दिए गए विकल्पों में से कौन-सा अणु/आयन लूइस अम्ल की तरह व्यवहार करता है?
BF₃ इलेक्ट्रॉन-युग्म ग्राही।
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दिए गए विकल्पों में से कौन-सा अणु/आयन लूइस अम्ल की तरह व्यवहार करता है?
BF₃ इलेक्ट्रॉन-युग्म ग्राही।
300 K पर अभिक्रिया $A+B \rightleftharpoons C+D$ में स्पीशीज की साम्यावस्था सांद्रताएँ क्रमशः 2, 3, 10 और 6 mol L⁻¹ हैं। $\Delta G^\circ$ है ($R = 2$ cal/mol·K):
$\Delta G^\circ \approx -1381.8$ cal.
अभिक्रिया $2A \rightleftharpoons B + C$ के लिए $K_c = 4\times 10^{-3}$ है। किसी दिए गए समय पर, अभिक्रिया मिश्रण का संघटन है: $[A] = [B] = [C] = 2\times 10^{-3}\,\text{M}$. तब निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?
$Q > K_c$ — पश्च दिशा में।
निम्नलिखित साम्यों में से किसमें $K_p$ और $K_c$ समान नहीं हैं?
केवल (B) में $\Delta n = 1$.
$N_2 = 3.0\times 10^{-3}\,M$, $O_2 = 4.2\times 10^{-3}\,M$ और $NO = 2.8\times 10^{-3}\,M$ सांद्रताओं के साथ किसी सीलबंद पात्र में निम्नलिखित साम्य पर विचार कीजिए:
$2\,NO_{(g)} \rightleftharpoons N_2{}_{(g)} + O_2{}_{(g)}$
यदि $NO_{(g)}$ के $0.1\,\text{mol L}^{-1}$ को सीलबंद पात्र में लिया जाए, तो वियोजन मात्रा ($\alpha$) क्या होगी?
$\alpha \approx 0.717$.
फॉस्फोरिक अम्ल तीन चरणों में आयनित होता है जिनके आयनन स्थिरांक क्रमशः $K_{a_1}$, $K_{a_2}$ और $K_{a_3}$ हैं, जबकि K समग्र आयनन स्थिरांक है। निम्नलिखित में से कौन–से कथन सत्य हैं? A. $\log K = \log K_{a_1} + \log K_{a_2} + \log K_{a_3}$. B. $\text{H}_3\text{PO}_4$, $\text{H}_2\text{PO}_4^-$ और $\text{HPO}_4^{2-}$ से अधिक प्रबल अम्ल है। C. $K_{a_1} > K_{a_2} > K_{a_3}$. D. $K_{a_1} = \dfrac{K_{a_3}+K_{a_2}}{2}$. सही उत्तर चुनिए:
$K = K_{a_1}K_{a_2}K_{a_3}$ (A सत्य); $K_{a_1} > K_{a_2} > K_{a_3}$ (C सत्य); $\text{H}_3\text{PO}_4$ प्रबलतम (B सत्य); D असत्य।
अभिक्रिया $\text{A(g)} \rightleftharpoons 2\text{B(g)}$ के लिए 1000 K पर पश्च दिशा में अभिक्रिया का वेग स्थिरांक, अग्र दिशा में अभिक्रिया के वेग स्थिरांक से 2500 गुना अधिक होता है। [दिया है: $R = 0.0831\ \text{L atm mol}^{-1}\text{K}^{-1}$] 1000 K पर अभिक्रिया के लिए $K_p$ है:
$K_c = \dfrac{1}{2500}$; $\Delta n = 1$, अतः $K_p = K_c(RT) = \dfrac{83.1}{2500} = 0.033$.
अभिक्रिया $\text{N}_2\text{(g)} + \text{O}_2\text{(g)} \rightleftharpoons 2\text{NO(g)}$ में, NO की उच्चतर लब्धि प्राप्त की जा सकती है [$\Delta H = +180.7\ \text{kJ mol}^{-1}$]: A. उच्चतर ताप पर, B. निम्नतर ताप पर, C. N₂ की उच्चतर सांद्रता पर, D. O₂ की उच्चतर सांद्रता पर। सही उत्तर चुनिए:
अभिक्रिया ऊष्माशोषी है, अतः उच्च ताप (A) तथा अभिकारकों N₂ (C) व O₂ (D) की सांद्रता बढ़ाना NO की ओर साम्य विस्थापित करता है।
एक अणु सोडियम कार्बोनेट $ (Na_2CO_3)$ के जल-अपघटन से उत्पन्न हाइड्रॉक्साइड आयनों की संख्या है [Pb. CET 2002]
निम्नलिखित गैसीय प्रावस्था अभिक्रिया के लिए $ CO + 1/2 O_2 \rightleftharpoons CO_2 $ $ KC/ KP $ है
सूत्र: $ Kp = Kc(RT) ^ {\triangle n_{ (g)} } $ $ \triangle_{(g)} = n_p - n_r $
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