पिघले हुए Al2O3 तथा पिघले हुए NaCl युक्त दो सेलों में से विद्युत् की समान मात्रा प्रवाहित की गई। यदि एक सेल में 1.8g Al मुक्त हुआ, तो दूसरे सेल में मुक्त Na की मात्रा है :
प्रयुक्त अवधारणा : फैराडे का द्वितीय नियम :
द्वितीय नियम के अनुसार
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पिघले हुए Al2O3 तथा पिघले हुए NaCl युक्त दो सेलों में से विद्युत् की समान मात्रा प्रवाहित की गई। यदि एक सेल में 1.8g Al मुक्त हुआ, तो दूसरे सेल में मुक्त Na की मात्रा है :
प्रयुक्त अवधारणा : फैराडे का द्वितीय नियम :
द्वितीय नियम के अनुसार
AgNO3, CuSO4, Al(NO3)3 तथा NaCl के जलीय विलयनों में से तीन फैराडे आवेश प्रवाहित करने पर कैथोड पर धातुएँ किस मोलर अनुपात में निक्षेपित होंगी :
प्रयुक्त अवधारणा : फैराडे का द्वितीय नियम + विद्युत्-अपघटन के उत्पाद
दिया गया विलयन :
ध्यान दें :
तथा NaCl की स्थिति में,
Al तथा Na अपने-अपने इलेक्ट्रोडों पर निक्षेपित नहीं होंगे क्योंकि उनका निर्वहन विभव हाइड्रोजन से कम है, अतः Al, Na के स्थान पर,
गैस कैथोड पर मुक्त होगी।
कैथोड पर :
यहाँ :
1 मोल 1 मोल Ag निक्षेपित करता है
1F आवेश निक्षेपित करता है 1 मोल Ag
3F x
इसी प्रकार Cu के लिए
यदि जलीय NaCl विलयन के विद्युत्-अपघटन में पारद को कैथोड के रूप में प्रयुक्त किया जाए, तो कैथोड पर निर्वहित होने वाले आयन हैं :
(b) Hg इलेक्ट्रोड की उपस्थिति में (H+ की तुलना में) Na+ का अधिमानी निर्वहन होता है।
तीन धातुओं X, Y तथा Z के मानक अपचयन इलेक्ट्रोड विभव क्रमशः -1.2V, + 0.5V तथा -3V हैं। इन धातुओं की अपचायक क्षमता होगी
(b) = -1.2V, = +0.5V, = -3V, Z>X>Y [ अपचयन विभव जितना अधिक, अपचायक क्षमता उतनी कम।]
1 atm पर एक गैस X को 1MY- तथा 1MZ- के मिश्रण युक्त विलयन में 25C पर प्रवाहित किया जाता है। यदि अपचयन विभव Z > Y > X है, तो :
(a) इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति का क्रम Z > Y > X है। अतः,
वह CuSO4 विलयन जिसमें कॉपर की छड़ डूबी हुई है, 10 गुना तनु किया जाता है, तो अपचयन इलेक्ट्रोड विभव :
(b)
Cu(NO3)2, AgNO3, Hg2(NO3)2 तथा Mg(NO3)2 में से प्रत्येक का एक मोल प्रति लीटर युक्त विलयन अक्रिय इलेक्ट्रोडों द्वारा विद्युत्-अपघटित किया जा रहा है। वोल्ट में मानक इलेक्ट्रोड विभव (अपचयन विभव) के मान हैं,
Ag|Ag+ = 0.80,2Hg| = 0.79,
Cu|Cu2+ = +0.34 and Mg|Mg2+ =-2.37
वोल्टेज बढ़ाने पर, कैथोड पर धातुओं के निक्षेपण का क्रम होगा :
(c) जलीय लवण विलयनों के विद्युत्-अपघटन द्वारा Mg प्राप्त नहीं किया जा सकता। साथ ही का क्रम Ag, Hg, Cu दर्शाता है।
निम्नलिखित जलीय विलयनों में सर्वाधिक विद्युत् चालकता किसकी है :
(d) डाइफ्लुओरो ऐसीटिक अम्ल प्रबल अम्ल है।
विद्युत्-अपघटन प्रयोग के दौरान AgNO3 के विलयन में से 30 मिनट तक 100 mA धारा प्रवाहित करने पर विद्युत् के कितने कूलॉम व्यय होते हैं?
हम जानते हैं
Q= i t
Q= [ धारा सदैव ऐम्पियर में, समय सदैव सेकंड में]
Q=180 C
Li+/Li, Ba2+/Ba, Na+/Na तथा Mg2+/Mg के 25C पर मानक अपचयन विभव क्रमशः -3.05, -2.90, -2.71 तथा -2.37 V हैं। निम्नलिखित में से कौन-सा प्रबलतम ऑक्सीकारक है ?
(a) जिस धनायन के मानक अपचयन विभव का मान अधिकतम होता है वह प्रबलतम ऑक्सीकारक होता है। अतः Mg2+ प्रबलतम ऑक्सीकारक है।
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