0.1N KCl विलयन की विशिष्ट चालकता 23 पर 0.012 है। समान ताप पर इस विलयन युक्त सेल का प्रतिरोध पाया गया 55 । सेल स्थिरांक होगा
(b) विशिष्ट चालकता, k=0.012
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0.1N KCl विलयन की विशिष्ट चालकता 23 पर 0.012 है। समान ताप पर इस विलयन युक्त सेल का प्रतिरोध पाया गया 55 । सेल स्थिरांक होगा
(b) विशिष्ट चालकता, k=0.012
नीचे अर्ध-सेल अभिक्रियाएँ दी गई हैं,
Mn2+ + 2e- → Mn; E0 = -1.18V
2(Mn3+ + e- → Mn2+); E0 = +1.51V
अभिक्रिया 2Mn2+ → Mn + 2Mn3+ के लिए E0 होगा :
(a) 2Mn2+ → 2Mn3+ + 2e E0OP = -1.51 V
2e + Mn2+ → Mn E0RP = -1.18 V
इन समीकरणों को हल करने पर
3Mn2+ → 2Mn3+ + Mn E0Cell = -2.69 V
E0Cell का ऋणात्मक मान अस्वतःप्रवर्तित प्रकृति दर्शाता है।
Fe2+ + 2e → Fe के लिए E0 -0.44 वोल्ट है तथा Zn2+ + 2e→ Zn के लिए E0 -0.76 वोल्ट है, अतः :
(a)
सेल का वोल्टेज कौन बढ़ाएगा
(c)
जिंक सल्फेट के विलयन में से 40 min तक 5A धारा प्रवाहित की जाती है। कैथोड पर निक्षेपित जिंक की मात्रा है
प्रयुक्त अवधारणा : फैराडे का प्रथम नियम।
निक्षेपित पदार्थ का भार इस प्रकार दिया जाता है :
w = 2 x Q
w = 2 x i x t (i सदैव ऐम्पियर में, t सदैव सेकंड में)
यदि लोहे की एक छड़ को CuSO4 विलयन में डुबोया जाए, तो :
विद्युत्-रासायनिक श्रेणी में Fe, Cu से ऊपर है और इस प्रकार यह CuSO4 से Cu को मुक्त कर देता है।
अपनी सांद्रता खोए बिना ZnCl2 विलयन को किसके संपर्क में नहीं रखा जा सकता।
(b) विद्युत्-रासायनिक श्रेणी में Al, Zn से ऊपर स्थित है तथा शेष सभी Zn से नीचे हैं। अतः ऐलुमिनियम ZnCl2 विलयन से जिंक को विस्थापित कर देता है। इसलिए इसे Al के संपर्क में नहीं रखा जा सकता।
Al2O3 का अपचयन कम विभव तथा उच्च धारा पर विद्युत्-अपघटन द्वारा किया जाता है। यदि पिघले हुए Al2O3 में से 6 h तक 4.0 x 104 A धारा प्रवाहित की जाए, तो कितने द्रव्यमान का ऐलुमिनियम उत्पन्न होगा? (धारा दक्षता 100% मानिए, Al का परमाणु द्रव्यमान = 27g mol-1)
प्रयुक्त अवधारणा : फैराडे का प्रथम नियम :
w = 2 x Q
निम्नलिखित अर्ध-अभिक्रियाओं के लिए 290 K पर मानक अपचयन विभव हैं,
(i) Zn2+ + 2e— → Zn(s); E° = -0.762 V
(ii) Cr3+ + 3e → Cr(s); E° = -0.740 V
(iii) 2H+ + 2e → H2(g); · E° = -0.000 V
(iv) Fe3+ + e → Fe2+; E° = +0.77V
प्रबलतम अपचायक कौन-सा है?
(a) Zn का अधिक धनात्मक E°OP है और इस प्रकार इसमें ऑक्सीकृत होने तथा अपचायक की भाँति कार्य करने की अधिक प्रवृत्ति होती है।
लोहे से बने जहाज़ की तली की सुरक्षा का सबसे सुविधाजनक तरीका है
यह जंग लगने से रोकता है क्योंकि यह कैथोडिक संरक्षण प्रदान करता है (b) तथा जल एवं लवण की क्रिया रोकता है। जहाज़ की तली में मैग्नीशियम के कई ब्लॉक लगाए जाते हैं। मैग्नीशियम अपने हल्केपन, ऑक्सीजन के प्रति अधिक बंधुता तथा दृढ़ता के कारण जहाज़ में प्रयुक्त होता है
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