अभिकथन : HCl तथा HF के समान मोलर विलयनों के क्वथनांकों का अंतर उनकी
मोलरता घटाने पर घटता है।
कारण : बढ़ती तनुता के साथ वियोजन की मात्रा लगातार घटती है।
(C) बढ़ती तनुता के साथ वियोजन की मात्रा लगातार बढ़ती है।
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अभिकथन : HCl तथा HF के समान मोलर विलयनों के क्वथनांकों का अंतर उनकी
मोलरता घटाने पर घटता है।
कारण : बढ़ती तनुता के साथ वियोजन की मात्रा लगातार घटती है।
(C) बढ़ती तनुता के साथ वियोजन की मात्रा लगातार बढ़ती है।
अभिकथन : जब 0.1 मोलल यूरिया विलयन के 'a' mL को 0.1 मोलल ग्लूकोस विलयन के 'b' mL के साथ मिलाया जाता है, तो विलयन का क्वथनांक मिलाने से पहले के नमूनों के क्वथनांकों से भिन्न नहीं होता, परन्तु यदि 0.1 मोलल यूरिया के 'a' mL को 0.1 मोलल HF के 'b' mL के साथ मिलाया जाए तो मिश्रण का क्वथनांक अलग-अलग नमूनों के क्वथनांकों से भिन्न होता है।
कारण : HF एक दुर्बल विद्युत्-अपघट्य है जबकि ग्लूकोस अविद्युत्-अपघट्य है।
(A) क्योंकि तनुकरण पर HF के वियोजन की मात्रा बदल जाती है।
नीचे एक विद्युत्-रासायनिक सेल दिखाया गया है : Pt, H2(1 atm)| HCl (0.1 M)CH3COOH (0.1 M)| H2(1 atm), Pt । इस सेल का विद्युत्-वाहक बल शून्य नहीं होगा, क्योंकि
(b) सेल का विद्युत्-वाहक बल शून्य नहीं होगा क्योंकि दोनों विद्युत्-अपघट्य विलयनों में H+ आयनों की सांद्रता भिन्न है। HCl प्रबल अम्ल है जबकि ऐसीटिक अम्ल दुर्बल अम्ल है और वे भिन्न pH देते हैं।
KNO3 का संतृप्त विलयन 'लवण सेतु' बनाने के लिए प्रयुक्त होता है क्योंकि :
(c) लवण सेतु में ऐसा विद्युत्-अपघट्य होता है जिसके धनायन तथा ऋणायन की आयनिक गतिशीलताएँ लगभग समान होती हैं।
श्रेणीक्रम में जुड़े दो वोल्टामीटरों में से धारा प्रवाहित की जाती है। पहले वोल्टामीटर में XSO4(aq) है जबकि दूसरे वोल्टामीटर में Y2SO4(aq) है। X तथा Y के आपेक्षिक परमाणु द्रव्यमानों का अनुपात 2:1 है। मुक्त हुए X के द्रव्यमान तथा मुक्त हुए Y के द्रव्यमान का अनुपात है :
(a) प्रत्येक के समान तुल्यांक मुक्त होते हैं।
X के तुल्यांक = Y के तुल्यांक
उस धारा-मात्रा द्वारा विस्थापित सिल्वर (तुल्यांकी द्रव्यमान = 108) का द्रव्यमान, जो STP पर 5600 mL हाइड्रोजन विस्थापित करती है, है :
प्रयुक्त अवधारणा : विद्युत्-अपघटन का फैराडे का द्वितीय नियम
हल : फैराडे के द्वितीय नियम के अनुसार
यहाँ गैस सम्मिलित है, अतः हम सीधे उपयोग कर सकते हैं
965 कूलॉम विद्युत् प्रवाहित करके एक सिल्वर कप पर सिल्वर की परत चढ़ाई जाती है। निक्षेपित Ag की मात्रा है :
प्रयुक्त अवधारणा : फैराडे का प्रथम नियम।
दिया है : Q = 965 कूलॉम
निक्षेपित पदार्थ का भार दिया जाता है
w = 2 x Q (फैराडे का प्रथम नियम)
धातु का तुल्यांकी भार E=
25°C पर अमोनियम हाइड्रॉक्साइड के 0.1 मोलर जलीय विलयन की मोलर चालकता 9.54 Ω-1 cm2 mol-1 है तथा अनंत तनुता पर इसकी मोलर चालकता 238 Ω-1 cm2 mol-1है। समान सांद्रता तथा समान ताप पर अमोनियम हाइड्रॉक्साइड के आयनन की मात्रा है
(C) दिया है, 0.1 M सांद्रता पर मोलर चालकता,
= 9.54Ω-1 cm2 mol-1
अनंत तनुता पर मोलर चालकता,
= 238 Ω-1 cm2 mol-1.
हम जानते हैं कि,
आयनन की मात्रा,
= /
=(9.54/238) x 100 = 4.008%
नर्न्स्ट समीकरण का सही निरूपण कौन-सा है ?
(d)
नर्न्स्ट समीकरण एक महत्वपूर्ण संबंध है जिसका उपयोग अभिक्रिया साम्य स्थिरांक तथा सांद्रता विभव ज्ञात करने के लिए किया जाता है
जब एक कॉपर तार को AgNO3 के विलयन में डुबोया जाता है, तो विलयन का रंग नीला हो जाता है क्योंकि कॉपर :
(b) विद्युत्-रासायनिक श्रेणी में Cu, Ag से ऊपर है और इस प्रकार,
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