इलेक्ट्रोड विभव
के लिए क्रमशः +0.15 V तथा +0.50 V हैं। का मान होगा
(a)
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इलेक्ट्रोड विभव
के लिए क्रमशः +0.15 V तथा +0.50 V हैं। का मान होगा
(a)
जब MnO2-4 का 0.1 मोल ऑक्सीकृत होता है, तो MnO2-4 को पूर्णतः MnO-4 में ऑक्सीकृत करने के लिए आवश्यक विद्युत् की मात्रा है
Zn, लोहे को जंग लगने से बचाने के लिए बलिदानी अथवा कैथोडिक संरक्षण का कार्य करता है क्योंकि :
(b) लोहे के स्थान पर Zn ऑक्सीकृत होता है तथा यदि लोहे पर Zn की परत चढ़ाई जाए अर्थात् गैल्वनीकरण किया जाए तो लोहा कैथोड की भाँति कार्य करता है, इसीलिए इसे बलिदानी संरक्षण भी कहते हैं।
प्लैटिनम इलेक्ट्रोडों के बीच तनु H2SO4 के विलयन का विद्युत्-अपघटन करने पर ऐनोड तथा कैथोड पर मुक्त होने वाली गैसें क्रमशः हैं :
(c)
Cu(II) लवण के विलयन में से 2 फैराडे विद्युत् प्रवाहित करने पर कितने द्रव्यमान का कॉपर निक्षेपित होगा?
प्रयुक्त अवधारणा : फैराडे का प्रथम नियम
इलेक्ट्रोड पर निक्षेपित भार इस प्रकार दिया जाता है
w= z x Q
w = Z x 2 x 96500 [1 F=96500 c]
NaCl के विद्युत्-अपघटन में जब Pt इलेक्ट्रोड लिया जाता है तो कैथोड पर H2 मुक्त होती है, जबकि Hg कैथोड के साथ यह सोडियम अमलगम बनाता है, क्योंकि
(b) जल में सोडियम क्लोराइड इस प्रकार वियोजित होता है
NaCl Na+ + Cl-
H2O H+ + OH-
जब प्लैटिनम इलेक्ट्रोडों का उपयोग करके इस विलयन में से विद्युत् धारा प्रवाहित की जाती है, तो Na+ तथा H+ कैथोड की ओर जाते हैं जबकि Cl- तथा OH- आयन ऐनोड की ओर जाते हैं।
कैथोड पर
H+ + e- H
H+H H2
ऐनोड पर
Cl- C1 + e-
Cl + Cl Cl2
यदि पारद को कैथोड के रूप में प्रयुक्त किया जाए, तो पारद कैथोड पर H+ आयन निर्वहित नहीं होते क्योंकि पारद का हाइड्रोजन अति-विभव उच्च होता है। H+ आयनों की अपेक्षा Na+ आयन कैथोड पर निर्वहित होकर सोडियम देते हैं, जो पारद में घुलकर सोडियम अमलगम बनाता है।
पिघले हुए Al2O3 तथा पिघले हुए NaCl युक्त दो सेलों में से विद्युत् की समान मात्रा प्रवाहित की गई। यदि एक सेल में 1.8g Al मुक्त हुआ, तो दूसरे सेल में मुक्त Na की मात्रा है :
प्रयुक्त अवधारणा : फैराडे का द्वितीय नियम :
द्वितीय नियम के अनुसार
AgNO3, CuSO4, Al(NO3)3 तथा NaCl के जलीय विलयनों में से तीन फैराडे आवेश प्रवाहित करने पर कैथोड पर धातुएँ किस मोलर अनुपात में निक्षेपित होंगी :
प्रयुक्त अवधारणा : फैराडे का द्वितीय नियम + विद्युत्-अपघटन के उत्पाद
दिया गया विलयन :
ध्यान दें :
तथा NaCl की स्थिति में,
Al तथा Na अपने-अपने इलेक्ट्रोडों पर निक्षेपित नहीं होंगे क्योंकि उनका निर्वहन विभव हाइड्रोजन से कम है, अतः Al, Na के स्थान पर,
गैस कैथोड पर मुक्त होगी।
कैथोड पर :
यहाँ :
1 मोल 1 मोल Ag निक्षेपित करता है
1F आवेश निक्षेपित करता है 1 मोल Ag
3F x
इसी प्रकार Cu के लिए
यदि जलीय NaCl विलयन के विद्युत्-अपघटन में पारद को कैथोड के रूप में प्रयुक्त किया जाए, तो कैथोड पर निर्वहित होने वाले आयन हैं :
(b) Hg इलेक्ट्रोड की उपस्थिति में (H+ की तुलना में) Na+ का अधिमानी निर्वहन होता है।
तीन धातुओं X, Y तथा Z के मानक अपचयन इलेक्ट्रोड विभव क्रमशः -1.2V, + 0.5V तथा -3V हैं। इन धातुओं की अपचायक क्षमता होगी
(b) = -1.2V, = +0.5V, = -3V, Z>X>Y [ अपचयन विभव जितना अधिक, अपचायक क्षमता उतनी कम।]
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