p-प्रकार के अर्धचालक के लिए, ग्राही ऊर्जा स्तर ($E_A$) स्थित होता है:
NCERT कहती है, 'p-प्रकार के अर्धचालक के लिए, ग्राही ऊर्जा स्तर $E_A$ संयोजकता बैंड के शीर्ष $E_V$ से थोड़ा ऊपर होता है, जैसा चित्र 14.9(b) में दर्शाया गया है।'
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p-प्रकार के अर्धचालक के लिए, ग्राही ऊर्जा स्तर ($E_A$) स्थित होता है:
NCERT कहती है, 'p-प्रकार के अर्धचालक के लिए, ग्राही ऊर्जा स्तर $E_A$ संयोजकता बैंड के शीर्ष $E_V$ से थोड़ा ऊपर होता है, जैसा चित्र 14.9(b) में दर्शाया गया है।'
कमरे के ताप पर, n-प्रकार के बाह्य अर्धचालक में, चालन बैंड में इलेक्ट्रॉनों का प्रमुख स्रोत क्या है?
NCERT पाठ उल्लेख करता है कि 'कमरे के ताप पर, अधिकांश दाता परमाणु आयनित हो जाते हैं किंतु Si के बहुत कम (~10^12) परमाणु आयनित होते हैं। अतः चालन बैंड में अधिकांश इलेक्ट्रॉन दाता अशुद्धियों से आए होंगे...'
कमरे के ताप पर p-प्रकार के अर्धचालक में, संयोजकता बैंड में होलों का घनत्व मुख्यतः किससे निर्धारित होता है?
NCERT कहती है, 'कमरे के ताप पर, अधिकांश ग्राही परमाणु आयनित होकर संयोजकता बैंड में होल छोड़ देते हैं। अतः कमरे के ताप पर संयोजकता बैंड में होलों का घनत्व मुख्यतः बाह्य अर्धचालक में अशुद्धि के कारण होता है।'
बाह्य अर्धचालक में अपमिश्रण अल्पसंख्यक वाहकों की नैज सांद्रता को कैसे प्रभावित करता है?
दिया गया पाठ समझाता है, 'बाह्य अर्धचालकों में, बहुसंख्यक धारा वाहकों की प्रचुरता के कारण, तापीय रूप से उत्पन्न अल्पसंख्यक वाहकों के बहुसंख्यक वाहकों से मिलने और इस प्रकार नष्ट होने की संभावना अधिक होती है। अतः अपमिश्रक, एक प्रकार के धारा वाहकों की बड़ी संख्या जोड़कर, जो बहुसंख्यक वाहक बन जाते हैं, अल्पसंख्यक वाहकों की नैज सांद्रता को कम करने में परोक्ष रूप से सहायता करता है।'
कौन-सा कथन बाह्य अर्धचालकों की समग्र आवेश उदासीनता का सही वर्णन करता है?
NCERT स्पष्ट रूप से कहती है, 'ध्यान दें कि क्रिस्टल समग्र आवेश उदासीनता बनाए रखता है क्योंकि अतिरिक्त आवेश वाहकों का आवेश जालक में आयनित कोरों के आवेश के ठीक बराबर और विपरीत होता है।'
n-प्रकार के अर्धचालक में, दाता ऊर्जा स्तर ($E_D$) के इलेक्ट्रॉन बहुत थोड़ी ऊर्जा की आपूर्ति से चालन बैंड ($E_C$) में क्यों जा सकते हैं?
पाठ कहता है, 'दाता ऊर्जा स्तर ED चालन बैंड के तल EC से थोड़ा नीचे होता है और इस स्तर के इलेक्ट्रॉन बहुत थोड़ी ऊर्जा की आपूर्ति से चालन बैंड में चले जाते हैं।' इस निकटता का अर्थ है कि उत्तेजन के लिए न्यूनतम ऊर्जा चाहिए।
n-प्रकार के अर्धचालक में, कमरे के ताप पर, दाता परमाणुओं और नैज सिलिकॉन परमाणुओं के आयनन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा सत्य है?
NCERT पाठ कहता है, 'कमरे के ताप पर, अधिकांश दाता परमाणु आयनित हो जाते हैं किंतु Si के बहुत कम (~10^12) परमाणु आयनित होते हैं।' यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि दाता परमाणु मुख्यतः आयनित होते हैं।
p-प्रकार के अर्धचालक में, संयोजकता बैंड से किसी इलेक्ट्रॉन के ग्राही स्तर $E_A$ पर कूदने का तुल्य वर्णन क्या है?
NCERT समझाती है, 'वैकल्पिक रूप से, हम यह भी कह सकते हैं कि बहुत थोड़ी ऊर्जा की आपूर्ति से स्तर $E_A$ का होल नीचे संयोजकता बैंड में डूब जाता है। बाह्य ऊर्जा प्राप्त करने पर इलेक्ट्रॉन ऊपर उठते हैं और होल नीचे गिरते हैं।'
तापीय साम्य में किसी भी बाह्य अर्धचालक के लिए, इलेक्ट्रॉन सांद्रता ($n_e$), होल सांद्रता ($n_h$) और नैज वाहक सांद्रता ($n_i$) के बीच सही संबंध क्या है?
NCERT यह मूलभूत संबंध बताती है: '$n_e n_h = n_i^2$ (14.5)'।
बाह्य अर्धचालकों में अतिरिक्त ऊर्जा अवस्थाओं ($E_D$ और $E_A$) की उपस्थिति मुख्यतः उनके गुणों के किस पहलू को बदलती है?
NCERT कहती है, 'अपमिश्रण से अर्धचालक की ऊर्जा बैंड संरचना प्रभावित होती है। बाह्य अर्धचालकों के मामले में, दाता अशुद्धियों ($E_D$) और ग्राही अशुद्धियों ($E_A$) के कारण अतिरिक्त ऊर्जा अवस्थाएँ भी विद्यमान होती हैं।' यह सीधे उनकी विद्युत चालकता को प्रभावित करता है।
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