DNA के एकल क्षारक युग्म में परिवर्तन से किस प्रकार का उत्परिवर्तन होता है?
NCERT पाठ के अनुसार: 'उत्परिवर्तन DNA के एकल क्षारक युग्म में परिवर्तन के कारण भी उत्पन्न होते हैं। इसे बिंदु उत्परिवर्तन कहते हैं।'
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DNA के एकल क्षारक युग्म में परिवर्तन से किस प्रकार का उत्परिवर्तन होता है?
NCERT पाठ के अनुसार: 'उत्परिवर्तन DNA के एकल क्षारक युग्म में परिवर्तन के कारण भी उत्पन्न होते हैं। इसे बिंदु उत्परिवर्तन कहते हैं।'
दात्र कोशिका अरक्तता किस प्रकार के उत्परिवर्तन का चिरसम्मत उदाहरण है?
NCERT पाठ स्पष्ट रूप से कहता है: 'ऐसे उत्परिवर्तन का एक चिरसम्मत उदाहरण दात्र कोशिका अरक्तता है', जो पिछले वाक्य के बिंदु उत्परिवर्तन को संदर्भित करता है।
DNA के क्षारक युग्मों के विलोपन और निवेशन किस प्रकार के उत्परिवर्तन के लिए उत्तरदायी हैं?
NCERT पाठ उल्लेख करता है: 'DNA के क्षारक युग्मों के विलोपन और निवेशन फ्रेम-शिफ्ट उत्परिवर्तन उत्पन्न करते हैं'।
उत्परिवर्तन प्रेरित करने वाले रासायनिक और भौतिक कारकों को सामूहिक रूप से क्या कहते हैं?
NCERT पाठ कहता है: 'परंतु ऐसे अनेक रासायनिक और भौतिक कारक हैं जो उत्परिवर्तन प्रेरित करते हैं। इन्हें उत्परिवर्तजन कहते हैं।'
निम्नलिखित में से कौन-सा संदर्भ में उल्लिखित भौतिक उत्परिवर्तजन का उदाहरण है?
संदर्भ देता है: 'UV विकिरण जीवों में उत्परिवर्तन उत्पन्न कर सकता है – यह एक उत्परिवर्तजन है।' यह UV विकिरण को भौतिक उत्परिवर्तजन के रूप में पहचानता है।
उत्परिवर्तन किसी जीव के निम्नलिखित में से किन पहलुओं में परिवर्तन लाता है?
NCERT पाठ उत्परिवर्तन को परिभाषित करता है: 'एक परिघटना जिसके परिणामस्वरूप DNA अनुक्रमों में परिवर्तन होता है और फलस्वरूप जीव के जीनप्ररूप और लक्षणप्ररूप में परिवर्तन होते हैं।'
DNA के किसी खंड के लोप या लब्धि से गुणसूत्रों में परिवर्तन होता है। इन गुणसूत्रीय परिवर्तनों को यह भी कहते हैं:
पाठ कहता है: 'अतः DNA के किसी खंड के लोप (विलोपन) या लब्धि (निवेशन/द्विगुणन) के परिणामस्वरूप गुणसूत्रों में परिवर्तन होता है। चूँकि जीन गुणसूत्रों पर स्थित होना ज्ञात है, गुणसूत्रों में परिवर्तन असामान्यताएँ या विपथन उत्पन्न करता है। गुणसूत्रीय विपथन सामान्यतः कैंसर कोशिकाओं में देखे जाते हैं।'
निम्नलिखित में से कौन-सा किसी वाहन की रुकने की दूरी ($d_s$) और उसके आरंभिक वेग ($v_0$) के बीच संबंध का वर्णन करता है जब ब्रेक नियत मंदन ($a$) के साथ लगाए जाते हैं?
दिए गए पाठ और उदाहरण 2.6 में व्युत्पन्न व्यंजक के अनुसार, रुकने की दूरी $d_s = \frac{-v_0^2}{2a}$ द्वारा दी जाती है। यह दर्शाता है कि रुकने की दूरी आरंभिक वेग के वर्ग ($v_0^2$) के समानुपाती है। संदर्भ स्पष्ट रूप से कहता है, 'इस प्रकार, रुकने की दूरी आरंभिक वेग के वर्ग के समानुपाती है।'
एक कार का आरंभिक वेग $10 \text{ m/s}$ है, और उसकी रुकने की दूरी $x$ है। यदि कार का आरंभिक वेग बढ़ाकर $20 \text{ m/s}$ (दोगुना) कर दिया जाए, तो समान मंदन क्षमता मानते हुए उसकी नई रुकने की दूरी क्या होगी?
संदर्भ कहता है, 'आरंभिक वेग दोगुना करने से रुकने की दूरी 4 गुना बढ़ जाती है (समान मंदन के लिए)।' ऐसा इसलिए है क्योंकि रुकने की दूरी ($d_s$) आरंभिक वेग के वर्ग ($v_0^2$) के समानुपाती है। यदि $v_0$, $2v_0$ हो जाए, तो $d_s'$, $(2v_0)^2 = 4v_0^2$ के समानुपाती होगी, जिससे नई रुकने की दूरी $4x$ हो जाएगी।
प्रतिक्रिया समय का सर्वोत्तम वर्णन है:
उदाहरण 2.7 प्रतिक्रिया समय को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है: 'प्रतिक्रिया समय वह समय है जो किसी व्यक्ति को देखने, सोचने और कार्य करने में लगता है।' यह उद्दीपन की पहचान से आरंभिक प्रतिक्रिया तक की संपूर्ण संज्ञानात्मक और गतिक प्रक्रिया को समाहित करता है।
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