द ब्रॉग्ली की परिकल्पना ने बोर के मॉडल में किस मूलभूत अवधारणा की व्याख्या दी?
पाठ कहता है: 'इस प्रकार द ब्रॉग्ली परिकल्पना ने परिक्रमा करते इलेक्ट्रॉन के कोणीय संवेग के क्वांटीकरण के बोर के द्वितीय अभिगृहीत की व्याख्या दी।'
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द ब्रॉग्ली की परिकल्पना ने बोर के मॉडल में किस मूलभूत अवधारणा की व्याख्या दी?
पाठ कहता है: 'इस प्रकार द ब्रॉग्ली परिकल्पना ने परिक्रमा करते इलेक्ट्रॉन के कोणीय संवेग के क्वांटीकरण के बोर के द्वितीय अभिगृहीत की व्याख्या दी।'
द ब्रॉग्ली की व्याख्या के अनुसार, क्वांटित इलेक्ट्रॉन कक्षाएँ और ऊर्जा अवस्थाएँ किसका प्रत्यक्ष परिणाम हैं?
पाठ कहता है: 'क्वांटित इलेक्ट्रॉन कक्षाएँ और ऊर्जा अवस्थाएँ इलेक्ट्रॉन की तरंग प्रकृति के कारण हैं और केवल अनुनादी अप्रगामी तरंगें ही बनी रह सकती हैं।'
द ब्रॉग्ली की व्याख्या के अनुसार $n^{th}$ बोर कक्षा की परिधि ($2\pi r_n$) और द ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य ($\lambda$) के बीच क्या संबंध है?
संदर्भ स्थायी कक्षाओं की शर्त बताता है: '$2\pi r_n = n\lambda$, n = 1, 2, 3...'
इलेक्ट्रॉन जैसे उप-परमाण्विक कणों की तुलना में स्थूल वस्तुओं की द ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा सत्य है?
'DUAL_NATURE_OF_RADIATION_AND_MATTER' का संदर्भ कहता है: 'यह तरंगदैर्ध्य इतनी छोटी है कि यह किसी भी मापन से परे है। यही कारण है कि हमारे दैनिक जीवन की स्थूल वस्तुएँ तरंग-सदृश गुण नहीं दर्शातीं। दूसरी ओर, उप-परमाण्विक क्षेत्र में कणों का तरंग स्वरूप महत्वपूर्ण और मापनीय है।'
द ब्रॉग्ली ने बोर द्वारा अपना मॉडल प्रस्तावित करने के वर्षों बाद अपनी परिकल्पना विकसित की। द ब्रॉग्ली ने बोर के द्वितीय अभिगृहीत की व्याख्या कब की?
पाठ स्पष्ट रूप से कहता है: 'फ्रांसीसी भौतिकविद लुई द ब्रॉग्ली ने 1923 में, बोर द्वारा अपना मॉडल प्रस्तावित करने के दस वर्ष बाद, इस पहेली की व्याख्या की।'
कोणीय संवेग का क्वांटीकरण, $m v_n r_n = nh/2\pi$, द ब्रॉग्ली की तरंगदैर्ध्य परिकल्पना ($\lambda = h/mv_n$) को किस अन्य शर्त के साथ मिलाने का प्रत्यक्ष परिणाम है?
पाठ व्युत्पत्ति दर्शाता है: समीकरण (12.12) से, जो $2\pi r_n = n\lambda$ है, और $\lambda = h/mv_n$ प्रतिस्थापित करने पर हमें $2\pi r_n = n(h/mv_n)$ मिलता है, जो पुनर्व्यवस्थित होकर $m v_n r_n = nh/2\pi$ बनता है। यह दर्शाता है कि द ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य और अप्रगामी तरंग शर्त का संयोजन बोर की क्वांटीकरण शर्त की ओर ले जाता है।
द ब्रॉग्ली की व्याख्या से पहले बोर के मॉडल का कौन-सा पक्ष 'सबसे उलझन भरा' माना जाता था?
पाठ कहता है: 'बोर ने परमाणु के अपने मॉडल में जो अभिगृहीत बनाए, उनमें संभवतः सबसे उलझन भरा उनका द्वितीय अभिगृहीत है। यह कहता है कि नाभिक के चारों ओर परिक्रमा करते इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग क्वांटित होता है'।
द ब्रॉग्ली संबंध ($ \lambda = h/p $) में द्रव्य के बारे में कौन-सी मूलभूत अवधारणा अंतर्निहित है?
संदर्भ ('DUAL_NATURE_OF_RADIATION_AND_MATTER' सारांश) उल्लेख करता है: 'द्रव्य की द्वैतता द ब्रॉग्ली संबंध में अंतर्निहित है जिसमें एक तरंग अवधारणा ($\lambda$) और एक कण अवधारणा ($p$) है।'
द ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य मुख्यतः किसके लिए उल्लेखनीय रूप से मापनीय है?
'DUAL_NATURE_OF_RADIATION_AND_MATTER' का पाठ कहता है: 'यह केवल इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन आदि जैसे उप-परमाण्विक कणों के मामले में उल्लेखनीय रूप से मापनीय है (क्रिस्टलों में परमाणु-तलों के अंतराल की कोटि की) (उनके द्रव्यमानों और अतः संवेगों की लघुता के कारण)।'
जब किसी कण की चाल बढ़ रही हो तो त्वरण और वेग के बीच संबंध का सही वर्णन निम्नलिखित में से कौन-सा कथन करता है?
'विचारणीय बिंदु' के बिंदु 2 के अनुसार, 'यदि कोई कण तेज़ हो रहा है, तो त्वरण वेग की दिशा में है; यदि उसकी चाल घट रही है, तो त्वरण वेग की विपरीत दिशा में है।' यह सीधे प्रश्न का उत्तर देता है।
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