अभिक्रिया:
Cu (s) + 2Ag+ (aq) Cu2+ (aq) + 2Ag(s) ;
का साम्य स्थिरांक, जबकि 298 K पर E = 0.46 V है, होगा:
Cu (s) + 2Ag2+ (aq) Cu2+ (aq) + 2Ag (s)
E = 0.46 V at 298 K
RT ln K = nFE
ln K = nFE/RT = (2 x 0.46)/0.0591
K = 4 x 1015
रसायन विज्ञान (Chemistry) के NEET बहुविकल्पीय प्रश्न हिंदी में मुफ़्त हल करें — तुरंत सही उत्तर और विस्तृत व्याख्या के साथ। लॉगिन की आवश्यकता नहीं।
अभिक्रिया:
Cu (s) + 2Ag+ (aq) Cu2+ (aq) + 2Ag(s) ;
का साम्य स्थिरांक, जबकि 298 K पर E = 0.46 V है, होगा:
Cu (s) + 2Ag2+ (aq) Cu2+ (aq) + 2Ag (s)
E = 0.46 V at 298 K
RT ln K = nFE
ln K = nFE/RT = (2 x 0.46)/0.0591
K = 4 x 1015
अभिक्रिया,
CH4(g) + 2O2(g) CO2(g) + 2H2O (l),
rH = -170.kJ mol-1
के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य नहीं है?
अभिक्रिया,
CH4 (g) + 2O2(g) CO2 (g) + 2H2O (l) Hr = -170.8 kJ mol-1 के लिए
यह साम्य विषमांगी रासायनिक साम्य का उदाहरण है। अतः, इसके लिए
Kc = [CO2]/[CH4][O2]2 ....(i)
(सांद्रता के आधार पर साम्य स्थिरांक)
अतः, इसमें साम्य पर CO2 (g) तथा H2O (l) की सांद्रताएँ समान नहीं हैं। साम्य स्थिरांक (Kp) = [CO2]/[CH4][O2] सही व्यंजक नहीं है। साम्य पर CH4(g) या O2 (g) मिलाने पर, व्यंजक (i) के अनुसार Kc घटेगा परंतु किसी अभिक्रिया के लिए स्थिर ताप पर Kc स्थिर रहता है, अतः Kc का स्थिर मान बनाए रखने के लिए CO2 की सांद्रता उसी क्रम में बढ़ेगी। अतः CH4 या O2 मिलाने पर साम्य दाईं ओर विस्थापित होगा। यह अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया का उदाहरण है।
किसी निश्चित ताप पर निम्नलिखित साम्य स्थापित होता है, CO(g) + N02(g) CO2(g)+ NO(g) चारों गैसों में से प्रत्येक का एक मोल एक लीटर के पात्र में मिलाया जाता है और अभिक्रिया को साम्य अवस्था तक पहुँचने दिया जाता है। जब साम्य मिश्रण में बेराइटा जल (Ba(OH)2) का आधिक्य मिलाया जाता है, तो प्राप्त श्वेत अवक्षेप (BaCO3) का भार 236.4 gm है। अभिक्रिया का साम्य स्थिरांक Kc है (Ba = 137)
|
CO(g) |
+ |
NO2(g) |
CO2(g) |
+ |
NO(g) |
||
|
t = |
0.1 मोल |
|
1 मोल |
|
1 मोल |
|
1 मोल |
|
साम्य पर |
1 – x |
|
1 – x |
|
1 + x |
|
1 + x |
CO2 + Ba(OH)2 BaCO3
BaCO3 के मोल = = 1.2
अतः साम्य पर CO2 के मोल = 1.2
अथवा 1 + × = 1.2
x = 0.2
KC = 2.25
ठोस अमोनियम कार्बामेट वियोजित होकर अमोनिया तथा कार्बन डाइऑक्साइड इस प्रकार देता है:
NH2COONH4(s) 2 NH3(g) + CO2(g) साम्य पर, अमोनिया इस प्रकार मिलाई जाती है कि NH3 का आंशिक दाब अब मूल कुल दाब के बराबर हो जाए। अब के कुल दाब का मूल कुल दाब से अनुपात परिकलित कीजिए।
NH2COONH4(s) 2NH3(g) + CO2(g)
प्रारंभिक 2P P’
Kp =
Kp = (2P)2 (P) …… (i)
