DNA पॉलिमरेज:
A. RNA संश्लेषण का मुख्य एन्जाइम है
B. DNA-आश्रित DNA बहुलकीकारक एन्जाइम है
C. अत्यधिक दक्ष एन्जाइम है
D. उच्च परिशुद्धता के साथ अभिक्रिया उत्प्रेरित करता है
अनुलेखन में RNA संश्लेषण का मुख्य एन्जाइम RNA पॉलिमरेज है।
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DNA पॉलिमरेज:
A. RNA संश्लेषण का मुख्य एन्जाइम है
B. DNA-आश्रित DNA बहुलकीकारक एन्जाइम है
C. अत्यधिक दक्ष एन्जाइम है
D. उच्च परिशुद्धता के साथ अभिक्रिया उत्प्रेरित करता है
अनुलेखन में RNA संश्लेषण का मुख्य एन्जाइम RNA पॉलिमरेज है।
mRNA तथा tRNA के बीच अंतर है / हैं कि:
A. व्यापक क्षारक-युग्मन के कारण mRNA की त्रिविमीय संरचना अधिक विस्तृत होती है।
B. व्यापक युग्मन के कारण tRNA की त्रिविमीय संरचना अधिक विस्तृत होती है।
C. tRNA प्रायः mRNA से छोटा होता है।
D. mRNA में प्रतिकोडॉन होता है किंतु tRNA में कोडॉन होते हैं।
mRNA तथा tRNA के बीच मुख्य अंतर ये हैं: B) व्यापक क्षारक-युग्मन के कारण tRNA की त्रिविमीय संरचना अधिक विस्तृत होती है, तथा C) tRNA, mRNA से छोटा होता है। mRNA में प्रतिकोडॉन नहीं होता, और tRNA में प्रतिकोडॉन होते हैं, कोडॉन नहीं। अतः सही विकल्प B, C है।
यूकैरियोटों में जीन अभिव्यक्ति का नियमन किस स्तर पर होता है:
A. अनुलेखन स्तर
B. प्रसंस्करण स्तर
C. केन्द्रक से कोशिकाद्रव्य में mRNA का परिवहन
D. अनुवादन स्तर
जीन अभिव्यक्ति के फलस्वरूप एक पॉलीपेप्टाइड बनती है, जिसका यूकैरियोटों में निम्नलिखित स्तरों पर नियमन होता है:
(i) अनुलेखन स्तर (प्राथमिक अनुलेख का निर्माण)
(ii) प्रसंस्करण स्तर (स्प्लाइसिंग का नियमन)
(iii) केन्द्रक से कोशिकाद्रव्य में mRNA का परिवहन
(iv) अनुवादन स्तर।
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प्रोकैरियोटों में जीन नियमन किस स्तर पर होता है:
प्रोकैरियोटों में जीन अभिव्यक्ति के नियंत्रण का प्रमुख स्थल अनुलेखन प्रारम्भन की दर का नियंत्रण है।
किसी अनुलेखन इकाई में, किसी दिए गए उन्नायक पर RNA पॉलिमरेज की सक्रियता का नियमन सहायक प्रोटीनों के साथ अन्योन्यक्रिया द्वारा होता है।
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कौन-सा / कौन-से सही है / हैं?
