NEET प्रश्न (MCQ) हिंदी में — उत्तर और विस्तृत हल सहित

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बेंजीनसल्फोनिक अम्ल से प्राप्त सोडियम फीनॉक्साइड से फीनॉल के विरचन में अम्लीकरण की क्या भूमिका है?

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बेंजीनसल्फोनिक अम्ल या हैलोऐरीनों वाली विधियों में सोडियम फीनॉक्साइड बनता है। अम्लीकरण (जैसे तनु अम्ल से) का उपयोग फीनॉक्साइड आयन ($C_6H_5O^-$) को प्रोटॉनित करके उदासीन फीनॉल ($C_6H_5OH$) पुनः बनाने के लिए किया जाता है। NCERT कहता है, 'सोडियम लवण के अम्लीकरण से फीनॉल प्राप्त होता है।'

डाइऐज़ोनियम लवणों से फीनॉल के विरचन में ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन को नाइट्रस अम्ल ($NaNO_2 + HCl$) से किस ताप परास पर उपचारित किया जाता है?

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NCERT पाठ निर्दिष्ट करता है, 'ऐरोमैटिक प्राथमिक ऐमीन को 273-278 K पर नाइट्रस अम्ल ($NaNO_2 + HCl$) से उपचारित करके डाइऐज़ोनियम लवण बनाया जाता है।' यह निम्न ताप परास (0-5 °C) डाइऐज़ोनियम लवणों के स्थायित्व के लिए महत्वपूर्ण है।

फीनॉल विरचन की किस विधि को विश्वभर में व्यावसायिक रूप से सर्वाधिक प्रयुक्त बताया गया है?

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NCERT स्पष्ट रूप से उल्लेख करता है, 'विश्वभर में फीनॉल का अधिकांश उत्पादन क्यूमीन से होता है।'

बेंजीन व्युत्पन्नों से फीनॉलों के प्रयोगशाला विरचन में सामान्यतः कौन-सा सामान्य उपागम शामिल है?

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NCERT कहता है, 'प्रयोगशाला में फीनॉल बेंजीन व्युत्पन्नों से निम्नलिखित में से किसी भी विधि द्वारा बनाए जाते हैं' और फिर हैलोऐरीनों, बेंजीनसल्फोनिक अम्ल और डाइऐज़ोनियम लवणों से विधियाँ सूचीबद्ध करता है, जिन सभी में बेंजीन वलय पर उपस्थित समूहों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हाइड्रॉक्सिल समूह से प्रतिस्थापित करना शामिल है।

आइसोप्रोपिलबेंजीन, जो फीनॉल के औद्योगिक उत्पादन में प्रयुक्त होता है, का सामान्य नाम क्या है?

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NCERT निर्दिष्ट करता है, 'क्यूमीन (आइसोप्रोपिलबेंजीन) वायु की उपस्थिति में ऑक्सीकृत होकर क्यूमीन हाइड्रोपरॉक्साइड बनाता है।'

फीनॉल के अतिरिक्त, क्यूमीन से फीनॉल के औद्योगिक उत्पादन में महत्वपूर्ण उपोत्पाद के रूप में कौन-सा अन्य महत्वपूर्ण कार्बनिक यौगिक प्राप्त होता है?

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NCERT कहता है, 'इसे (क्यूमीन हाइड्रोपरॉक्साइड को) तनु अम्ल से उपचारित करके फीनॉल और ऐसीटोन में बदला जाता है। इस अभिक्रिया का उपोत्पाद ऐसीटोन भी इस विधि से बड़ी मात्रा में प्राप्त होता है।'

निम्नलिखित में से कौन-सा समीकरण सरल आवर्त गति (SHM) के बल नियम को सही दर्शाता है?

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न्यूटन के द्वितीय नियम के अनुसार, F(t) = ma(t)। SHM के लिए, त्वरण a(t) = -ω²x(t)। इसे न्यूटन के द्वितीय नियम में प्रतिस्थापित करने पर F(t) = -mω²x(t) मिलता है। पाठ k = mω² भी परिभाषित करता है, अतः F(t) = -kx(t)। इसलिए दिए गए सभी विकल्प SHM के बल नियम के सही निरूपण हैं। (NCERT, पृष्ठ 267)

सरल आवर्त गति में कण पर कार्य करने वाला बल सदैव निर्देशित होता है:

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संदर्भ कहता है: 'त्वरण की तरह, बल सदैव माध्य स्थिति की ओर निर्देशित होता है—इसलिए SHM में इसे कभी-कभी प्रत्यानयन बल कहते हैं।' यह SHM का एक मूलभूत अभिलक्षण है। (NCERT, पृष्ठ 267)

बल F(t) = -kx(t) के प्रभाव में दोलन करने वाला कण कहलाता है:

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संदर्भ कहता है: 'ध्यान दें कि समीकरण (13.13) में बल x(t) के रैखिक रूप से समानुपाती है। ऐसे बल के अंतर्गत दोलन करने वाले कण को इसलिए रैखिक आवर्त दोलक कहते हैं।' (NCERT, पृष्ठ 267)

यदि दोलन करने वाले कण पर कार्य करने वाले बल में x², x³ आदि के समानुपाती अतिरिक्त पद हों, तो दोलक को वर्गीकृत किया जाएगा:

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पाठ समझाता है: 'वास्तविक संसार में बल में x², x³ आदि के समानुपाती छोटे अतिरिक्त पद हो सकते हैं। इन्हें तब अरैखिक दोलक कहते हैं।' (NCERT, पृष्ठ 267)

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