PEP किन कोशिकाओं में उपस्थित होता है?
पृष्ठ-219, पैरा 2
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PEP किन कोशिकाओं में उपस्थित होता है?
पृष्ठ-219, पैरा 2
O2 तथा CO2 के प्रति RuBisCO का बंधन है –
पृष्ठ-220; प्रकाश श्वसन; पैरा 2
ताप किस प्रक्रिया को अधिक संवेदनशीलता से प्रभावित करेगा?
पृष्ठ-223 प्रकाश संश्लेषण को प्रभावित करने वाले कारक- ताप; पैरा 1
ऑक्सीकारी फॉस्फोरिलीकरण है
ऑक्सीकारी फॉस्फोरिलीकरण ऑक्सीजन की उपस्थिति में ADP तथा अकार्बनिक फॉस्फेट (P1) से ATP बनने की प्रक्रिया है। यह मुख्यतः कोशिकीय श्वसन की इलेक्ट्रॉन परिवहन शृंखला (ETC) में होती है।
निम्नलिखित में से किस प्रक्रिया में CO2 मुक्त नहीं होती?
वसा, कार्बोहाइड्रेट तथा प्रोटीन के श्वसन-जनित विघटन में कौन-सा उपापचयज सामान्य है?
ऐसीटिल Co-A वसा, कार्बोहाइड्रेट तथा प्रोटीन के श्वसन-जनित विघटन में सामान्य है। ग्लूकोस तथा फ्रक्टोस हेक्सोकाइनेज एंजाइम की सक्रियता द्वारा फॉस्फोरिलीकृत होकर ग्लूकोस-6-फॉस्फेट बनाते हैं।
ग्लूकोस-6-फॉस्फेट फिर फ्रक्टोस 6 फॉस्फेट में तथा आगे फ्रक्टोस 1-6-बाइफॉस्फेट में बदल जाता है। पाइरुविक अम्ल ग्लाइकोलिसिस का अंत्य उत्पाद है।
वह ऊर्जा-मुक्तकारी उपापचयी प्रक्रिया जिसमें क्रियाधार का ऑक्सीकरण बाह्य इलेक्ट्रॉन ग्राही के बिना होता है, कहलाती है
(b) किण्वन में ग्लूकोस का अपूर्ण ऑक्सीकरण अवायवीय दशाओं में अभिक्रियाओं के एक समुच्चय द्वारा होता है, जिसमें पाइरुविक अम्ल CO2 तथा एथेनॉल में बदल जाता है। पाइरुविक अम्ल डीकार्बोक्सिलेज तथा ऐल्कोहॉल डिहाइड्रोजिनेज एंजाइम इन अभिक्रियाओं का उत्प्रेरण करते हैं। जंतु कोशिकाओं में भी, जैसे व्यायाम के दौरान पेशियों में, जहाँ कोशिकीय श्वसन के लिए ऑक्सीजन अपर्याप्त होती है, पाइरुविक अम्ल लैक्टेट डिहाइड्रोजिनेज द्वारा अपचयित होकर लैक्टिक अम्ल बनाता है। अपचायक NADH + H+ है, जो दोनों प्रक्रियाओं में पुनःऑक्सीकृत होकर NAD+ बनता है
वायवीय श्वसन पथ को उपयुक्त रूप से क्या कहा जाता है
उभयचयी पथ वह जैवरासायनिक पथ है जो उपचयी तथा अपचयी दोनों प्रक्रियाओं में कार्य करता है। उभयचयी पथ का एक महत्वपूर्ण उदाहरण क्रेब्स चक्र है, जिसमें कार्बोहाइड्रेट एवं वसा अम्ल का अपचय तथा ऐमीनो अम्ल संश्लेषण हेतु उपचयी पूर्ववर्तियों का संश्लेषण दोनों सम्मिलित हैं। जैसे, -कीटोग्लूटारेट तथा ऑक्सैलोऐसीटेट।
ऑक्सीकारी फॉस्फोरिलीकरण की रसोपरासरणी युग्मन परिकल्पना यह प्रस्तावित करती है कि ऐडिनोसीन ट्राइफॉस्फेट (ATP) इसलिए बनता है क्योंकि
अपचयित सहएंजाइमों के ऑक्सीकरण तथा अंतिम ऑक्सीकरण के दौरान मुक्त ऊर्जा की सहायता से ATP का उत्पादन ऑक्सीकारी फॉस्फोरिलीकरण कहलाता है। पीटर मिचेल (1961) ने ATP संश्लेषण हेतु रसोपरासरणी परिकल्पना नामक एक परिकल्पना प्रस्तुत की। इसके अनुसार जब इलेक्ट्रॉन द्वैत प्रोटॉन-इलेक्ट्रॉन वाहक से किसी अ-हाइड्रोजन वाहक की ओर प्रवाहित होते हैं तो H+ मुक्त होकर अंतरझिल्ली अवकाश में निष्कासित हो जाते हैं और इस प्रकार एक प्रोटॉन प्रवणता बनती है जिसमें अंतरझिल्ली अवकाश में H+ की सांद्रता आधात्री की तुलना में अधिक होती है। प्रोटॉन प्रेरक बल के कारण प्रोटॉन वापस प्रवाहित होते हैं तथा इस वापसी प्रवाह के दौरान मुक्त ऊर्जा F1 शीर्ष में उपस्थित ATPase को सक्रिय करके ATP का संश्लेषण कराती है।
निम्नलिखित में से कौन-सी स्तनधारी कोशिका ग्लूकोस का वायवीय रूप से कार्बन डाइऑक्साइड में उपापचय करने में असमर्थ है?
(d) परिपक्व लाल रुधिर कोशिकाओं में कोशिकांग तथा केंद्रक अनुपस्थित होते हैं, अतः इनमें वायवीय श्वसन नहीं होता।
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