NEET प्रश्न (MCQ) हिंदी में — उत्तर और विस्तृत हल सहित

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प्रकाशतंत्र-II के उत्तेजित क्लोरोफिल अणु से निकले इलेक्ट्रॉन सर्वप्रथम किसके द्वारा ग्रहण किए जाते हैं

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प्रकाशतंत्र II के उत्तेजित क्लोरोफिल अणु से निकले इलेक्ट्रॉन सर्वप्रथम क्विनोन द्वारा ग्रहण किए जाते हैं। प्रकाशतंत्र II कुछ इलेक्ट्रॉन वाहकों सहित एक प्रकाश संश्लेषी वर्णक तंत्र है जो ग्रैना थाइलैकॉइड के संपीडित भाग में स्थित होता है। प्रकाशतंत्र II में क्लोरोफिल a, b तथा कैरोटीनॉइड होते हैं। PS II के अन्य घटक फीओफाइटिन, प्लास्टोक्विनोन (PQ), साइटोक्रोम संकुल तथा नीले रंग का ताम्रयुक्त प्लास्टोसायनिन हैं।

C4 -पादपों की पत्तियों में CO2 स्थिरीकरण के दौरान मैलिक अम्ल का संश्लेषण कहाँ होता है 

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C4-पादपों में क्रांज शारीरिकी होती है। C4-पादपों की पत्तियों में संवहन पूल मृदूतकीय कोशिकाओं के पूलाच्छद से घिरे रहते हैं, जो आगे पर्णमध्योतक कोशिकाओं से घिरे होते हैं। C4-पादपों में हैच तथा स्लैक पथ में दो कार्बोक्सिलीकरण अभिक्रियाएँ होती हैं, एक पर्णमध्योतक कोशिकाओं के हरितलवक में तथा दूसरी पूलाच्छद कोशिकाओं के हरितलवक में। प्रारंभिक CO2 स्थिरीकरण पर्णमध्योतक कोशिकाओं में होता है जहाँ प्राथमिक CO2 ग्राही फॉस्फोइनॉल पाइरुवेट है तथा ऑक्सैलोऐसीटेट बनता है। ऑक्सैलोऐसीटेट अपचयित होकर मैलिक अम्ल बनाता है। पर्णमध्योतक कोशिकाओं के हरितलवकों से मैलिक अम्ल पूलाच्छद कोशिकाओं के हरितलवकों में स्थानांतरित होकर विकार्बोक्सिलीकृत होता है तथा CO2 एवं पाइरुविक अम्ल बनाता है। यह CO2 पुनः C3 चक्र द्वारा स्थिर होती है।

पादपों में रंध्र दो छोटी विशिष्ट हरी अधिचर्म कोशिकाओं से घिरा रहता है जिन्हें द्वार कोशिकाएँ कहते हैं। द्वार कोशिकाएँ आकार में छोटी होती हैं तथा इसीलिए स्फीति परिवर्तनों से शीघ्र प्रभावित होती हैं।

पादपों के संचयी अंगों में कार्बोहाइड्रेट सामान्यतः मंड के रूप में पाए जाते हैं। मंड के निम्नलिखित पाँच गुणों (A-E) में से कौन इसे संचयी पदार्थ के रूप में उपयोगी बनाते हैं?

(A) सरलता से स्थानांतरित होने वाला 

(B) रासायनिक रूप से अक्रियाशील

(C) जंतुओं द्वारा सरलता से पचने योग्य

(D) परासरणीय रूप से निष्क्रिय

(E) प्रकाश संश्लेषण के दौरान संश्लेषित

उपयोगी गुण हैं 

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मंड D-ग्लूकोस का उच्च अणुभार वाला बहुलक है जिसमें α 1 → 4 बंध होते हैं। यह हरितलवकों में संश्लेषित होता है क्योंकि यह प्रकाश संश्लेषण के स्थायी अंत्य उत्पादों में से एक है। यह पादपों में सर्वाधिक प्रचुर तथा सामान्य संचयी बहुशर्करा है, अतः मनुष्य एवं शाकाहारियों का प्रमुख आहार है।

पादपों के संचयी अंगों में कार्बोहाइड्रेट सामान्यतः मंड के रूप में पाए जाते हैं। यह रासायनिक रूप से अक्रियाशील तथा परासरणीय रूप से निष्क्रिय बहुशर्करा है जिसका अणुभार बहुत अधिक होता है। कार्बोहाइड्रेट सजीवों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मंड तथा अन्य बहुशर्कराएँ पादपों में, विशेषकर बीजों, कंदों आदि में ऊर्जा संचय का कार्य करती हैं, जो मनुष्य सहित जंतुओं के लिए ऊर्जा का प्रमुख स्रोत हैं।

फाइटोक्रोम के Pr रूप द्वारा अवशोषित प्रकाश की तरंगदैर्घ्य है :

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जब Pr लाल प्रकाश (660-665 nm) अवशोषित करता है तो यह Pfr रूप में बदल जाता है तथा जब Pfr सुदूर लाल प्रकाश (730-735 nm) अवशोषित करता है तो यह Pr रूप में बदल जाता है।

