किसी रेडियोऐक्टिव अणु से चिह्नित न्यूक्लिक अम्ल की एकल रज्जुक कहलाती है
प्रोब 15-30 क्षार लंबे रेडियोऐक्टिव चिह्नित ओलिगोन्यूक्लिओटाइड (RNA अथवा DNA) होते हैं, जिनका उपयोग पूरक न्यूक्लिओटाइड अनुक्रमों के संसूचन तथा रोग निदान आदि के लिए किया जाता है।
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किसी रेडियोऐक्टिव अणु से चिह्नित न्यूक्लिक अम्ल की एकल रज्जुक कहलाती है
प्रोब 15-30 क्षार लंबे रेडियोऐक्टिव चिह्नित ओलिगोन्यूक्लिओटाइड (RNA अथवा DNA) होते हैं, जिनका उपयोग पूरक न्यूक्लिओटाइड अनुक्रमों के संसूचन तथा रोग निदान आदि के लिए किया जाता है।
PCR में प्रयुक्त DNA पॉलिमरेज के विषय में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
पॉलिमरेज श्रृंखला अभिक्रिया (PCR) का उपयोग किसी DNA खंड के प्रवर्धन अथवा अभीष्ट जीन (या DNA) की अनेक प्रतियाँ पात्रे संश्लेषित करने के लिए किया जाता है, जिसमें प्राइमरों के दो समुच्चय तथा DNA पॉलिमरेज एन्जाइम प्रयुक्त होते हैं। यह एन्जाइम Thermus aquaticus नामक जीवाणु से पृथक किया जाता है तथा द्विरज्जुकी DNA के उच्च-ताप प्रेरित विकृतीकरण के दौरान भी उच्च ताप पर सक्रिय बना रहता है।
रूपांतरण हेतु जीन गन से बौछार किए जाने वाले DNA-लेपित सूक्ष्मकण किसके बने होते हैं
बायोलिस्टिक्स अथवा जीन गन परपोषी कोशिकाओं में विजातीय DNA प्रविष्ट कराने की एक प्रत्यक्ष अथवा संवाहकरहित विधि है। जीन स्थानांतरण की इस विधि में DNA से लेपित स्वर्ण अथवा टंग्स्टन के उच्च वेग वाले सूक्ष्मकणों की बौछार पादप कोशिकाओं पर की जाती है।
नीचे DNA रज्जुक के एक भाग का प्रतिदर्श दिया गया है, जिसमें विपरीत रज्जुकों पर क्षार अनुक्रम दर्शाया गया है। इसमें ऐसा क्या विशेष दर्शाया गया है?
5'__ GAATTC_ 3'
3' __ CTTAAG__5'
पैलिंड्रोमिक DNA, DNA का ऐसा क्षार अनुक्रम है जो आगे से अथवा पीछे से एक समान पढ़ा जाता है। इसके दोनों रज्जुकों में समान अनुक्रम होता है। भिन्न-भिन्न प्रकार के पैलिंड्रोमिक अनुक्रमों को प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज पहचानते हैं।
Eco RI नामक एक प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज है। इसमें 'co' भाग किसका द्योतक है?
