श्वसनिकाओं तथा अंडवाहिनियों की आंतरिक सतह पर उपस्थित उपकला ऊतक है
पक्ष्माभी स्तंभाकार उपकला श्वसन मार्ग (श्वसनियों का निचला सिरा), अंडवाहिनियों, मस्तिष्क के निलयों (एपेंडाइमा), मेरुरज्जु की केंद्रीय नाल आदि का आस्तर बनाती है।
घनाकार उपकला वृक्कों के वृक्काणुओं के कुछ भागों में पाई जाती है।
ग्रंथिल उपकला स्रावी क्रियाओं हेतु विशिष्टीकृत होती है, जैसे एककोशिकीय, बहुकोशिकीय, बहिःस्रावी, अंतःस्रावी, मिश्रस्रावी ग्रंथियाँ आदि।
शल्की उपकला रुधिर वाहिकाओं, लसीका वाहिका, हृदय, पेरिटोनियम, प्लूरा, बोमन संपुट आदि का आस्तर बनाती है।