वनस्पति विज्ञान (Botany) NEET प्रश्न हिंदी में — उत्तर सहित MCQ अभ्यास

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किस जीव-समूह में कोशिका भित्तियाँ दो पतले अतिव्यापी कवच बनाती हैं, जो परस्पर जुड़ जाते हैं?

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क्राइसोफाइट जगत-प्रोटिस्टा के अंतर्गत रखे जाते हैं। इस समूह में डायटम तथा स्वर्णिम शैवाल (डेस्मिड) सम्मिलित हैं। इनमें से अधिकांश प्रकाश-संश्लेषी होते हैं। डायटम में कोशिका भित्तियाँ दो पतले अतिव्यापी कवच बनाती हैं, जो साबुन की डिबिया की भाँति परस्पर जुड़ जाते हैं।

गलत कथन चुनिए।

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मोनेरा (जीवाणु) में केंद्रक झिल्ली अनुपस्थित होती है। मोनेरा प्रोकैरियोटिक जगत है, जिसमें केंद्रक झिल्ली से घिरा वास्तविक केंद्रक नहीं होता। जीवाणुओं में आनुवंशिक पदार्थ कोशिकाद्रव्य में एकल वर्तुल DNA अणु के रूप में उपस्थित रहता है।

निम्नलिखित में से कौन गहरे समुद्री जल में उपस्थित होने की संभावना रखते हैं ?

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आर्किबैक्टीरिया की गहरे समुद्री जल में उपस्थिति की संभावना है, क्योंकि वे चरम पर्यावरण में पनपने में सक्षम हैं। ये जीवाणुओं से भिन्न प्रोकैरियोटिक जीवों का समूह हैं, जो गर्म जलस्रोतों, लवणीय दलदलों तथा गहरे समुद्री तल जैसे विविध आवासों में पाए जाते हैं।

Bacillus megatarium की छड़ाकार कोशिकाएँ किस एंजाइम से उपचारित करने पर प्रोटोप्लास्ट कहलाने वाली गोलाकार इकाइयों में बदल जाती हैं

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एंजाइम लाइसोजाइम का उपयोग Bacillus megatarium की छड़ाकार कोशिकाओं को गोलाकार प्रोटोप्लास्ट में बदलने हेतु किया जाता है, जो जीवाणु कोशिका भित्ति की पेप्टिडोग्लाइकेन परत को तोड़कर होता है, जिससे विशिष्ट छड़ाकार रूप समाप्त हो जाता है।

प्रोकैरियोटिक तथा यूकैरियोटिक कोशिका में समान रूप से पाया जाने वाला कोशिकांग है

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राइबोसोम राइबोन्यूक्लियोप्रोटीन के कण हैं, जो प्रोटीन संश्लेषण के दौरान mRNA के प्रोटीन में अनुवाद का स्थल हैं। प्रोकैरियोट तथा यूकैरियोट दोनों में राइबोसोम होते हैं, परंतु प्रोकैरियोटिक राइबोसोम यूकैरियोटिक राइबोसोमों से छोटे होते हैं तथा भिन्न RNA एवं प्रोटीन अणुओं से बने होते हैं। प्रोकैरियोट में केवल एक ही प्रकार का राइबोसोम, अर्थात् 70s प्रकार होता है, जबकि यूकैरियोटिक राइबोसोम दो प्रकार के, अर्थात् 70s तथा 80s होते हैं। तारककाय, परॉक्सिसोम तथा ग्लाइऑक्सिसोम यूकैरियोटिक कोशिकाओं में उपस्थित कोशिकांग हैं।

 

 

