NEET प्रश्न (MCQ) हिंदी में — उत्तर और विस्तृत हल सहित

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जब SO2 को अम्लीकृत K2Cr2O7 विलयन में से प्रवाहित किया जाता है, तो निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

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(C) जब SO2 को अम्लीकृत K2Cr2O7 विलयन में से प्रवाहित किया जाता है, तो हरा क्रोमियम सल्फेट बनता है। इस अभिक्रिया में Cr की ऑक्सीकरण अवस्था +6 से +3 हो जाती है।

K2Cr2O7 + H2SO4 + 3SO2  →K2SO4 + Cr2(SO4)3 + H2O

हरे रंग का प्रकट होना क्रोमियम धातु के अपचयन के कारण है।

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लैंथेनॉइड संकुचन के कारण निम्नलिखित में से किस तत्व-युग्म की परमाणु त्रिज्याएँ लगभग समान हैं? (कोष्ठक में दी गई संख्याएँ परमाणु क्रमांक हैं)।

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लैंथेनॉइड संकुचन के कारण Zr (परमाणु त्रिज्या 160 pm) तथा Hf (परमाणु त्रिज्या 158 pm) की परमाणु त्रिज्याएँ लगभग समान हैं।

लैंथेनॉइडों में लैंथेनम La (Z = 57) से ल्यूटीशियम Lu (Z = 71) तक के तत्व सम्मिलित हैं। ज़र्कोनियम Zr(40) द्वितीय संक्रमण श्रेणी (4d) का तथा Hf (72) तृतीय संक्रमण श्रेणी (5d) का सदस्य है। लैंथेनॉइड संकुचन 4f कक्षकों के बीच में आ जाने से संबद्ध है, जो 5d-श्रेणी प्रारंभ होने से पहले भर जाते हैं। 5d-कक्षकों से पहले 4f कक्षकों के भरने से परमाणु त्रिज्या में नियमित कमी होती है, जो परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ अपेक्षित आकार-वृद्धि की भरपाई कर देती है। इस लैंथेनॉइड संकुचन के फलस्वरूप द्वितीय तथा तृतीय संक्रमण श्रेणियों के तत्वों की परमाणु त्रिज्याएँ लगभग समान होती हैं।

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निम्नलिखित में से किस प्रक्रम में लोहे का ऑक्सीकरण नहीं होता?

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  0  III

(a) Fe +H2O+O2→Fe2O3. x [H2O]
  (वायु से)
 
    0  II
(b) Fe+CuSO4→FeSO4+Cu

      0  0
(c) Fe+5CO→Fe(CO5)

  0  III
(d)
 Fe+H2O→Fe2O3+H2



∴ Fe से Fe(CO)5 के बनने में लोहे का ऑक्सीकरण नहीं होता क्योंकि ऑक्सीकरण अवस्था में कोई परिवर्तन नहीं होता।

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गैडोलीनियम 4f श्रेणी का सदस्य है। इसका परमाणु क्रमांक 64 है। निम्नलिखित में से गैडोलीनियम का सही इलेक्ट्रॉनिक विन्यास कौन-सा है?

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(c) 64Gd = [Xe]4f75d16s2

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पूर्ण आयनन मानते हुए, निम्नलिखित में से किस यौगिक के समान मोल पूर्ण ऑक्सीकरण के लिए अम्लीकृत KMnO4 की न्यूनतम मात्रा माँगेंगे?

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FeSO4 पूर्ण ऑक्सीकरण के लिए अम्लीकृत KMnO4 की न्यूनतम मात्रा माँगेगा।

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लैंथेनॉइड संकुचन का कारण है

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(a) लैंथेनॉइड संकुचन लैंथेनाइडों की परमाणु तथा आयनिक त्रिज्याओं में नियमित कमी है। इसका कारण कक्षकों की विसरित आकृति के कारण उनका अपूर्ण परिरक्षण या दुर्बल परिरक्षण प्रभाव है, जो बढ़े हुए नाभिकीय आवेश के प्रभाव को संतुलित नहीं कर पाता। अतः शुद्ध परिणाम लैंथेनॉइडों के आकार में संकुचन है।

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अभिक्रिया के अनुसार KMnO4 को K2MnO4 से बनाया जा सकता है

3MnO42- + 2H2O⇌2MnO4- + MnO2 + 4OH-

OH- आयनों को हटाकर अभिक्रिया को पूर्ण किया जा सकता है, इसके लिए मिलाया जाता है

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चूँकि OH- दुर्बल अम्ल (H2O) से उत्पन्न होते हैं, इन्हें हटाने के लिए दुर्बल अम्ल (जैसे CO2) का प्रयोग करना चाहिए क्योंकि प्रबल अम्ल (HCl) अभिक्रिया को उत्क्रमित कर देता है। KOH, OH- की सांद्रता बढ़ा देता है, अतः अभिक्रिया पुनः पश्च दिशा में विस्थापित हो जाती है। CO2, OH- से संयोग करके कार्बोनेट देता है जो सरलता से हट जाता है। SO2 जल से अभिक्रिया करके प्रबल अम्ल देता है, अतः इसका प्रयोग नहीं किया जा सकता।

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अंतराकाशी यौगिकों के विषय में निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा गलत है ?

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(b) अंतराकाशी यौगिक तब बनते हैं जब H, B, C, N आदि जैसे छोटे परमाणु अन्य तत्वों की जालक में समा जाते हैं। ये धात्विक चालकता बनाए रखते हैं। ये रासायनिक गुणों (क्रियाशीलता) में जनक धातु के समान होते हैं परन्तु कठोरता, गलनांक आदि भौतिक गुणों में भिन्न होते हैं। परन्तु ये रासायनिक रूप से अक्रिय होते हैं

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उस मिश्रातु की पहचान कीजिए जिसमें एक अधातु संघटक के रूप में उपस्थित है।

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मिश्रातु

संघटक

इन्वार

Fe+Ni

इस्पात

Fe+C

बेल मेटल

Cu (80%)+Sn (20%)

कांसा

Cu (75.90%)+Sn (10.25%)


इन मिश्रातुओं में केवल इस्पात में कार्बन है, जो एक अधातु है।

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चार क्रमागत संक्रमण तत्वों (Cr, Mn, Fe तथा Co) के लिए +2 ऑक्सीकरण अवस्था का स्थायित्व निम्नलिखित में से किस क्रम में होगा? (परमाणु क्रमांक Cr=24;Mn=25&Fe=26,Co=27)

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इसे M2+/M के लिए E° मानों के आधार पर समझा जा सकता है।

E°/V  Cr  Mn    Fe  Co
M2+/M -0.90 -1.18 -0.44 -0.28

अर्ध-पूरित Mn2+ आयन के अतिरिक्त स्थायित्व के कारण Mn का E° मान सामान्य प्रवृत्ति की अपेक्षा अधिक ऋणात्मक है।

अतः सही क्रम होना चाहिए :-
Mn>Cr>Fe>Co

रेडॉक्स युग्म M3+/ M2+ के E° मानों की जाँच से पता चलता है कि Cr2+ प्रबल अपचायक
है (E° M3+/M2+=0.41V) तथा तनु अम्लों से H2 मुक्त करता है।

2Cr2+ (aq) + 2H+ (aq)→ 2Cr3+(aq) + H2↑(g)

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