अंतराकाशी यौगिकों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?
संदर्भ कहता है: 'उनके गलनांक उच्च होते हैं, शुद्ध धातुओं से भी अधिक।' अतः यह कथन कि उनके गलनांक कम होते हैं, गलत है।
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अंतराकाशी यौगिकों के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?
संदर्भ कहता है: 'उनके गलनांक उच्च होते हैं, शुद्ध धातुओं से भी अधिक।' अतः यह कथन कि उनके गलनांक कम होते हैं, गलत है।
उत्प्रेरण के दौरान अभिकारक अणुओं और ठोस उत्प्रेरक सतह के परमाणुओं के बीच बंध बनने का मुख्य प्रभाव क्या है?
संदर्भ समझाता है: 'ठोस सतह पर उत्प्रेरकों में अभिकारक अणुओं और उत्प्रेरक की सतह के परमाणुओं के बीच बंध बनना शामिल है... इसका प्रभाव उत्प्रेरक सतह पर अभिकारकों की सांद्रता बढ़ाना और अभिक्रियाशील अणुओं के बंधों को दुर्बल करना भी है (सक्रियण ऊर्जा कम हो रही है)।'
दिए गए पाठ में उल्लिखित अंतराकाशी यौगिकों की विशेषता निम्नलिखित में से कौन-सी नहीं है?
पाठ स्पष्ट कहता है: 'वे प्रायः अरससमीकरणमितीय होते हैं और न तो प्ररूपी आयनिक होते हैं न सहसंयोजक।' अतः प्ररूपी आयनिक बंधन दर्शाना कोई विशेषता नहीं है।
आयोडाइड और परसल्फेट आयनों के बीच उत्प्रेरकीय अभिक्रिया पर विचार कीजिए: $2 I^- + S_2O_8^{2-} \to I_2 + 2 SO_4^{2-}$। इस अभिक्रिया में कौन-सा संक्रमण धातु आयन उत्प्रेरक का कार्य करता है, और प्रक्रम के दौरान इसकी ऑक्सीकरण अवस्था कैसे बदलती है?
संदर्भ यह उदाहरण देता है: 'उदाहरण के लिए, आयरन(III) आयोडाइड और परसल्फेट आयनों के बीच अभिक्रिया को उत्प्रेरित करता है। $2 Fe^{3+} + 2 I^- \to 2 Fe^{2+} + I_2$ और $2 Fe^{2+} + S_2O_8^{2-} \to 2 Fe^{3+} + 2SO_4^{2-}$'। यह स्पष्ट दर्शाता है कि लोहा +3 से +2 और फिर वापस +3 में बदलता है।
पॉलीएथिलीन के निर्माण में प्रयुक्त ज़ीग्लर उत्प्रेरक $TiCl_4$ और किस अन्य यौगिक पर आधारित हैं?
पाठ कहता है: '$TiCl_4$ के साथ $Al(CH_3)_3$ पॉलीएथिलीन (पॉलीथीन) के निर्माण में प्रयुक्त ज़ीग्लर उत्प्रेरकों का आधार बनाता है।'
वसा के हाइड्रोजनीकरण के लिए प्रायः कौन-सा संक्रमण धातु उत्प्रेरक प्रयुक्त होता है?
पाठ उल्लेख करता है: 'निकेल उत्प्रेरक वसा के हाइड्रोजनीकरण को संपन्न होने में सक्षम बनाते हैं।'
वाकर प्रक्रम में एथाइन के एथेनैल में ऑक्सीकरण को उत्प्रेरित करता है:
संदर्भ स्पष्ट कहता है: 'वाकर प्रक्रम में एथाइन के एथेनैल में ऑक्सीकरण को $PdCl_2$ द्वारा उत्प्रेरित किया जाता है।'
s और p कक्षकों की तुलना में संक्रमण तत्वों के d-कक्षक उत्प्रेरकीय सक्रियता में अधिक प्रभावशाली क्यों हैं?
संदर्भ समझाता है: 'संक्रमण तत्वों के d कक्षक अन्य कक्षकों (अर्थात् s और p) की तुलना में परमाणु की परिधि तक अधिक बाहर निकले होते हैं, अतः वे परिवेश से अधिक प्रभावित होते हैं और साथ ही अपने आसपास के परमाणुओं या अणुओं को प्रभावित करते हैं।'
निम्नलिखित में से कौन-सा यौगिक अंतराकाशी यौगिक का उदाहरण है?
संदर्भ अंतराकाशी यौगिकों के उदाहरण देता है: 'उदाहरण के लिए, TiC, Mn4N, Fe3H, VH0.56 और TiH1.7 आदि।'
संक्रमण धातु आयन प्रभावी उत्प्रेरक बनते हैं क्योंकि वे सक्षम हैं:
पाठ कहता है: 'साथ ही, चूँकि संक्रमण धातु आयन अपनी ऑक्सीकरण अवस्थाएँ बदल सकते हैं, वे उत्प्रेरक के रूप में अधिक प्रभावी बन जाते हैं।'
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