NEET प्रश्न (MCQ) हिंदी में — उत्तर और विस्तृत हल सहित

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मैलोनेट द्वारा सक्सिनिक डिहाइड्रोजिनेज का संदमन किसका उदाहरण है

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Explanation

(a) सक्सिनेट की संदमक मैलोनेट से संरचनात्मक समानता है। इसलिए मैलोनेट एंजाइम सक्सिनिक डिहाइड्रोजिनेज के सक्रिय स्थल से बंधने के लिए सक्सिनेट (क्रियाधार) से प्रतिस्पर्धा करता है। अतः यह प्रतिस्पर्धी संदमन है।

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एंजाइम के प्रतिस्पर्धी संदमन का एक उदाहरण है:

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(a) एंजाइम के प्रतिस्पर्धी संदमन का एक उदाहरण मैलोनिक अम्ल द्वारा सक्सिनिक डिहाइड्रोजिनेज का संदमन है। यह प्रतिस्पर्धी संदमन का सरल प्रकार है। प्रतिस्पर्धी  संदमक क्रियाधार से मिलता-जुलता है और एंजाइम के सक्रिय स्थल से बंध जाता है। तब क्रियाधार उसी सक्रिय स्थल से बंधने से रुक जाता है।

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निम्नलिखित में से किसमें β-1, 4 बंधन होता है?

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(c) लैक्टोस या दुग्ध शर्करा (कार्बोहाइड्रेट) एक अपचायक शर्करा है जो गैलेक्टोस तथा ग्लूकोस के बीच β-1→4 संघनन से बनती है। लैक्टोस प्रकृति में स्तन ग्रंथि के उत्पाद के अतिरिक्त कहीं नहीं पाई जाती। गाय, भैंस तथा बकरी के दूध की तुलना में यह मानव दूध में सर्वाधिक होती है। लैक्टोस ग्लूकोस, फ्रक्टोस तथा गैलेक्टोस का उत्पाद है।

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कौन-सा कथन सत्य है?

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(b)

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एंजाइम, विटामिन तथा हॉर्मोन को जैविक रसायनों की एक ही श्रेणी में वर्गीकृत किया जा सकता है क्योंकि ये सभी

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(d) एंजाइम प्रोटीन हैं जो अल्प मात्रा में जैविक अभिक्रियाओं की दर को तीव्र करते हैं और उपापचय के नियमन में सहायता करते हैं।

हॉर्मोन भी उपापचयी नियामक हैं और एक या अधिक शारीरिक प्रक्रियाओं के उद्दीपन या संदमन में सहायता करते हैं।

विटामिन सहायक आहार कारक हैं जो उपापचय तथा शरीर की कार्यप्रणाली के नियंत्रण के लिए अल्प मात्रा में आवश्यक होते हैं।

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फलों तथा सब्जियों की कटी हुई सतहें प्रायः काली पड़ जाती हैं क्योंकि

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(b) टैनिक अम्ल पादपों में पाया जाने वाला एक जटिल कार्बनिक अम्ल है।  जब ताज़े फलों तथा सब्जियों को छीला या काटा जाता है, तो चाकू कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त कर देता है। टैनिक अम्ल (चाकू से आए) लौह आयनों से अभिक्रिया करके फेरिक टैनेट (भूरा-काला रंग) बनाता है। साथ ही, हवा की ऑक्सीजन लोहे से अभिक्रिया करके आयरन ऑक्साइड बनाती है। यह ठीक उस जंग की तरह है जो लोहे की वस्तुओं की सतह पर बनती है। पॉलीफीनॉल ऑक्सीडेज नामक एंजाइम (इन कोशिकाओं में उपस्थित) इस अभिक्रिया को तेज़ करने में सहायता करता है।

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कपास के रेशों में मुख्यतः होता है

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(a) कपास के रेशे बीजावरण कोशिकाओं के अधिचर्मीय प्रवर्ध हैं। कच्चे कपास के रेशे के विश्लेषण से औसतन निम्नलिखित मान प्राप्त होते हैं: सेलुलोस-94%, प्रोटीन -1.3%, पेक्टिक पदार्थ-0.9%, भस्म-1.2%, मोम-0.6%, शर्कराएँ-0.3% तथा वर्णकों और खनिज पदार्थों के अंश।

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निम्नलिखित में से कौन-सी शर्करा पादपों में नहीं पाई जाती?

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(c) सुक्रोस, ग्लूकोस तथा फ्रक्टोस, तीनों शर्कराएँ पादपों में पाई जाती हैं। सुक्रोस व्यावसायिक शर्करा है जो गन्ने से प्राप्त होती है। ग्लूकोस पादपों तथा जंतुओं में मुख्य श्वसन क्रियाधार है। फ्रक्टोस भी इसी प्रकार कार्य कर सकता है। इसके अतिरिक्त फ्रक्टोस सामान्य फल शर्करा भी है।

लैक्टोस या दुग्ध शर्करा प्राकृतिक रूप से दूध में पाई जाती है। यह अपचायक शर्करा है जो स्तनधारी की स्तन ग्रंथियों में दो हेक्सोस अणुओं के संघनन से बनती है।

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जूट के रेशे शीघ्र खराब हो जाते हैं क्योंकि

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(a) जूट के रेशों के शीघ्र खराब होने का कारण उनमें सेलुलोस की अधिक मात्रा है। जूट की कोशिका भित्तियों में सेलुलोस का प्रमुख भाग तथा लिग्निन का निम्न स्तर होता है। सूक्ष्मजीवों को लिग्निन का अपघटन कठिन लगता है, परंतु चूँकि सेलुलोस उनके द्वारा भोजन के रूप में प्रयुक्त होता है, जूट का अपघटन आसान हो जाता है।

 

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50 ग्राम जीवित ऊतक में जल की मात्रा कितनी होगी?

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(c) जल जीवित जीव में सर्वाधिक प्रचुर रासायनिक यौगिक है। कोशिका में जल कोशिकीय द्रव्यमान का 70-90% होता है। अतः 50 ग्राम जीवित ऊतक में 35-45 ग्राम जल उपस्थित होगा।

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