तीन विलयन बनाए जाते हैं: 'A' के 'w' gm को 1kg जल में, '13' के gm को दूसरे 1 kg जल में तथा 'C' के 'w' gm को अन्य 1 kg जल में मिलाकर (A, B, C अविद्युत्-अपघट्य हैं)। इन विलयनों में क्रमशः (A → B → C) शुष्क वायु प्रवाहित की जाती है। विलयन A का भार 2gm घटा पाया गया जबकि विलयन B का भार 0.5 gm बढ़ा तथा विलयन C का 1 gm घटा। तब A, B तथा C के मोलर द्रव्यमानों के बीच संबंध है :
भार में हानि उस विलयन के ऊपर के वाष्प दाब के समानुपाती होनी चाहिए:
अतः, 2gm
1.5gm
2.5gm
अतः अधिकतम वाष्प दाब C विलयन के ऊपर है, इसलिए इसमें अवनमन न्यूनतम है तथा अतः मोल प्रभाज न्यूनतम है (अर्थात् विलेय के मोलों की संख्या न्यूनतम है)। अतः पदार्थ का मोलर द्रव्यमान अधिकतम है।