निम्नलिखित में से किस विद्युत्-अपघट्य का वान्ट हॉफ गुणांक(i) का मान Al2(SO4)3 के समान है (यदि सभी 100% आयनित हों)?
रसायन विज्ञान (Chemistry) NEET प्रश्न हिंदी में — उत्तर सहित MCQ अभ्यास
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Al2(SO4)3⇌2AL3+ + 3SO42-
(d) K4[Fe(CN)6]⇌ 4K+ + [Fe(CN)6]3- (i=5)
निम्नलिखित 0.10 m जलीय विलयनों में से कौन-सा सर्वाधिक हिमांक अवनमन दर्शाएगा?
Tf (हिमांक अवनमन) एक अणुसंख्य गुणधर्म है तथा वान्ट हॉफ गुणांक (i) पर निर्भर करता है, अर्थात् जलीय विलयन में विद्युत्-अपघट्य द्वारा दिए गए आयनों की संख्या पर।
Tf =i x Kf xm
जहाँ, = मोलल हिमांक अवनमन स्थिरांक
m = विलयन की मोललता
Kf तथा m स्थिरांक हैं,
(a) KCl(aq) K+(aq) + Cl-(aq),
(कुल आयन =2 अतः, i = 2)
(b) C6H12O6 कोई आयन नहीं[i=0]
(c) Al2(SO4)3(aq) 2Al3+ + 3SO2-4 [कुल आयन = 5, अतः, i = 5 ]
(d) K2SO4(aq) 2K+ + SO-
[कुल आयन = 3, अतः, i = 3 ]
अतः Al2(SO4)3 उच्चतम मान के कारण सर्वाधिक हिमांक अवनमन दर्शाएगा।
pA तथा pB, क्रमशः एक आदर्श द्विअंगी विलयन के शुद्ध द्रव घटकों A तथा B के वाष्प दाब हैं। यदि x घटक A का मोल प्रभाज निरूपित करता है, तो विलयन का कुल दाब होगा।
कुल दाब,
pT = p'A+p'B ...(i)
हम जानते हैं कि, p'A = pAxA
p'B = pBxB
p'A तथा p'B के मानों को समी. (i) में रखने पर
pT = pAxA + pBxB
[xA+xB=1->xA=1-xB or xB=1-xA]
=pAxA + pB(1-xA) = pAxA + pB - pBxA
∴ pT = pB+xA(pA-pB)
हिमांक अवनमन स्थिरांक -1.86°C m-1 है। यदि 5.00g Na2SO4 को 45.0 g H2O में घोला जाए, तो हिमांक -3.82°C बदल जाता है। NaSO4 के लिए वान्ट हॉफ गुणांक ज्ञात कीजिए
किसी यौगिक के लिए वान्ट हॉफ गुणांक i, जो एक विलायक में वियोजित तथा दूसरे विलायक में संगुणित होता है, क्रमशः है।
(b) वियोजन के लिए, i>1
संगुणन के लिए, i<1
एक जलीय विलयन KI में 1.00 मोलल है। कौन-सा परिवर्तन विलयन के वाष्प दाब को बढ़ाएगा ?
मुख्य विचार: वाष्प दाब विलयन के पृष्ठ क्षेत्रफल पर निर्भर करता है। पृष्ठ क्षेत्रफल जितना अधिक होगा, वाष्प दाब उतना ही अधिक होगा।
विलेय मिलाने से वाष्प दाब घट जाता है क्योंकि पृष्ठ के कुछ स्थान विलेय कणों द्वारा घेर लिए जाते हैं, जिससे पृष्ठ क्षेत्रफल घट जाता है। परंतु विलायक मिलाने, अर्थात् तनुकरण, से द्रव पृष्ठ का क्षेत्रफल बढ़ जाता है, जिससे वाष्प दाब बढ़ जाता है।
अतः (1 मोलल) KI के जलीय विलयन में जल मिलाने से वाष्प दाब बढ़ जाता है।
सुक्रोस (मोलर द्रव्यमान = 342 g mol-1) का एक विलयन 1000 g जल में 68.5 g सुक्रोस घोलकर बनाया गया है। प्राप्त विलयन का हिमांक होगा (kf जल के लिए = 1.86 K kg mol-1)
हिमांक में अवनमन
Tf = kf x m
जहाँ, m = मोललता = wB x 1000/MB.WA = 68.5 x 1000/342 x 1000 = 68.5/342
Tf = 1.86 x 68.5/342 = 0.372C
Tf = T-Ts = 0-0.372C
तनुकरण के साथ किसी प्रबल विद्युत्-अपघट्य की तुल्यांकी चालकता में वृद्धि मुख्यतः किसके कारण होती है
मुख्य विचार
तनुकरण पर, प्रति cm3 धारावाही कणों की संख्या घट जाती है परंतु विलयन का आयतन बढ़ जाता है। फलस्वरूप आयनिक गतिशीलता बढ़ती है, जिससे प्रबल विद्युत्-अपघट्य की तुल्यांकी चालकता बढ़ जाती है।
एक दुर्बल एकक्षारकीय अम्ल के M/32 विलयन की तुल्यांकी चालकता 8.0 mho cm2 है तथा अनंत तनुता पर 400 mho cm2 है। इस अम्ल का वियोजन स्थिरांक है।
वियोजन की मात्रा, α=^c/^∞ जहाँ, ^c तथा ^∞ क्रमशः दी गई सांद्रता पर तथा अनंत तनुता पर तुल्यांकी चालकताएँ हैं।
⇒ α=8.0/400=2x10-2
ओस्टवाल्ड के तनुता नियम से (दुर्बल एकक्षारकीय अम्ल के लिए)
Ka = Cα/(1- α) = Cα2 (∴ 1>>>α) = 1/32 (2x10-2)2 = 1.25x10-5
एक आयनिक यौगिक Co(NH3)5(NO2)Cl का 0.0020 m जलीय विलयन -0.00732°C पर जमता है। जल में घोलने पर 1 मोल आयनिक यौगिक द्वारा उत्पन्न आयनों के मोलों की संख्या होगी (kf=-1.86。C/ m)
(a) दिया है,
मोललता, m=0.0020 m
चूँकि यौगिक आयनिक है, अतः उत्पन्न मोलों की संख्या वान्ट हॉफ गुणांक i के बराबर है। अतः 2 मोल आयन उत्पन्न होते हैं।
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