H-परमाणु के लिए nवें ऊर्जा स्तर में किसी इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा के लिए व्युत्पन्न सही व्यंजक है
बोर की अभिधारणाओं के अनुसार, किसी हाइड्रोजन परमाणु में, एक इलेक्ट्रॉन आवेश +e के नाभिक के चारों ओर परिक्रमा करता है। दी गई त्रिज्या की वृत्ताकार कक्षा में एकसमान चाल से गतिमान किसी इलेक्ट्रॉन के लिए, अभिकेंद्री बल इलेक्ट्रॉन तथा नाभिक के बीच कूलॉम आकर्षण बल द्वारा प्रदान किया जाता है। गुरुत्वीय आकर्षण की उपेक्षा की जा सकती है क्योंकि इलेक्ट्रॉन तथा प्रोटॉन का द्रव्यमान बहुत कम है।
अतः,
जहाँ m=इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान
r=इलेक्ट्रॉनिक कक्षा की त्रिज्या
v=इलेक्ट्रॉन का वेग
पुनः,
अतः, कक्षा में इलेक्ट्रॉन की कुल ऊर्जा