NEET प्रश्न (MCQ) हिंदी में — उत्तर और विस्तृत हल सहित

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एक जलीय विलयन KI में 1.00 मोलल है। कौन-सा परिवर्तन विलयन के वाष्प दाब को बढ़ाएगा ?

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मुख्य विचार: वाष्प दाब विलयन के पृष्ठ क्षेत्रफल पर निर्भर करता है। पृष्ठ क्षेत्रफल जितना अधिक होगा, वाष्प दाब उतना ही अधिक होगा।

विलेय मिलाने से वाष्प दाब घट जाता है क्योंकि पृष्ठ के कुछ स्थान विलेय कणों द्वारा घेर लिए जाते हैं, जिससे पृष्ठ क्षेत्रफल घट जाता है। परंतु विलायक मिलाने, अर्थात् तनुकरण, से द्रव पृष्ठ का क्षेत्रफल बढ़ जाता है, जिससे वाष्प दाब बढ़ जाता है।

अतः (1 मोलल) KI के जलीय विलयन में जल मिलाने से वाष्प दाब बढ़ जाता है।

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सुक्रोस (मोलर द्रव्यमान = 342 g mol-1) का एक विलयन 1000 g जल में 68.5 g सुक्रोस घोलकर बनाया गया है। प्राप्त विलयन का हिमांक होगा (kf जल के लिए = 1.86 K kg mol-1)

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हिमांक में अवनमन

∆Tf = kf x m

जहाँ, m = मोललता = wB x 1000/MB.WA = 68.5 x 1000/342 x 1000 = 68.5/342

 ∆Tf = 1.86 x 68.5/342 = 0.372°C

∆Tf = T°-Ts = 0-0.372°C

 

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तनुकरण के साथ किसी प्रबल विद्युत्-अपघट्य की तुल्यांकी चालकता में वृद्धि मुख्यतः किसके कारण होती है

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मुख्य विचार λeq = k x v = (kx1000)normality

तनुकरण पर, प्रति cm3 धारावाही कणों की संख्या घट जाती है परंतु विलयन का आयतन बढ़ जाता है। फलस्वरूप आयनिक गतिशीलता बढ़ती है, जिससे प्रबल विद्युत्-अपघट्य की तुल्यांकी चालकता बढ़ जाती है।

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एक दुर्बल एकक्षारकीय अम्ल के M/32 विलयन की तुल्यांकी चालकता 8.0 mho cm2 है तथा अनंत तनुता पर 400 mho cm2  है। इस अम्ल का वियोजन स्थिरांक है।

1.25x10-5

 1.25x10-6

6.25x10-4

 1.25x10-4

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वियोजन की मात्रा, α=^c/^∞ जहाँ, ^c तथा ^∞ क्रमशः दी गई सांद्रता पर तथा अनंत तनुता पर तुल्यांकी चालकताएँ हैं।
  ⇒ α=8.0/400=2x10-2

ओस्टवाल्ड के तनुता नियम से (दुर्बल एकक्षारकीय अम्ल के लिए)

Ka = Cα/(1- α) = Cα2 (∴ 1>>>α) 
= 1/32 (2x10-2)2 = 1.25x10-5

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एक आयनिक यौगिक Co(NH3)5(NO2)Cl का 0.0020 m जलीय विलयन -0.00732°C पर जमता है। जल में घोलने पर 1 मोल आयनिक यौगिक द्वारा उत्पन्न आयनों के मोलों की संख्या होगी (kf=-1.86。C/ m)

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(a) दिया है,

मोललता, m=0.0020 m

  ∆Tf=0∘C-(- 0.00732°C)        = 0 + 0.00732°C        = 0.00732°C   kf = 1.86°C/m∆Tf=i·kf×m      i=∆Tfkf×m= 0.007321.86 ×0.0020= 1.96 ≃2

चूँकि यौगिक आयनिक है, अतः उत्पन्न मोलों की संख्या वान्ट हॉफ गुणांक i के बराबर है। अतः 2 मोल आयन उत्पन्न होते हैं।

CoNH35NO2Cl →          CoNH35NO2+ + Cl-            1 mol                                     2 ions

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कोलराउश का नियम कहता है कि

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(d) कोलराउश के नियम के अनुसार "अनंत तनुता पर जब वियोजन पूर्ण होता है, तो प्रत्येक आयन विद्युत्-अपघट्य की तुल्यांकी चालकता में निश्चित योगदान देता है, चाहे वह जिस अन्य आयन से संबद्ध हो उसकी प्रकृति कुछ भी हो

    अथवा

अनंत तनुता पर किसी विद्युत्-अपघट्य की तुल्यांकी चालकता धनायनों तथा ऋणायन की तुल्यांकी चालकताओं का योग होती है।

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एक दुर्बल अम्ल (HX) का 0.5 मोलल जलीय विलयन 20% आयनित है। यदि Kf जल के लिए 1.86 K kg mol-1 हो, तो विलयन के हिमांक में अवनमन है:

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HX ⇌H+ + X-

1  0  0

1-α  α  α  (साम्यावस्था पर)

α = 20% वियोजन

अर्थात्, α = 0.2

i = 1-α+α+α

=1+α=1+0.2=1.2

∆Tf =i x Kf x m

= 1.2 x 1.86K kg mol-1 x 0.5

= 1.12 K

 

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 10 g प्रति dm3 यूरिया (आण्विक द्रव्यमान = 60 g mol-1) युक्त एक विलयन किसी अवाष्पशील विलेय के 5% विलयन के साथ समपरासरी है। इस अवाष्पशील विलेय का आण्विक द्रव्यमान है:

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10 g प्रति dm3 यूरिया किसी अवाष्पशील विलेय के 5% विलयन के साथ समपरासरी है। अतः इन विलयनों के बीच परासरण संभव नहीं है, इसलिए इनकी मोलर सांद्रताएँ एक-दूसरे के बराबर हैं,

अतः यूरिया विलयन की मोलर सांद्रता = (10 g/dm3)/यूरिया का अणुभार = 10/60 M = 1/6 M

5% अवाष्पशील विलेय की मोलर सांद्रता = (50 g/dm3)/अवाष्पशील विलेय का अणुभार = 50/m M

दोनों विलयन एक-दूसरे के समपरासरी हैं, अतः

 1/6 = 50/m

अथवा m = 50 x 6 = 300 g mol-1

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एथेनॉल में ऐसीटोन का विलयन:

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(b) एथेनॉल में ऐसीटोन का विलयन राउल्ट के नियम से धनात्मक विचलन दर्शाता है, क्योंकि इन दोनों द्रवों की ध्रुवता तथा हाइड्रोकार्बन शृंखला की लंबाई में अंतर होने पर भी वे मिश्रणीय हैं।

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परासरण के दौरान, अर्धपारगम्य झिल्ली से होकर जल का प्रवाह होता है :

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परासरण के दौरान, अर्धपारगम्य झिल्ली से होकर जल का प्रवाह केवल कम सांद्रता वाले विलयन से होता है। 

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