बीज प्रकीर्णन की सेंसर क्रियाविधि किसमें पायी जाती है
बीज प्रकीर्णन की सेंसर क्रियाविधि Papaveraceae में पायी जाती है। इस क्रियाविधि में बीज वायु के झोंकों के प्रभाव से फलों से प्रकीर्ण होते हैं।
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बीज प्रकीर्णन की सेंसर क्रियाविधि किसमें पायी जाती है
बीज प्रकीर्णन की सेंसर क्रियाविधि Papaveraceae में पायी जाती है। इस क्रियाविधि में बीज वायु के झोंकों के प्रभाव से फलों से प्रकीर्ण होते हैं।
पुष्पी पादप में सर्वाधिक सामान्य भ्रूणकोश कौन-सा है?
पुष्पी पादप में सर्वाधिक सामान्य भ्रूणकोश एकबीजाणुज, 8 केंद्रकी तथा 7 कोशिकीय होता है। यह polygonum का अभिलक्षण है।
जब कोई फर्न पादप निषेचन के बिना अपने प्रोथैलस से विकसित होता है? यह परिघटना किसका उदाहरण है
जब कोई फर्न पादप फर्न प्रोथैलस की किसी कोशिका से उत्पन्न होता है, तो उसे अपोगैमी कहते हैं। यह निषेचन के बिना युग्मकोद्भिद से बीजाणुद्भिद के परिवर्धन की प्रक्रिया है। अपोगैमी की सूचना सर्वप्रथम फार्लो (1874) ने दी। अपोस्पोरी बीजाणुद्भिदी ऊतक से सीधे युग्मकोद्भिद का परिवर्धन है; ऐसे युग्मकोद्भिद में गुणसूत्रों की द्विगुणित संख्या होती है।
अनिषेकफलन निषेचन के बिना फल का परिवर्धन है। अंगजनन अंगों तथा ऊतकों का परिवर्धन है।
पुष्पी पादप में परागनलिका सर्वप्रथम कहाँ पहुँचती है
पुष्पी पादप में परागनलिका सर्वप्रथम एक सहायक कोशिका में पहुँचती है।
किसी पादप के निषेचित अंड में 40 गुणसूत्र हैं। लघुबीजाणु मातृ कोशिका में उपस्थित गुणसूत्रों की संख्या है
लघुबीजाणु मातृ कोशिकाओं में निषेचित अंड (युग्मनज) की भाँति 2n दशा होती है।
पंखिल वर्तिकाग्र किसका होता है
पंखिल वर्तिकाग्र उन पुष्पों के लिए एक अनुकूलन है जो वायु द्वारा परागित होते हैं।
सामान्य प्रकार का भ्रूणकोश 8-केंद्रकी तथा होता है
इसे प्रारूपी भ्रूणकोश कहते हैं, अर्थात्, Polygonum का अभिलक्षण।
भ्रूणकोश है
बीजांडकाय में उपस्थित भ्रूणकोश को मादा युग्मकोद्भिद भी कहते हैं।
भिन्न पादपों पर स्थित दो पुष्पों का परागण कहलाता है
परपुष्पी परागण भिन्न पादपों के दो पुष्पों के बीच होने वाला पर-परागण है।
सजातपुष्पी परागण उसी पादप के दो पुष्पों के बीच होने वाला पर-परागण है।
अनुन्मील परागण वह परिघटना है जिसमें पादपों का समूह अपने लिंग अंगों को उजागर किए बिना बीज बनाता है। यह स्वपरागण को बढ़ावा देने वाला सर्वाधिक दक्ष पुष्पीय अनुकूलन है और यह अंतर्निहित या पारिस्थितिक हो सकता है।
भिन्नकालपक्वता से तात्पर्य नर तथा मादा लिंग अंगों के भिन्न-भिन्न समय पर परिपक्व होने से है। यह स्वपरागण के विरुद्ध एक सुरक्षा है।
कुछ बीजों में बीजांडकाय के अवशेष भी बने रहते हैं। यह अवशिष्ट, बना रहने वाला बीजांडकाय है
परिभ्रूणपोष कुछ बीजों में भ्रूण वाले कोश के बाहर स्थित पोषक ऊतक है।
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