जगत प्रोटिस्टा में सम्मिलित  नहीं है

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जगत प्रोटिस्टा की रचना हैकल (1886) ने की थी। इसमें हरे तथा लाल शैवालों को छोड़कर सभी एककोशिकीय एवं निवही यूकैरियोट सम्मिलित हैं। प्रोटिस्ट लगभग 1000 मिलियन वर्ष पूर्व विकसित होने वाले प्रथम यूकैरियोट थे। ये अधिकांशतः जलीय हैं। इन्हें मोटे तौर पर तीन समूहों में बाँटा जाता है - प्रकाश-संश्लेषी, अवपंक कवक तथा प्रोटोजोआ। प्रकाश-संश्लेषी प्रोटिस्ट प्रकाश-स्वपोषी होते हैं, जैसे डायटम, डाइनोफ्लैजिलेट तथा यूग्लीनॉइड। प्रोटोजोआ प्रोटिस्ट में सार्कोडाइन/अमीबा, जंतु-कशाभिकी, बीजाणुजीवी तथा पक्ष्माभी सम्मिलित हैं। इसमें जीवाणु सम्मिलित नहीं हैं। जीवाणु सरल प्रोकैरियोट हैं, जो मृदा, जल एवं वायु में तथा जंतुओं, पादपों एवं अन्य सूक्ष्मजीवों के सहजीवी, परजीवी एवं रोगजनक के रूप में पाए जाते हैं।

शाखन द्वारा वृद्धि करने वाला लाइकेन कहलाता है 

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लाइकेन शैवाल तथा कवक के बीच सहोपकारिता का अनूठा उदाहरण हैं। इन पादपों में शैवाल (फाइकोबायोंट) तथा कवक (माइकोबायोंट) इस प्रकार साथ रहते हैं कि वे एक ही जीव प्रतीत होते हैं। सूकाय के प्रकार के आधार पर लाइकेन तीन प्रकार के होते हैं–

(i) क्रस्टोस अथवा क्रस्टेशियस: ये चट्टानों, मृदा, वृक्ष की छाल आदि पर पतली या मोटी पपड़ी के रूप में पाए जाते हैं।

(ii) फोलिओस अथवा फोलिएशियस: ये पत्ती जैसे लाइकेन हैं, जो सूकाय के निचले भाग से विकसित विशेष मूलाभास जैसे अंगों द्वारा आधार से जुड़े रहते हैं।

(iii) फ्रूटिकोस अथवा तंतुमय: बेलनाकार, चपटी अथवा फीते जैसी शाखित संरचनाएँ, जो अपने आधारी सिरों द्वारा आधार से जुड़ी रहती हैं। ये झाड़ीनुमा लाइकेन हैं।

 

Agaricus के फलनकाय किस नाम से भी जाने जाते हैं

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Agaricus के फलनकाय बेसिडियोकार्प के नाम से भी जाने जाते हैं। ये मृदा के ऊपर उपस्थित होते हैं तथा युवा अवस्था में खाद्य होते हैं।

फाइकोलॉजी किसका अध्ययन है

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फाइकोलॉजी शैवालों का अध्ययन है। शैवाल प्रकाश-संश्लेषी जीव हैं, जो एककोशिकीय से बहुकोशिकीय रूपों तक होते हैं। इनमें वास्तविक जड़, तना तथा पत्तियाँ नहीं होतीं और ये बीजाणुओं अथवा युग्मकों द्वारा जनन करते हैं।

कौन पूर्णतः अवायवीय है?

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इनमें से कोई भी समूह, अर्थात् शैवाल, कवक अथवा मॉस, पूर्णतः अवायवीय नहीं है। शैवाल- इस समूह में सरल सूकाय शरीर वाले सर्वाधिक आदिम पादप आते हैं। ये क्लोरोफिल-युक्त प्रकाश-संश्लेषी वायवीय जीव हैं।

कवक- सामान्यतः वायवीय, परंतु यीस्ट जैसे कुछ एककोशिकीय रूप अवायवीय श्वसन (किण्वन) कर सकते हैं, जो लाभदायक हैं तथा ऐल्कोहॉल, एंजाइम, ब्रेड आदि अनेक उत्पादों के निर्माण हेतु उद्योगों में प्रयुक्त होते हैं।

मॉस- इसमें सरलतम तथा आदिम स्थलीय पादप आते हैं, जो शैवाल एवं टेरिडोफाइटा के बीच का स्थान रखते हैं।

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