प्रकाश श्वसन के दौरान ऑक्सीजन उपभोगी अभिक्रिया(एँ) कहाँ होती है :

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प्रकाश श्वसन की प्रथम अभिक्रिया हरितलवक के स्ट्रोमा में होती है। इस अभिक्रिया में RuBP (राइबुलोस 1-5 बाइफॉस्फेट) रुबिस्को की उपस्थिति में एक ऑक्सीजन अणु का उपभोग करता है।

परॉक्सीसोम में हरितलवक से स्थानांतरित ग्लाइकोलेट O2 ग्रहण करके ग्लाइऑक्सिलेट बनाता है जबकि उपोत्पाद के रूप में H2O2 मुक्त होता है।

प्रकाश श्वसन किसके द्वारा प्रेरित होता है

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प्रकाश श्वसन एक प्रकार का श्वसन है जो परॉक्सीसोम नामक छोटे कोशिकांगों में होता है, तथा चूँकि यह केवल प्रकाश में होता है, इसे प्रकाश श्वसन कहते हैं। माइटोकॉन्ड्रिया में होने वाले सामान्य श्वसन अथवा अप्रकाशिक श्वसन के विपरीत, प्रकाश श्वसन में न तो ATP बनता है और न ही अपचयित NAD। मुक्त ऊर्जा ऊष्मा के रूप में नष्ट हो जाती है। निम्न कार्बन डाइऑक्साइड तथा उच्च ऑक्सीजन सांद्रता की दशाओं में, जो सामान्य वायुमंडलीय दशाएँ हैं, प्रकाश संश्लेषण द्वारा स्थिरीकृत कार्बन का 30-50 प्रतिशत तक भाग प्रकाश श्वसन द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड के रूप में नष्ट हो सकता है तथा उसे स्थिर करने में लगी ऊर्जा पादप के लिए व्यर्थ हो जाती है।

उच्च पादपों में निम्नलिखित की आयनिक रूप में आवश्यकता अचक्रीय प्रकाश-फॉस्फोरिलीकरण के दौरान होती है किंतु चक्रीय प्रकाश-फॉस्फोरिलीकरण के दौरान नहीं। 

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प्रकाशतंत्र II में Mn2+ युक्त प्रोटीनों का एक संकुल होता है, जिसे जल-अपघटन केंद्र कहते हैं, जो जल से इलेक्ट्रॉन निकालकर ऑक्सीजन तथा प्रोटॉन मुक्त करता है और उन इलेक्ट्रॉनों को P680 अणुओं तक पहुँचाकर उन्हें मूल अवस्था में लौटा देता है। इस प्रक्रिया में मैंगनीज आयनों की विशेष भूमिका होती है किंतु क्लोराइड तथा कैल्सियम आयन भी सहायक होते हैं।

प्रकाश श्वसन सामान्यतः कितने कोशिकांगों में होता है

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प्रकाश श्वसन में ऑक्सीजन का ग्रहण तथा कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन प्रकाश पर निर्भर होता है। RuBP कार्बोक्सिलेज, RuBP ऑक्सीजनेज की भाँति कार्य करता है। प्रकाश श्वसन हरितलवक में होता है तथा इसमें परॉक्सीसोम एवं माइटोकॉन्ड्रिया की सहायता आवश्यक होती है।

प्रकाश संश्लेषी जीवाणुओं में क्या नहीं होता

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 प्रकाश संश्लेषी जीवाणुओं में क्वांटासोम नहीं होता। प्रकाश संश्लेषी जीवाणु दो प्रकार के होते हैं — ऑक्सीजनी (सायनोबैक्टीरिया) तथा अनॉक्सीजनी (H2S दाता जैसे बैंगनी सल्फर एवं हरे सल्फर जीवाणु तथा कार्बनिक दाता जैसे बैंगनी असल्फर एवं हरे असल्फर जीवाणु)। जीवाणुओं में केवल एक ही प्रकाशतंत्र होता है, अर्थात् हरे सल्फर जीवाणुओं में टाइप I अभिक्रिया केंद्र (PS I - 700) तथा असल्फर जीवाणुओं में टाइप II अभिक्रिया केंद्र (PS II - 680)।

C3 पादपों में प्रकाश श्वसन किससे प्रारंभ होता है:

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C3 पादपों में प्रकाश श्वसन का प्रारंभ राइबुलोस-1,5-बाइफॉस्फेट (RuBP) से फॉस्फोग्लाइकोलेट के निर्माण से होता है, जब कार्बन डाइऑक्साइड के स्थान पर ऑक्सीजन RuBP कार्बोक्सिलेज/ऑक्सीजनेज (रुबिस्को) एंजाइम से जुड़ती है। यह फॉस्फोग्लाइकोलेट फिर विफॉस्फोरिलीकृत होकर ग्लाइकोलेट बनाता है तथा प्रकाश-श्वसनीय पथ प्रारंभ होता है।

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