Periplaneta americana? के विषय में क्या गलत है
रुधिर [हीमोलिंफ में RBC अथवा वर्णक नहीं होता]। ऑक्सीजन नलिकाओं के तंत्र द्वारा पहुँचाई जाती है।
NCERT पृष्ठ 113
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Periplaneta americana? के विषय में क्या गलत है
रुधिर [हीमोलिंफ में RBC अथवा वर्णक नहीं होता]। ऑक्सीजन नलिकाओं के तंत्र द्वारा पहुँचाई जाती है।
NCERT पृष्ठ 113
घाँटीढक्कन, कर्णपाली तथा नाक के अग्रभाग में उपस्थित उपास्थि का प्रकार है:
तथ्यात्मक
सघन अनियमित संयोजी ऊतक किसमें उपस्थित होता है:
XI NCERT का पृष्ठ 103 देखें
जटिल जंतुओं के शरीर में सर्वाधिक प्रचुर तथा व्यापक रूप से वितरित ऊतक है:
XI NCERT का पृष्ठ 102 देखें
गैप संधि का कार्य है
गैप संधि को नेक्सस अथवा मैक्युला कम्युनिकेंस भी कहा जाता है। ये अनेक प्रकार की जंतु कोशिकाओं के बीच विशिष्ट अंतराकोशिकीय संयोजन हैं। ये दो कोशिकाओं के कोशिकाद्रव्य को सीधे जोड़ती हैं, जिससे विभिन्न अणु, आयन तथा वैद्युत आवेग कोशिकाओं के बीच एक नियंत्रित द्वार से होकर सीधे गुजर सकते हैं।
निम्नलिखित में से किस जंतु में दो अलग-अलग परिसंचरण पथ होते हैं?
वह परिसंचरण तंत्र जिसमें रुधिर प्रवाह हेतु दो अलग-अलग एवं पृथक परिसंचरण पथ सम्मिलित होते हैं, द्विपरिसंचरण तंत्र (द्वि-पाश परिसंचरण तंत्र) कहलाता है। यह स्तनधारियों तथा पक्षियों में पाया जाता है; व्हेल एक स्तनधारी है, अतः इसमें उपर्युक्त लक्षण पाया जाता है।
तिलचट्टे के शरीर के टर्गा, स्टर्ना तथा प्लूरा किसके द्वारा जुड़े होते हैं
NCERT, पृष्ठ संख्या 111
जंतुओं में संरचनात्मक संगठन
7.4.1 आकारिकी
सही सुमेलित युग्म चुनिए।
एरिओलर ऊतक एक शिथिल संयोजी ऊतक है तथा लचीलापन एवं गद्देदार आधार प्रदान करता है। वसा ऊतक भी शिथिल संयोजी ऊतक है, जबकि कंडरा एक सघन संयोजी ऊतक है, जो पेशियों को अस्थि से जोड़ती है। उपास्थि कॉन्ड्रोसाइट कहलाने वाले विशिष्ट संयोजी ऊतक से बनी होती है, जो कोलैजन तंतुओं से बना बड़ी मात्रा में बाह्यकोशिकीय आधात्री उत्पन्न करती हैं।
निम्नलिखित में से कौन-सा सामान्य तिलचट्टे में होने वाली घटना को सही ढंग से बताता है?
तिलचट्टे में मैंडिबल कठोर, मजबूत, बड़ी, गहरे रंग की त्रिकोणीय संरचनाओं का एक जोड़ा हैं, जो क्षैतिज गति करते हैं तथा अपने बीच भोजन को कुचलते हैं। पेषणी अथवा प्रोवेंट्रिकुलस में मोटी वर्तुल पेशियों की बाह्य परत तथा मोटी आंतरिक उपत्वचा होती है, जो छह अत्यधिक काइटिनी पट्टिकाएँ बनाती है, जिन्हें दंत कहते हैं। पेषणी पीसने वाले कक्ष की भाँति कार्य करती है तथा भोजन कणों को पीसने में सहायक होती है।
रुधिर वाहिकाओं की आंतरिक भित्ति बनाने वाली उपकला का प्रकार है
सरल शल्की उपकला में चपटी, शल्क जैसी, प्रायः बहुभुजी कोशिकाओं की केवल एक ही परत होती है, जो मोजैक की टाइलों की भाँति एक-दूसरे से सटी हुई होती हैं। इसे फर्शी उपकला भी कहते हैं। यह रुधिर वाहिकाओं, लसीका वाहिकाओं, हृदय, पेरिटोनियम, प्लूरा, बोमन संपुट आदि का आस्तर बनाती है।
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