जल को ऊपर चढ़ाते हैं

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वाष्पोत्सर्जन दारु अवयवों के माध्यम से खींचकर पादपों में जल को ऊपर चढ़ाता है।
मूल दाब दारु अवयवों में जल को धकेलकर पादपों में जल को ऊपर चढ़ाता है।

अतः पादपों में जल का आरोहण क्रमशः वाष्पोत्सर्जन तथा मूल दाब द्वारा खींचने और  धकेलने से होता है।

पादपों में निम्नलिखित में से कौन-सा तत्व पुनर्गतिशील नहीं होता?

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कैल्शियम जैसे तत्व कोशिका के संरचनात्मक अवयव का भाग होते हैं और इसलिए मुक्त नहीं होते। जब तत्व पुनर्गतिशील नहीं होते तब कमी के लक्षण सबसे पहले तरुण ऊतकों में प्रकट होते हैं।

रस के आरोहण के दौरान वाहिका/वाहिनिकाओं में जल स्तंभ प्रायः न तो टूटता है और न विखंडित होता है, इसका कारण है

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(b) जड़ से पादप के वायवीय भागों तक जल का ऊर्ध्वाधर संवहन रस का आरोहण कहलाता है। जल के अणु संसंजन बल नामक आकर्षण बल के कारण एक-दूसरे से जुड़े रहते हैं। यह आकर्षण उनके बीच हाइड्रोजन आबंधों की उपस्थिति के कारण होता है। इस बल का परिमाण बहुत अधिक होता है, अतः दारु में सतत जल स्तंभ गुरुत्व बल अथवा जल की ऊर्ध्वगामी गति में आंतरिक ऊतकों द्वारा उत्पन्न अन्य अवरोधों से आसानी से नहीं टूट पाता। जल का यह आसंजन गुण, अर्थात जल के अणुओं तथा दारु की भित्तियों के बीच आकर्षण, दारु में जल स्तंभ की निरंतरता सुनिश्चित करता है। वाष्पोत्सर्जन के कारण जल रंध्रों से होकर बाह्य वायुमंडल में वाष्पित होता है। परिणामस्वरूप पर्ण कोशिकाओं में निम्न जल विभव विकसित होता है और पर्ण शिराओं से जल पर्ण कोशिकाओं में चला जाता है। बदले में दारु वाहिकाएँ मुख्य तने के दारु से जल खींचती हैं। इस प्रकार सभी पत्तियाँ तनों पर एक दाब (खिंचाव) लगाती हैं, जिसे वाष्पोत्सर्जन खिंचाव कहते हैं। यह इतना प्रबल होता है कि जल स्तंभ को बहुत अधिक ऊँचाई तक खींच सके।

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