Electrochemistry NEET प्रश्न हिंदी में — रसायन विज्ञान (Chemistry) MCQ उत्तर सहित

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जिंक सल्फेट के विलयन में से 40 min तक 5A धारा प्रवाहित की जाती है। कैथोड पर निक्षेपित जिंक की मात्रा है 

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प्रयुक्त अवधारणा : फैराडे का प्रथम नियम।

निक्षेपित पदार्थ का भार इस प्रकार दिया जाता है :

w = 2 x Q

w = 2 x i x t  (i सदैव ऐम्पियर में, t सदैव सेकंड में)

w=Eq wt96500×i×t=Mol wtn-factor 86500×i × t=65296500×5×(40×60)=65×5×4×62×965=65×60965= 4 . (something)

 hence: (c) 4.065 g is correct.

 

Al2O3 का अपचयन कम विभव तथा उच्च धारा पर विद्युत्-अपघटन द्वारा किया जाता है। यदि पिघले हुए Al2O3 में से 6 h तक 4.0 x 104 A धारा प्रवाहित की जाए, तो कितने द्रव्यमान का ऐलुमिनियम उत्पन्न होगा? (धारा दक्षता 100% मानिए, Al का परमाणु द्रव्यमान = 27g mol-1)

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प्रयुक्त अवधारणा : फैराडे का प्रथम नियम :

w = 2 x Q

=w=E96500×i×t=27396500×4×10×6×60×60         [eq wt of AT: 27 valancy: 3]=27×4×10×6×6×63×965=108×36×2×104965=7776965=8×104 g (app.)

निम्नलिखित अर्ध-अभिक्रियाओं के लिए 290 K पर मानक अपचयन विभव हैं,

(i) Zn2+ + 2e— → Zn(s);  E° = -0.762 V

(ii) Cr3+ + 3e → Cr(s);  E° = -0.740 V

(iii) 2H+ + 2e → H2(g); ·  E° = -0.000 V

(iv) Fe3+ + e → Fe2+;  E° = +0.77V

प्रबलतम अपचायक कौन-सा है?

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(a) Zn का अधिक धनात्मक OP है और इस प्रकार इसमें ऑक्सीकृत होने तथा अपचायक की भाँति कार्य करने की अधिक प्रवृत्ति होती है।

लोहे से बने जहाज़ की तली की सुरक्षा का सबसे सुविधाजनक तरीका है 

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यह जंग लगने से रोकता है क्योंकि यह कैथोडिक संरक्षण प्रदान करता है (b) तथा जल एवं लवण की क्रिया रोकता है। जहाज़ की तली में मैग्नीशियम के कई ब्लॉक लगाए जाते हैं। मैग्नीशियम अपने हल्केपन, ऑक्सीजन के प्रति अधिक बंधुता तथा दृढ़ता के कारण जहाज़ में प्रयुक्त होता है

 

इलेक्ट्रोड विभव

      Cu2+(aq) + e-           Cu+(aq)and Cu+(aq) + e-  Cu(s)          

के लिए क्रमशः +0.15 V तथा +0.50 V हैं। ECu2+Cu का मान होगा

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(a) 

Cu2+ + e-           Cu+          E10 = 0.15 V, G1=n1E1 FCu+ + e-          Cu, E2 =0.50 V, G2=-n2E2 FCu2+ + 2e-           Cu, E= ? G°=-nE°F

                          G°=G1 + G2                     -nE°F = -n1E1F - n2E2For -2E°F = -1F ×0.15 +(-1F ×0.50)or -2E°F = -0.15 F - 0.50For -2FE° = -F(0.15 + 0.50) E°=0.652=0.325 V

जब MnO2-4 का 0.1 मोल ऑक्सीकृत होता है, तो MnO2-4 को पूर्णतः MnO-4 में ऑक्सीकृत करने के लिए आवश्यक विद्युत् की मात्रा है 

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Zn, लोहे को जंग लगने से बचाने के लिए बलिदानी अथवा कैथोडिक संरक्षण का कार्य करता है क्योंकि :

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(b) लोहे के स्थान पर Zn ऑक्सीकृत होता है तथा यदि लोहे पर Zn की परत चढ़ाई जाए अर्थात् गैल्वनीकरण किया जाए तो लोहा कैथोड की भाँति कार्य करता है, इसीलिए इसे बलिदानी संरक्षण भी कहते हैं।

प्लैटिनम इलेक्ट्रोडों के बीच तनु H2SO4 के विलयन का विद्युत्-अपघटन करने पर ऐनोड तथा कैथोड पर मुक्त होने वाली गैसें क्रमशः हैं :

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(c)

2H++2e           H2                                          (Cathode)      2OH-          H2O + (12)O2 + 2e             (Anode)

Cu(II) लवण के विलयन में से 2 फैराडे विद्युत् प्रवाहित करने पर कितने द्रव्यमान का कॉपर निक्षेपित होगा?

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प्रयुक्त अवधारणा : फैराडे का प्रथम नियम

इलेक्ट्रोड पर निक्षेपित भार इस प्रकार दिया जाता है

w= z x Q

w = Z x 2 x 96500  [1 F=96500 c]

w=F96500×2×96500=w=63.5296500×2×96500=1w=63.5×22w=63.5 g

NaCl के विद्युत्-अपघटन में जब Pt इलेक्ट्रोड लिया जाता है तो कैथोड पर H2 मुक्त होती है, जबकि Hg कैथोड के साथ यह सोडियम अमलगम बनाता है, क्योंकि

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(b) जल में सोडियम क्लोराइड इस प्रकार वियोजित होता है

NaCl   Na+ + Cl-

H2O  H+ + OH-

जब प्लैटिनम इलेक्ट्रोडों का उपयोग करके इस विलयन में से विद्युत् धारा प्रवाहित की जाती है, तो Na+ तथा H+ कैथोड की ओर जाते हैं जबकि Cl- तथा OH- आयन ऐनोड की ओर जाते हैं।

कैथोड पर

H+ + e- H

H+H H2

ऐनोड पर

Cl- C1 + e-

Cl + Cl  Cl2

यदि पारद को कैथोड के रूप में प्रयुक्त किया जाए, तो पारद कैथोड पर H+ आयन निर्वहित नहीं होते क्योंकि पारद का हाइड्रोजन अति-विभव उच्च होता है। H+ आयनों की अपेक्षा Na+ आयन कैथोड पर निर्वहित होकर सोडियम देते हैं, जो पारद में घुलकर सोडियम अमलगम बनाता है।

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Frequently Asked Questions

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