KClO3 गर्म करने पर KCl तथा O2 में अपघटित हो जाता है। यदि थोड़ा MnO2 मिला दिया जाए तो अभिक्रिया बहुत तेज हो जाती है, क्योंकि:
(d) MnO2 अभिक्रिया को तेज कर देता है।
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KClO3 गर्म करने पर KCl तथा O2 में अपघटित हो जाता है। यदि थोड़ा MnO2 मिला दिया जाए तो अभिक्रिया बहुत तेज हो जाती है, क्योंकि:
(d) MnO2 अभिक्रिया को तेज कर देता है।
किसी रासायनिक अभिक्रिया के दौरान उत्प्रेरक मिलाने से निम्नलिखित में से कौन-सी राशि बदल जाती है?
किसी ठोस पर गैस के अधिशोषण के लिए log x/m तथा log p के बीच खींचा गया आलेख एक सरल रेखा देता है जिसकी ढाल है:-
400K पर उत्प्रेरक की उपस्थिति में किसी अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा 0.8 kcal घट जाती है। अतः दर होगी
अभिकथन : भौतिक तथा रासायनिक अधिशोषण ताप में वृद्धि पर भिन्न-भिन्न प्रतिक्रिया दर्शाते हैं।
कारण : रासायनिक अधिशोषण के लिए कुछ सक्रियण ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
(A). भौतिक तथा रासायनिक अधिशोषण ताप में वृद्धि पर भिन्न प्रतिक्रिया दर्शाते हैं, क्योंकि
रासायनिक अधिशोषण के लिए कुछ सक्रियण ऊर्जा चाहिए। अतः निम्न ताप पर यह बहुत कम होता है
परंतु ताप बढ़ने के साथ बढ़ता जाता है। उच्च ताप पर यह घटने लगता है क्योंकि
अधिशोष्य के अणु अधिक गतिज ऊर्जा प्राप्त कर लेते हैं और अधिशोषक की सतह
छोड़ने में समर्थ हो जाते हैं। जबकि भौतिक अधिशोषण ताप बढ़ने के साथ घटता है।
अभिकथन : उत्प्रेरक सामान्यतः सूक्ष्म विभाजित चूर्ण के रूप में होता है।
कारण : किसी ठोस के कण जितने सूक्ष्म होंगे, उसका पृष्ठीय क्षेत्रफल उतना ही अधिक होगा।
(A). उत्प्रेरक सामान्यतः सूक्ष्म विभाजित चूर्ण के रूप में होता है, क्योंकि ठोस के कण जितने सूक्ष्म होंगे,
उसका पृष्ठीय क्षेत्रफल उतना ही अधिक होगा। अधिक पृष्ठ से सतह पर अभिकारक अणुओं का
अधिशोषण अधिक होता है। परिणामस्वरूप अभिक्रिया की दर बढ़ जाती है।
हाइड्रोजन तथा आयोडीन मोनोक्लोराइड की अभिक्रिया इस प्रकार दी गई है :
H2(g)+ 2ICl(g) 2HCl(g)+ I2(g)
यह अभिक्रिया H2(g) तथा 2ICl(g) के सापेक्ष प्रथम कोटि की है; निम्नलिखित क्रियाविधियाँ प्रस्तावित की गईं:
क्रियाविधि A:
H2(g)+ 2ICl(g) 2HCl(g)+ I2(g)
क्रियाविधि B :
H2(g)+ ICl(g) HCl(g)+ HI(g) ; धीमी
HI(g)+ ICl(g) HClCg) + I2(g); तेज
उपरोक्त में से कौन-सी क्रियाविधि(याँ) अभिक्रिया के बारे में दी गई जानकारी के अनुरूप हो सकती है/हैं ?
अभिक्रिया की दर सदैव धीमी अभिक्रिया पर निर्भर करती है।
H2(g)+ 2ICl(g) 2HCl(g)+ I2(g) अभिक्रिया H2 तथा I2 के सापेक्ष प्रथम कोटि की है और इसे क्रियाविधि A तथा B दोनों की सहायता से मापा जा सकता है।
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