पृथ्वी की औसत त्रिज्या R है, अपनी अक्ष पर उसकी कोणीय चाल है तथा पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वीय त्वरण g है। किसी भूस्थिर उपग्रह की कक्षा की त्रिज्या का घन होगा -
(d) कक्षीय वेग तथा
इससे प्राप्त होता है
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पृथ्वी की औसत त्रिज्या R है, अपनी अक्ष पर उसकी कोणीय चाल है तथा पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वीय त्वरण g है। किसी भूस्थिर उपग्रह की कक्षा की त्रिज्या का घन होगा -
(d) कक्षीय वेग तथा
इससे प्राप्त होता है
कोई उपग्रह जिसका द्रव्यमान M है, पृथ्वी के चारों ओर त्रिज्या r की वृत्ताकार कक्षा में परिक्रमा कर रहा है। उपग्रह का परिक्रमण काल है
(b)
समीकरण (2) से v का मान समीकरण (1) में रखने पर
मान लीजिए गुरुत्वीय बल दूरी की घात के व्युत्क्रमानुपाती है। तो सूर्य के चारों ओर त्रिज्या R की वृत्ताकार कक्षा में किसी ग्रह का आवर्तकाल किसके अनुक्रमानुपाती होगा -
(a)
पृथ्वी की सतह के अत्यंत निकट किसी कृत्रिम उपग्रह की कक्षीय चाल है। तो पृथ्वी की त्रिज्या के तीन गुना के बराबर ऊँचाई पर किसी अन्य कृत्रिम उपग्रह की कक्षीय चाल है
(c) यदि तो
यदि तो
विषुवत रेखा पर प्रभावी गुरुत्वीय त्वरण शून्य करने के लिए, पृथ्वी के अपनी अक्ष के परितः घूर्णन का कोणीय वेग होना चाहिए (g=10 तथा पृथ्वी की त्रिज्या 6400 kms है)
(b)
विषुवत रेखा पर भारहीनता के लिए तथा
द्रव्यमान M का एक रॉकेट पृथ्वी की सतह से प्रारंभिक चाल V के साथ ऊर्ध्वाधर रूप से प्रक्षेपित किया जाता है। पृथ्वी की त्रिज्या R तथा वायु प्रतिरोध नगण्य मानते हुए, पृथ्वी की सतह से ऊपर रॉकेट द्वारा प्राप्त अधिकतम ऊँचाई है
(c)
...(i)
साथ ही ...(ii)
(i) तथा (ii) हल करने पर
द्रव्यमान तथा के दो पिंड प्रारंभ में अनंत दूरी पर विरामावस्था में हैं। फिर उन्हें पारस्परिक गुरुत्वीय आकर्षण के अधीन एक-दूसरे की ओर गति करने दिया जाता है। उनके बीच पृथकन दूरी r पर उनका सापेक्ष निकटन वेग है
(b) माना एक-दूसरे से r दूरी पर इन द्रव्यमानों के वेग क्रमशः तथा हैं। संवेग संरक्षण से
...(i)
ऊर्जा संरक्षण से
स्थितिज ऊर्जा में परिवर्तन= गतिज ऊर्जा में परिवर्तन
...(ii)
समीकरण (i) तथा (ii) हल करने पर
तथा
वह गहराई d जिस पर गुरुत्वीय त्वरण का मान सतह पर के मान का गुना हो जाता है, है [R = पृथ्वी की त्रिज्या]
(b)
दो ग्रहों के व्यास 4 : 1 के अनुपात में हैं तथा उनके औसत घनत्व 1 : 2 के अनुपात में हैं। ग्रहों पर गुरुत्वीय त्वरण किस अनुपात में होगा
(c)
किस ऊँचाई पर (मीटर में) गुरुत्वीय त्वरण पृथ्वी की सतह पर के 25% होगा (पृथ्वी की त्रिज्या = R metre)
b)
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