में नाइट्रोजन के परमाणु कक्षकों का संकरण है
संकर कक्षकों की संख्या = सिग्मा बंधों की कुल संख्या + इलेक्ट्रॉनों के एकाकी युग्म। सिग्मा बंधों की संख्या में क्रमशः 2,3 तथा 4 है। अतः संकरण क्रमशः sp, sp2 तथा sp3 है।
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में नाइट्रोजन के परमाणु कक्षकों का संकरण है
संकर कक्षकों की संख्या = सिग्मा बंधों की कुल संख्या + इलेक्ट्रॉनों के एकाकी युग्म। सिग्मा बंधों की संख्या में क्रमशः 2,3 तथा 4 है। अतः संकरण क्रमशः sp, sp2 तथा sp3 है।
द्विध्रुव आघूर्ण किसके लिए सर्वाधिक है
N, I से अधिक विद्युत ऋणात्मक है। विद्युत ऋणात्मकता का अंतर परमाणु N तथा I की स्थिति में सबसे अधिक है। आबंधित परमाणुओं का द्विध्रुव आघूर्ण एकाकी युग्म के द्विध्रुव आघूर्ण में जुड़ जाता है और इस प्रकार ध्रुवता बढ़ जाती है।
H-X का आयनिक गुण किसमें सर्वाधिक है
हैलोजन की विद्युत ऋणात्मकता बढ़ने पर आयनिक गुण बढ़ने की अपेक्षा की जाती है। अतः H तथा F में सर्वाधिक विद्युत ऋणात्मकता अंतर के कारण H-F बंध सर्वाधिक आयनिक होना चाहिए।
आयनिक गुण का %=16×ΔEN+3.5×(ΔEN)2
H-I बंध सबसे दुर्बल होने के कारण हाइड्रोजन आसानी से देता है। न्यूनतम बंध वियोजन ऊर्जा के कारण HI प्रबलतम अम्ल भी है। अतः अम्लीय गुण का क्रम HI>HBr>HCl>HF है।
की आकृति है
सबसे छोटा बंध कोण किस अणु का है
बंध कोण इस क्रम में घटता है : H2O > H2S > H2Se > H2Te.
एक पीले धात्विक चूर्ण को फ्लुओरीन की धारा में जलाने पर एक रंगहीन गैस X प्राप्त होती है जो ऊष्मीय रूप से स्थायी तथा रासायनिक रूप से अक्रिय है। इसके अणु की ज्यामिति अष्टफलकीय है। X के समान संघटक परमाणुओं वाली एक अन्य रंगहीन गैस Y तब प्राप्त होती है जब सल्फर डाइक्लोराइड को सोडियम फ्लुओराइड के साथ गर्म किया जाता है। इसके अणु की संरचना त्रिकोणीय पिरामिडीय है। X तथा Y हैं
SF4 sp3d संकरण के कारण त्रिकोणीय पिरामिडीय आकृति रखता है। SF6 sp3d2 संकरण के कारण अष्टफलकीय है। सल्फर की आण्विक ज्यामिति S8 है
नाइट्रोजन परिवार में हाइड्राइडों MH3 में H-M-H बंध कोण N से Sb की ओर जाने पर क्रमशः 90o के निकट होता जाता है। यह दर्शाता है कि क्रमशः
हाइड्राइडों की आकृति पिरामिडीय या चतुष्फलकीय होती है तथा किसी एक कक्षक में एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म होता है। H-M-H बंध कोण मूल 109o28' चतुष्फलकीय बंध कोण से कम होता है (NH3 में H-N-H 106o45') क्योंकि एकाकी युग्म तथा बंध युग्म के बीच प्रतिकर्षण दो बंध युग्मों के बीच के प्रतिकर्षण से अधिक होता है। M की विद्युतऋणात्मकता N से Bi तक घटती है, अतः बंध युग्म केंद्रीय परमाणु से दूर रहते हैं और एकाकी युग्म बंध कोण को अधिक विकृत करता है।
अतः PH3 में H-P-H बंध 94o है, जबकि AsH3 तथा SbH3 में यह लगभग 91.8o तथा 91.3o क्रमशः है (90o के निकट)। यह सुझाता है कि बंधन में प्रयुक्त कक्षक शुद्ध p-कक्षकों के अधिक निकट हैं।
अभिकथन : ट्राइमेथिलऐमीन (N(CH3)3) में नाइट्रोजन की ज्यामिति पिरामिडीय है, जबकि ट्राइसिलिलऐमीन (N(SiH3)3) में यह समतलीय है।
कारण : ट्राइमेथिलऐमीन में नाइट्रोजन sp3 संकरण दर्शाता है जबकि ट्राइसिलिलऐमीन में यह sp2 संकरण दर्शाता है।
ट्राइमेथिलऐमीन में नाइट्रोजन sp3 संकरण दर्शाता है, अतः ट्राइमेथिलऐमीन की ज्यामिति पिरामिडीय है, जबकि ट्राइसिलिलऐमीन में यह sp2 संकरण दर्शाता है जिससे समतलीय संरचना बनती है।
अभिकथन : ClF3 अस्तित्व में है परन्तु FCl3 नहीं।
कारण : FCl3 बड़े Cl परमाणुओं द्वारा अधिक त्रिविम अवरोध के कारण नहीं बनता।
ClF3 अस्तित्व में है परन्तु FCl3 नहीं, क्योंकि FCl3 बड़े Cl परमाणुओं द्वारा अधिक त्रिविम अवरोध के कारण नहीं बनता।
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