रासायनिक रूप से पेप्टाइड बंधन क्या है?
NCERT पाठ स्पष्ट कहता है, 'रासायनिक रूप से, पेप्टाइड बंधन –COOH समूह और –NH2 समूह के बीच बना ऐमाइड है।' (Biomolecules_chemistry, पृष्ठ 292)।
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रासायनिक रूप से पेप्टाइड बंधन क्या है?
NCERT पाठ स्पष्ट कहता है, 'रासायनिक रूप से, पेप्टाइड बंधन –COOH समूह और –NH2 समूह के बीच बना ऐमाइड है।' (Biomolecules_chemistry, पृष्ठ 292)।
यदि किसी प्रोटीन की प्राथमिक संरचना में परिवर्तन होता है, तो इसका क्या परिणाम होता है?
NCERT पाठ समझाता है, 'इस प्राथमिक संरचना, अर्थात् अमीनो अम्लों के अनुक्रम, में कोई भी परिवर्तन एक भिन्न प्रोटीन बनाता है।' (Biomolecules_chemistry, पृष्ठ 293)।
निम्नलिखित में से कौन-सा बंध प्रोटीन की प्राथमिक संरचना स्थापित करने में सीधे शामिल नहीं है?
प्राथमिक संरचना पेप्टाइड (ऐमाइड) बंधों से जुड़े अमीनो अम्लों के अनुक्रम द्वारा परिभाषित होती है, जो सहसंयोजक होते हैं। एस्टर बंध प्राथमिक संरचना में अमीनो अम्लों को जोड़ने में शामिल नहीं होते।
निम्नलिखित में से कौन-सी तकनीक रोगजनक की सांद्रता बहुत कम होने पर रोगों के शीघ्र निदान के लिए मुख्यतः प्रयुक्त नहीं होती?
संदर्भ कहता है कि पुनर्योगज DNA प्रौद्योगिकी, PCR और ELISA कुछ ऐसी तकनीकें हैं जो शीघ्र निदान का उद्देश्य पूरा करती हैं। तथापि, पुनर्योगज DNA प्रौद्योगिकी स्वयं जीन हेरफेर की एक व्यापक तकनीक है, जबकि PCR और ELISA विशेष रूप से शीघ्र निदान हेतु रोगजनकों की कम सांद्रता या विशिष्ट जीन उत्परिवर्तनों का पता लगाने के लिए प्रयुक्त होती हैं। ऑटोरेडियोग्राफी प्रोब संकरण के बाद की एक पहचान विधि है, जो संदर्भ में वर्णित अनुसार उत्परिवर्तित जीनों के आणविक निदान का भाग है।
PCR निम्नलिखित में से किस अनुप्रयोग के लिए नियमित रूप से प्रयुक्त होती है?
NCERT पाठ स्पष्ट कहता है: 'PCR अब संदिग्ध AIDS रोगियों में HIV का पता लगाने के लिए नियमित रूप से प्रयुक्त होती है। इसका उपयोग संदिग्ध कैंसर रोगियों में जीनों के उत्परिवर्तनों का पता लगाने के लिए भी किया जा रहा है। यह अनेक अन्य आनुवंशिक विकारों की पहचान के लिए एक शक्तिशाली तकनीक है।'
उत्परिवर्तित जीनों का पता लगाने के संदर्भ में एक रेडियोसक्रिय प्रोब प्रयुक्त होती है। ऑटोरेडियोग्राफी द्वारा इसकी पहचान के लिए प्रोब की कौन-सी विशेषता महत्वपूर्ण है?
संदर्भ उल्लेख करता है: 'रेडियोसक्रिय अणु से टैग किए गए एकल-रज्जुकी DNA या RNA (प्रोब) को कोशिकाओं के एक क्लोन में उसके पूरक DNA से संकरण करने दिया जाता है, जिसके बाद ऑटोरेडियोग्राफी द्वारा पहचान की जाती है।' ऑटोरेडियोग्राफी द्वारा पहचान के लिए रेडियोसक्रियता आवश्यक है।
ELISA में पहचान का आधार क्या है?
NCERT पाठ स्पष्ट कहता है: 'ELISA प्रतिजन-प्रतिरक्षी अन्योन्यक्रिया के सिद्धांत पर आधारित है। रोगजनक द्वारा संक्रमण का पता प्रतिजनों (प्रोटीन, ग्लाइकोप्रोटीन आदि) की उपस्थिति से या रोगजनक के विरुद्ध संश्लेषित प्रतिरक्षियों का पता लगाकर लगाया जा सकता है।'
रेडियोसक्रिय प्रोब और ऑटोरेडियोग्राफी द्वारा पहचान करते समय उत्परिवर्तित जीन वाला क्लोन फोटोग्राफिक फिल्म पर क्यों नहीं दिखाई देगा?
NCERT पाठ समझाता है: 'अतः उत्परिवर्तित जीन वाला क्लोन फोटोग्राफिक फिल्म पर नहीं दिखाई देगा, क्योंकि प्रोब की उत्परिवर्तित जीन के साथ पूरकता नहीं होगी।'
पॉलीमरेज शृंखला अभिक्रिया (PCR) के प्रत्येक चक्र के तीन मुख्य चरण हैं:
'BIOTECHNOLOGY - PRINCIPLES AND PROCESSES' अध्याय में चित्र 9.6 और उसका शीर्षक स्पष्ट कहते हैं: 'पॉलीमरेज शृंखला अभिक्रिया (PCR): प्रत्येक चक्र में तीन चरण होते हैं: (i) विकृतीकरण; (ii) प्राइमर तापानुशीलन; और (iii) प्राइमरों का विस्तार'।
रोग निदान के लिए PCR के उपयोग का निम्नलिखित में से कौन-सा लाभ है?
संदर्भ रेखांकित करता है: 'तथापि, किसी जीवाणु या विषाणु की बहुत कम सांद्रता का (उस समय जब रोग के लक्षण अभी दिखाई नहीं दे रहे हों) PCR द्वारा उनके न्यूक्लिक अम्ल के प्रवर्धन से पता लगाया जा सकता है।'
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