A. प्रोकैरियोटों में एक ही प्रकार का RNA पॉलिमरेज mRNA, tRNA तथा rRNA का अनुलेखन कर सकता है।
B. यूकैरियोटों में RNA पॉलिमरेज I, rRNA (28s, 18s तथा 5.8s) का अनुलेखन करता है जबकि RNA पॉलिमरेज III, tRNA, 5s rRNA तथा snRNA के अनुलेखन हेतु उत्तरदायी है।
C. यूकैरियोटों में RNA पॉलिमरेज II, hnRNA का अनुलेखन करता है।
D. राइबोसोम की बड़ी उपइकाई में P तथा A-स्थल होते हैं।
उपर्युक्त सभी कथन सही हैं।
A. प्रोकैरियोटों में अनुलेखन केवल RNA पॉलिमरेज द्वारा उत्प्रेरित होता है।
B. यूकैरियोटों में,
RNA पॉलिमरेज I : rRNA (28S, 18S तथा 5.8S) का अनुलेखन करता है
RNA पॉलिमरेज III : tRNA, 5s rRNA तथा snRNA का अनुलेखन
C. RNA पॉलिमरेज II : mRNA का पूर्ववर्ती, अर्थात् विषमांगी केन्द्रकीय RNA (hnRNA)।
D. राइबोसोम की बड़ी उपइकाई में तीन स्थल होते हैं- E, P तथा A स्थल
यह तथ्य कि आनुवंशिक कूट जीवधारियों में लगभग सार्वत्रिक है, इस बात का प्रमाण माना जाता है कि सभी जीव:
आनुवंशिक कूट जीवधारियों में सार्वत्रिक है और यह सिद्ध करता है कि सभी जीव विकासीय रूप से सम्बंधित हैं, क्योंकि सभी में 61 सार्वत्रिक कूटों से बने अमीनो अम्ल होते हैं।
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सही कथन चुनिए:
I. राइबोसोम से mRNA का बंधन शिथिल तथा उत्क्रमणीय होता है।
II. राइबोसोम, जो tRNA तथा प्रोटीनों से बना होता है, एक छोटी तथा एक बड़ी उपइकाई से मिलकर बनता है।
III. 20 अमीनो अम्लों में से प्रत्येक के लिए कम से कम एक विशिष्ट tRNA अणु होता है।
IV. tRNAMET प्रथम कोडॉन (AUG) से जुड़ता है — इसे प्रारम्भ (START) कोडॉन कहते हैं।
V. दूसरा tRNA दूसरे कोडॉन से जुड़ता है ताकि उनसे जुड़े मोनोसैकेराइड एक-दूसरे के पास आ जाएँ
VI. नवनिर्मित पॉलीपेप्टाइड अनुलेखन-पश्च रूपांतरण से गुज़र सकती है।
निम्नलिखित को छोड़कर शेष सभी कथन सही हैं:-
II. राइबोसोम संरचनात्मक RNA तथा 80 भिन्न प्रोटीनों से बना होता है। अपनी निष्क्रिय अवस्था में यह दो उपइकाइयों के रूप में रहता है; एक बड़ी उपइकाई तथा एक छोटी उपइकाई।
V. tRNA से जुड़े अमीनो अम्ल के संकुल, tRNA प्रतिकोडॉन के साथ पूरक क्षारक-युग्म बनाकर mRNA के उपयुक्त कोडॉन से जुड़ते हैं। राइबोसोम mRNA पर एक कोडॉन से अगले कोडॉन की ओर बढ़ता है। अमीनो अम्ल एक-एक करके जुड़ते जाते हैं और पॉलीपेप्टाइड अनुक्रम में अनूदित होते हैं।
VI. नवनिर्मित पॉलीपेप्टाइड अनुवादन-पश्च रूपांतरणों से गुज़रती है।
(पृष्ठ-115)
किसी DNA की लम्बाई में 45000 क्षारक-युग्म हैं। DNA अणु कितने पूर्ण घुमाव लेगा?
वाटसन तथा क्रिक के DNA मॉडल के अनुसार DNA द्विकुण्डलिनी के रूप में रहता है।
दोनों शृंखलाएँ दक्षिणावर्त रीति से कुण्डलित होती हैं। प्रत्येक घुमाव में लगभग 10
क्षारक-युग्म होते हैं, अतः 45000 bp वाले DNA की लम्बाई DNA अणु में 4500
घुमाव लेगी।
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ELSI का पूर्ण रूप है:
HGP के लक्ष्यों में से एक उन नैतिक, वैधिक तथा सामाजिक मुद्दों (ELSI) का समाधान करना था जो इस परियोजना से उत्पन्न हो सकते थे।
(पृष्ठ-118)
DNA अंगुलिछापन इसलिए कार्य करता है क्योंकि:
DNA-अंगुलिछापन DNA के उन क्षेत्रों के न्यूक्लियोटाइड अनुक्रम निर्धारित करने की तकनीक है जो प्रत्येक व्यष्टि के लिए अद्वितीय होते हैं। प्रत्येक व्यक्ति का DNA अंगुलिछाप अद्वितीय होता है। क्षारक-युग्मों का केवल 0.1% ही प्रत्येक व्यक्ति को वैयक्तिकता प्रदान करता है।
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