सुक्रोस (आण्विक द्रव्यमान = 342) का विलयन 34.2 gm. इसे 1000 gm. जल में घोलकर बनाया जाता है। विलयन का हिमांक है (Kf जल के लिए 1.86 K kg mol–1) [AIEEE 2003]
विलयन की मोललता
विलयन का हिमांक
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सुक्रोस (आण्विक द्रव्यमान = 342) का विलयन 34.2 gm. इसे 1000 gm. जल में घोलकर बनाया जाता है। विलयन का हिमांक है (Kf जल के लिए 1.86 K kg mol–1) [AIEEE 2003]
विलयन की मोललता
विलयन का हिमांक
एक दुर्बल एकक्षारकीय अम्ल का जलीय विलयन, जिसमें 21.7 g जल में 0.1 g अम्ल घुला है, 272.817K पर जमता है। यदि जल के लिए Kf का मान 1.86 K kg mol–1 है, तो अम्ल का अणुभार है [AMU 2002]
विलायक का द्रव्यमान
विलेय का द्रव्यमान
हिमांक में अवनमन,
किसी विलायक में किसी विलेय के विलयन की मोललता क्या होगी यदि हिमांक अवनमन 0.184° है तथा हिमांक स्थिरांक 18.4 है
अथवा
100 g जल में 6.8 g अनआयनिक विलेय युक्त एक विलयन का हिमांक पाया गया । जल का हिमांक अवनमन स्थिरांक 1.86 है। विलेय का अणुभार ज्ञात कीजिए
[Pb. PMT 1994; ISM Dhanbad 1994]
जल के लिए मोलर हिमांक स्थिरांक 1.86°C/mole है। यदि 342 g गन्ना शर्करा को 1000 g जल में घोला जाए, तो विलयन जमेगा
जल के लिए मोलल हिमांक स्थिरांक 1.86°C/m है। अतः जल में 0.1 m NaCl विलयन का हिमांक होना अपेक्षित है [MLNR 1994]
यूरिया, सोडियम क्लोराइड तथा सोडियम सल्फेट के 0.01 M जलीय विलयनों के हिमांक में अवनमन का अनुपात है [Roorkee 1990; DCE 1994]
0.01 M यूरिया, NaCl तथा के कणों की सांद्रता क्रमशः इस प्रकार है, अर्थात् वे 1 : 2 : 3 के अनुपात में हैं। अतः हिमांक में अवनमन भी उसी अनुपात में होगा।
0.1 M विलयन के लिए वान्ट हॉफ गुणांक 2.74 है। वियोजन की मात्रा है [IIT 1999]
⇌
अथवा
अभिकथन : दो द्रवों के द्विअंगी विलयन के संदर्भ में पूर्णतः आदर्श विलयन संभव नहीं है।
कारण : कोई भी दो पदार्थ अंतराआण्विक बलों की ठीक एक जैसी प्रकृति तथा एक ही परिमाण नहीं रख सकते।
(A) अभिकथन सत्य है, कारण सत्य है तथा कारण, अभिकथन की सही व्याख्या है।
अभिकथन : जब किसी कोशिका को अतिपरासरणदाबी विलयन में रखा जाता है, तो वह सिकुड़ जाती है।
कारण : जल के विलवणीकरण के लिए प्रतिलोम परासरण का उपयोग किया जाता है।
(B) अभिकथन सही है क्योंकि कोशिका के भीतर वाष्प दाब बाहर की अपेक्षा अधिक होने से कोशिका के अंदर उपस्थित तरल बाहर आ जाते हैं।
कारण सही है क्योंकि प्रतिलोम परासरण में लवणीय जल से विलायक अर्धपारगम्य झिल्ली से होकर शुद्ध विलायक में जाता है।
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