PT(प्रारंभिक) = 3P
NH2COONH4(s) 2NH3(g) + CO2(g)
अंतिम 3P P’
Kp = (3p)2 (p’) …… (ii)
समी. (i) तथा (ii) से
(2P)2 = (3P)2 (P')
P’ =
अभिक्रिया, HgO(s) Hg(g) + O2(g) के साम्य के लिए, कुल दाब P पर अभिक्रिया का kP है:
HgO(s) Hg (g) + O2 (g)
1 0 0
t =t , (1-x) X X/2
Kp = PHg(g) × P(O2)1/2
साम्य पर कुल मोल =
PHg =
PO2 =
Kp =
अभिकथन : तनु जलीय विलयनों में प्रबल अम्लों जैसे
की सामर्थ्य में अंतर करना कठिन है।
कारण : तनु जलीय विलयन में सभी प्रबल अम्ल जल को एक प्रोटॉन देते हैं और मूलतः
100% आयनित होकर ऐसा विलयन बनाते हैं जिसमें आयन तथा प्रबल अम्ल के ऋणायन होते हैं।
(A) सभी प्रबल हैं (समकरण प्रभाव)।
एक यौगिक में तीन तत्वों A, B तथा C के परमाणु हैं। यदि A की ऑक्सीकरण संख्या +2, B की +5 तथा C की -2 हो, तो यौगिक का संभावित सूत्र है
(b) A3(BC4)2 में
3 X A की ऑक्सीकरण संख्या + 2[B की ऑक्सीकरण संख्या + 4 X C की ऑक्सीकरण संख्या] = 0
3 X (+2) + 2[5+4X(-2)] =0
6+2[-3] = 0
जब Cl2 को Cl- तथा Cl में परिवर्तित किया जाता है तो Cl2 का n-गुणक होगा:
जब Cl2 को Cl- तथा ClO3- में परिवर्तित किया जाता है, तो ऑक्सीकरण अवस्था में परिवर्तन क्रमशः 0 से -1 तथा +5 तक होता है। कुल परिवर्तन 5 इकाई है। अतः, सूत्र n = (उच्चतम ऑ.अ. - निम्नतम ऑ.अ.)/परिवर्तन से गुजरने वाले परमाणुओं की संख्या के अनुसार Cl2 का n-गुणक 5/3 है।
यदि 10 gm V2O5 को अम्ल में घोलकर जिंक धातु द्वारा V2+ में अपचयित किया जाए, तो परिणामी विलयन द्वारा I2 के कितने मोल अपचयित किए जा सकते हैं यदि इसे आगे VO2+ आयनों में ऑक्सीकृत किया जाए ? [मान लीजिए Zn2+ आयनों की अवस्था में कोई परिवर्तन नहीं होता] (V = 51, O =16, I = 127) :
6e- + 10H+ + V2O5 → 2V2+ + 5 H2 O
Zn → Zn2+ + 2e- 3 × 3
V2O5 + 3 Zn + 10 H+ → 3Zn2+ + 2V2+ + 5H2O …
अब H2O + V2+ → VO2+ + 2H+ + 2e-
2e- + I2 → 2r-
V2+ + I2 + H2O → 2I- + VO2+ + 2H+
अतः V2O5 का 1 मोल आयोडीन के 2 मोल अपचयित करेगा
अतः V2O5 की दी गई मात्रा द्वारा मोल अपचयित होंगे = 12 के 0.11 मोल
पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड तथा सोडियम कार्बोनेट के मिश्रित विलयन को फीनॉल्फ्थैलीन सूचक के साथ अनुमापित करने पर N/20 HCI विलयन के 15 mL की आवश्यकता हुई। परंतु उसी विलयन की उतनी ही मात्रा को मेथिल ऑरेंज सूचक के साथ अनुमापित करने पर उसी अम्ल के 25 mL की आवश्यकता हुई। विलयन में उपस्थित KOH की मात्रा है
KOH + Na2aO3
a M.e.b.M.e.
a + = 15 ×
2a + b= 1.5 … (i) (फीनॉल्फ्थैलीन की उपस्थिति में)
a + b = 25 × = 1.25… (ii) (मेथिल ऑरेंज की उपस्थिति में)
(i) तथा (ii) को हल करने पर a = 0.25 m.e
KOH का द्रव्यमान = 56 = 0. 014 gm
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