(c) प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज एक विशेष पैलिंड्रोमिक अनुक्रम को पहचानकर उसका अपघटन करता है। इसे यह नाम इसलिए दिया गया क्योंकि यह जीवाणु (जैसे, E.Coli) में जीवाणुभोजी की वृद्धि को प्रतिबंधित करता था। इन एन्जाइमों के नामकरण की परिपाटी यह है कि नाम का पहला अक्षर जीवाणु के वंश से, अगले दो अक्षर जाति से तथा चौथा अक्षर प्रभेद से लिया जाता है; जैसे, Eco RI, Escherchia coli RY13 से आया है। नामों के बाद आने वाले रोमन अंक उस क्रम को दर्शाते हैं जिसमें एन्जाइम पृथक किए गए थे।
समुद्री खरपतवारों से निष्कर्षित एगैरोस का उपयोग किसमें होता है
जेल वैद्युत कणसंचलन DNA के खंडों को पृथक करने की एक तकनीक है। चूँकि DNA खंड ऋणावेशित अणु होते हैं, अतः उन्हें विद्युत क्षेत्र में किसी माध्यम/आधात्री से होकर ऐनोड की ओर गति कराकर पृथक किया जा सकता है। आजकल सर्वाधिक प्रयुक्त आधात्री एगैरोस है, जो समुद्री खरपतवारों (जैसे, Gelidium, Gracilaria, Gigartina आदि) से निष्कर्षित एक प्राकृतिक बहुलक है।
DNA में निम्नलिखित में से कौन-सा पैलिंड्रोमिक क्षार अनुक्रम किसी विशेष प्रतिबंधन एन्जाइम द्वारा लगभग बीच से सरलता से काटा जा सकता है?
(c) पैलिंड्रोमिक क्षार अनुक्रम द्विरज्जुकी न्यूक्लिक अम्लों का ऐसा अनुक्रम है जो दोनों रज्जुकों पर एक समान पढ़ा जाता है, जब एक रज्जुक को बाएँ से दाएँ तथा दूसरे को दाएँ से बाएँ पढ़ा जाए (अर्थात् दोनों रज्जुक 5'3' पढ़े जाते हैं)। दिए गए विकल्पों में से
5'GAATTC3'
3'CTTAAG5'
एक पैलिंड्रोमिक अनुक्रम है, जिसे किसी विशेष प्रतिबंधन एन्जाइम द्वारा लगभग बीच से काटा जा सकता है।
किसी रेडियोऐक्टिव अणु से चिह्नित DNA अथवा RNA खंड कहलाता है (AIPMT2010)
प्रोब एक निश्चित न्यूक्लिक अम्ल अणु है जिसका उपयोग आण्विक संकरण प्रक्रियाओं में
उन विशिष्ट न्यूक्लिक अम्ल अनुक्रमों की पहचान हेतु किया जाता है जो इसके पूरक होते हैं; यह पहचान
प्रोब पर लगे चिह्न के आधार पर होती है। चिह्न रेडियोऐक्टिव अथवा अरेडियोऐक्टिव हो सकता है। न्यूक्लिक अम्ल प्रोब के अनेक
अनुप्रयोग हैं, जैसे नैदानिक प्रतिदर्शों तथा खाद्य एवं जल
प्रतिदर्शों में सूक्ष्मजीवों का संसूचन, आनुवंशिक रोगों का संसूचन आदि।
प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज ऐसे एन्जाइम हैं जो
(a) प्रतिबंधन एंडोन्यूक्लिएज एक विशिष्ट DNA क्षार अनुक्रम (पहचान अनुक्रम अथवा पहचान स्थल, प्रतिबंधन अनुक्रम अथवा प्रतिबंधन स्थल) को पहचानता है तथा उस स्थल पर या उसके निकट DNA के दोनों रज्जुकों का विदलन करता है। यह एन्जाइम DNA को काटकर लटकते सिरों अथवा कुंठित सिरों वाले प्रतिबंधन खंड उत्पन्न करता है।
फसली पादपों में विजातीय DNA के स्थानांतरण में निम्नलिखित में से कौन सामान्यतः प्रयुक्त होता है?
(c) पादप कोशिकाओं द्वारा विजातीय DNA अथवा ट्रांसजीन का ग्रहण रूपांतरण कहलाता है। पादप कोशिकाओं में ट्रांसजीन प्रविष्ट कराने हेतु अनेक तकनीकें प्रयोग की जाती रही हैं, जिन्हें निम्नलिखित दो वर्गों में रखा जा सकता है - (i) Agrobacterium-माध्यित तथा (ii) प्रत्यक्ष जीन स्थानांतरण।
Agrobacterium tumemefaciens माध्यित रूपांतरण ऊतक कर्तोतकों से पुनरुद्भवन की आवश्यकता समाप्त कर देता है।
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