विषाणु आवरण में होते हैं
विषाणु एक छोटा कण है, जो जैविक जीवों की कोशिकाओं को संक्रमित करता है। विषाणु अनिवार्य अंतःकोशिकीय परजीवी हैं; ये केवल अन्य कोशिकाओं पर आक्रमण कर उन्हें अपने अधीन करके ही जनन कर सकते हैं, क्योंकि इनमें स्वयं के जनन हेतु कोशिकीय तंत्र नहीं होता।
विषाणु आवरण एक ढीला झिल्लीदार आवरण है, जो कुछ जंतु विषाणुओं में तथा विरले ही पादप एवं जीवाणु विषाणुओं में पाया जाता है। आवरण-युक्त विषाणुओं के विपरीत, बिना आवरण वाले विषाणु नग्न कहलाते हैं। आवरण में प्रोटीन (विषाणु से) तथा लिपिड एवं कार्बोहाइड्रेट (परपोषी से) होते हैं। इसमें पेप्लोमीयर नामक उपइकाइयाँ होती हैं। आवरण की सतह चिकनी हो सकती है अथवा उस पर स्पाइक नामक उभार हो सकते हैं। सामान्य आवरण-युक्त विषाणु HIV, हर्पीज विषाणु, वैक्सीनिया विषाणु आदि हैं।