NEET प्रश्न (MCQ) हिंदी में — उत्तर और विस्तृत हल सहित

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जब 2-क्लोरोप्रोपेन को ऐल्कोहॉली KOH के साथ गर्म किया जाए तो अभिक्रिया के उत्पाद का पूर्वानुमान कीजिए।

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2-क्लोरोप्रोपेन में दोनों निकटवर्ती मेथिल समूहों पर $\beta$-हाइड्रोजन हैं। ऐल्कोहॉली KOH के साथ गर्म करने पर विलोपन अभिक्रिया (विहाइड्रोहैलोजनीकरण) होगी, जिसमें एक क्लोरीन परमाणु और निकटवर्ती कार्बन से एक हाइड्रोजन परमाणु हटता है, जिससे प्रोपीन बनती है।

विलोपन अभिक्रियाओं के लिए 'जलीय' विलयन की अपेक्षा KOH के 'ऐल्कोहॉली' विलयन का उपयोग क्यों महत्त्वपूर्ण है?

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यद्यपि जलीय और ऐल्कोहॉली दोनों KOH क्षार/नाभिकरागी के रूप में कार्य कर सकते हैं, ऐल्कोहॉल में बने ऐल्कॉक्साइड आयन की त्रिविम बाधा के कारण ऐल्कोहॉली KOH प्रबलतर क्षार और दुर्बलतर नाभिकरागी है, जो प्रतिस्थापन (SN2) की अपेक्षा विलोपन (E2) के पक्ष में है। जलीय KOH, प्रबल नाभिकरागी होने के कारण, मुख्यतः नाभिकरागी प्रतिस्थापन (ऐल्कोहॉल का निर्माण) की ओर ले जाएगा।

विलोपन अभिक्रिया के दौरान $\alpha$-कार्बन के विन्यास का क्या होता है?

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विलोपन अभिक्रिया में $\alpha$-कार्बन (हैलोजन वाला) और $\beta$-कार्बन (हाइड्रोजन खोने वाला) दोनों अपनी संकरण अवस्था बदलते हैं। $\alpha$-कार्बन, जो प्रारंभ में sp3 संकरित था, कार्बन-कार्बन द्विआबंध का भाग बन जाता है, अतः sp2 संकरण में परिवर्तित हो जाता है।

हैलोऐल्केनों की विलोपन अभिक्रियाओं के विषय में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?

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NCERT पाठ स्पष्ट रूप से कहता है, 'जब $\beta$-हाइड्रोजन परमाणु वाले हैलोऐल्केन को पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड के ऐल्कोहॉली विलयन के साथ गर्म किया जाता है, तो $\beta$-कार्बन से हाइड्रोजन परमाणु और $\alpha$-कार्बन परमाणु से हैलोजन परमाणु का विलोपन होता है।' यह $\beta$-हाइड्रोजन की आवश्यकता की पुष्टि करता है। वे प्रारूपिक रूप से ऐल्कीन बनाती हैं, एकाणुक (E1) या द्विअणुक (E2) हो सकती हैं, और उच्च ताप तथा प्रबल क्षारों द्वारा अनुकूलित होती हैं।

निम्नलिखित में से किस रक्त समूह को उसके प्लाज़्मा में प्रतिरक्षी A और B की अनुपस्थिति के कारण 'सर्वग्राही' माना जाता है?

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सारणी 15.1 और साथ के पाठ के अनुसार, ''AB' समूह वाले व्यक्ति AB तथा अन्य रक्त समूहों वाले व्यक्तियों से रक्त ग्रहण कर सकते हैं। अतः ऐसे व्यक्ति 'सर्वग्राही' कहलाते हैं।' ऐसा इसलिए है क्योंकि उनके प्लाज़्मा में कोई एंटी-A या एंटी-B प्रतिरक्षी नहीं होता, जिससे वे बिना समूहन के सभी ABO समूहों से रक्त प्राप्त कर सकते हैं।

एरिथ्रोब्लास्टोसिस फीटैलिस एक ऐसी स्थिति है जो माता और उसके भ्रूण के रक्त के बीच असंगति के कारण हो सकती है। निम्नलिखित में से कौन-सा सम्मिलित रक्त प्रकारों का सटीक वर्णन करता है?

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संदर्भ कहता है: 'गर्भवती माता के Rh-ve रक्त और भ्रूण के Rh+ve रक्त के बीच Rh असंगति (बेमेल) का एक विशेष मामला देखा गया है।' यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब भ्रूण के Rh प्रतिजन के संपर्क में आया माता का प्रतिरक्षा तंत्र ऐसे प्रतिरक्षी बनाता है जो बाद के Rh+ve भ्रूण पर आक्रमण कर सकते हैं।

पहली गर्भावस्था के दौरान Rh असंगति प्रारूपिक रूप से एरिथ्रोब्लास्टोसिस फीटैलिस क्यों नहीं करती?

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NCERT पाठ बताता है: 'पहली गर्भावस्था में भ्रूण के Rh प्रतिजन माता के Rh-ve रक्त के संपर्क में नहीं आते क्योंकि दोनों रक्त अपरा द्वारा भली-भाँति पृथक रहते हैं।' इससे पहली गर्भावस्था के दौरान माता में प्रतिरक्षी नहीं बनते।

रक्त समूह O वाले व्यक्ति की RBC की सतह पर कौन-से प्रतिजन अनुपस्थित होते हैं?

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सारणी 15.1 दर्शाती है कि रक्त समूह O के लिए 'RBC पर प्रतिजन' स्तंभ में 'शून्य' लिखा है, अर्थात A और B दोनों प्रतिजन अनुपस्थित हैं। इसीलिए समूह O के व्यक्ति 'सर्वदाता' होते हैं।

एक Rh-ve व्यक्ति Rh+ve रक्त के संपर्क में आता है। प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया की दृष्टि से इसका तात्कालिक परिणाम क्या है?

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पाठ कहता है: 'एक Rh-ve व्यक्ति, यदि Rh+ve रक्त के संपर्क में आए, तो Rh प्रतिजनों के विरुद्ध विशिष्ट प्रतिरक्षी बनाएगा।' यह एक विलंबित प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया दर्शाता है जिसमें प्रारंभिक संपर्क पर प्रतिरक्षी बनते हैं, तत्काल प्रतिक्रिया नहीं होती।

रक्ताधान करने से पहले रक्त प्रकारों का सावधानीपूर्वक मिलान करना क्यों अत्यंत आवश्यक है?

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संदर्भ स्पष्ट रूप से कहता है: 'आप संभवतः जानते हैं कि रक्ताधान के दौरान कोई भी रक्त उपयोग नहीं किया जा सकता; समूहन (RBC के विनाश) की गंभीर समस्याओं से बचने के लिए किसी भी रक्ताधान से पहले दाता के रक्त का ग्राही के रक्त से सावधानीपूर्वक मिलान करना पड़ता है।'

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Frequently Asked Questions

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