रसायन विज्ञान (Chemistry) NEET प्रश्न हिंदी में — उत्तर सहित MCQ अभ्यास

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NH2- का संयुग्मी अम्ल है 

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Explanation

(d) क्षार में प्रोटॉन जोड़ने के बाद बनी स्पीशीज को उस क्षार का संयुग्मी अम्ल कहते हैं तथा प्रोटॉन खोने के बाद बनी स्पीशीज को अम्ल का संयुग्मी क्षार कहते हैं। अतः,

  NH2-  + H+ NH3

  क्षार  संयुग्मी अम्ल

60 ml 1M CH3COOH को 20 ml 1 M NaOH के साथ मिलाया जाता है तो परिणामी विलयन का pH होगा

(Ka = 1.8 X 10-5, log1.8 = 0.25)

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Explanation

 

CH3COOH + NaOH         CH3COONa + H2O

t=0 पर    60ml 1M   20ml 1M  0  0

t='t' पर   40ml 1M  0  20ml 1M  -

अब यह अम्लीय बफर विलयन है।

pH=-logKa + logsaltacidpH=-log1.8 ×10-5log20×140×1pH=4.75 - 0.3pH=4.45

साम्य PCl5(g)PCl3(g) + Cl2(g) में स्थिर दाब पर अक्रिय गैस मिलाने पर वियोजन की मात्रा :

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स्थिर दाब पर अक्रिय गैस मिलाने पर, साम्य उस दिशा में विस्थापित होता है जहाँ मोलों की संख्या अधिक होती है।

Mg(OH)2 का स्थायित्व गुणनफल स्थिरांक Ksp 9.0 X 10-12 है। यदि कोई विलयन Mg2+ आयन के सापेक्ष 0.010 M है, तो अधिकतम हाइड्रॉक्साइड आयन सांद्रता क्या है जो Mg(OH)2 का अवक्षेपण किए बिना उपस्थित रह सकती है

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Mg(OH)2Mg2+ + 2OH-Ksp=[Mg2+] [OH-]29 × 10-12=0.01 × [OH-]2[OH-] =3 ×10-5M

बफर की भाँति कार्य करने के लिए एक लीटर जल में क्या मिलाया जा सकता है

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CH3COOH + NaOH CH3COONa + H2O

t=0 पर  1  0.5  0  0

t='t' पर  0.5  0  0.5  0.5

अब यह अम्लीय बफर विलयन है।

400 K पर 20 लीटर के एक पात्र में 0.4 atm दाब पर CO2(g) तथा आधिक्य में SrO है (ठोस SrO का आयतन नगण्य मानिए)। पात्र में लगे गतिशील पिस्टन को खिसकाकर अब पात्र का आयतन घटाया जाता है। पात्र का अधिकतम आयतन, जब CO2 का दाब अपने अधिकतम मान पर पहुँचता है, होगा (दिया है:

SrCO3(s)  SrO(s) + CO2(g),
  (Kp =1.6 atm)

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(a) अभिक्रिया के लिए,

SrCO3(s) SrO(s) + CO2(q),

Kp = 1.6 atm = pCO2 = CO2 का अधिकतम दाब

दिया है, p, = 0.4 atm, V1=  20 L, T1 = 400 K

P2 = 1.6 atm. V2 =?. T2 =400 K

स्थिर ताप पर, p1V1 = p2V2

0.4x20=1.6 xV2

V2=(0.4x20)/1.6=5L

निम्नलिखित के साम्य स्थिरांक हैं

N2+ 3H2          2NH3; K1N2 + O2            2NO; K2H2 + 12O2           H2O; K3

अभिक्रिया

2NH3 + 52O2     K     2NO + 3H2O, का साम्य स्थिरांक (K) होगा

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(b)

Given, N2 + 3H2           2NH3, K1              ...(i)             N2 + O2           2NO, K2                 ...(ii)             N2 + 12O2                    H2O, K3              ...(iii)To calculate,     2NH3 + 52O2     K    2NO +3H2O, K = ? ...(iv)

समीकरण (i) को उत्क्रमित करने तथा समीकरण (iii) को 3 से गुणा करने पर, हमें प्राप्त होता है

2NH3          N2 +3H2, 1K1            ...(v)3H2 + 32O2             3H2O, K33       ...(vi)Now, add equation. (ii), (v) and (vi), we get the resultant equation. (iv).2NH3 + 52O2    K      2NO + 3H2O           K=K2K33K1

0.1 M NaCl विलयन में 1.6 x 10-10 विलेयता गुणनफल वाले AgCl (s) की विलेयता होगी

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(b) मुख्य विचार चूँकि AgCl(s) की विलेयता 0.1 M NaCl में पूछी गई है, इसलिए गणना में Cl- (NaCl से) की विलेयता को Cl- (AgCl से) की विलेयता में जोड़ना होगा।

माना NaCl मिलाने से पहले AgCl में Ag+ तथा Cl- की विलेयता s है।

  NaCl (aq) Na+ (aq) + Cl-(aq)

  0.1 M  0  0

  0  0.1 M  0.1+s

  AgCl(s) Ag+(aq) + Cl-(aq)

  s  s+0.1

दिया है,  Ksp = 1.6 x 10-10 = [Ag+][Cl-]

  अथवा  1.6 x 10-10 = s(0.1+s)

  = 0.1s + s2

... Ksp छोटा है, अतः 0.1 की तुलना में s बहुत कम है। अतः s2 को नगण्य माना जा सकता है।

  अतः, 1.6 x 10-10 = 0.1s

   अथवा  s = 1.6 x 10-9 M

बोरिक अम्ल एक अम्ल है क्योंकि इसका अणु

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(c) बोरिक अम्ल को अम्ल माना जा सकता है क्योंकि इसका अणु जल से OH' ग्रहण करके प्रोटॉन मुक्त करता है।

H3BO+ H2   B(OH)-4   +   H+

  अम्ल  क्षार  संयुग्मी  संयुग्मी

  क्षार  अम्ल

स्मरण रखें प्रश्न के दिए गए विकल्पों में (a), (b) तथा (c) सही हैं क्योंकि इन सभी वाक्यों का अर्थ कमोबेश समान है परंतु यहाँ विकल्प (c) सर्वाधिक उपयुक्त है क्योंकि यह इस तथ्य की पूर्ण व्याख्या देता है कि बोरिक अम्ल किस प्रकार अम्ल के साथ संयोजित हो सकता है।

सांद्र H2SO4 तथा HNO3 के मिश्रण द्वारा बेंजीन के नाइट्रीकरण पर विचार कीजिए। यदि इस मिश्रण में KHSO4 की बड़ी मात्रा मिला दी जाए, तो नाइट्रीकरण का वेग होगा

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(a) सांद्र H2SO4 तथा HNO3 की उपस्थिति में बेंजीन के नाइट्रीकरण में, नाइट्रोबेंजीन बनता है।

HNO3 + H2SO4 => NO2++ HSO4 -+ H2O

  इलेक्ट्रॉनरागी  नाभिकरागी

यदि इस मिश्रण में KHSO4 की बड़ी मात्रा मिलाई जाए, तो अधिक HSO4 आयन उपलब्ध होते हैं और इसलिए NO2, अर्थात् इलेक्ट्रॉनरागी की सांद्रता घट जाती है।

इलेक्ट्रॉनरागी की सांद्रता घटने पर, इलेक्ट्रॉनरागी ऐरोमैटिक अभिक्रिया का वेग धीमा हो जाता है।

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