एंजाइम ट्रिप्सिन के लिए इष्टतम pH है:
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आंत्र श्लेष्मिका उपकला में गॉब्लेट कोशिकाएँ होती हैं जो स्रावित करती हैं:
आंत्र श्लेष्मिका उपकला में गॉब्लेट कोशिकाएँ होती हैं जो श्लेष्मा स्रावित करती हैं। श्लेष्मिका की ब्रश बॉर्डर कोशिकाओं के स्राव, गॉब्लेट कोशिकाओं के स्रावों के साथ मिलकर आंत्र रस बनाते हैं। (पृष्ठ-263).
छोटी आँत की श्लेष्मिका में उपस्थित ब्रश बॉर्डर कोशिकाओं का स्राव, गॉब्लेट कोशिकाओं के स्रावों के साथ मिलकर बनाता है:
आंत्र श्लेष्मिका उपकला में गॉब्लेट कोशिकाएँ होती हैं जो श्लेष्मा स्रावित करती हैं। श्लेष्मिका की ब्रश बॉर्डर कोशिकाओं के स्राव, गॉब्लेट कोशिकाओं के स्रावों के साथ मिलकर आंत्र रस या सक्कस एंटेरिकस बनाते हैं। (पृष्ठ-263)
ग्लूकोस तथा ऐमीनो अम्ल आँत में किसके द्वारा अवशोषित होते हैं:
(पृष्ठ-265)
फ्रक्टोस तथा कुछ ऐमीनो अम्ल किसके द्वारा अवशोषित होते हैं:
फ्रक्टोस तथा कुछ ऐमीनो अम्ल जैसे कुछ पदार्थ सोडियम आयनों जैसे वाहक आयनों की सहायता से अवशोषित होते हैं। इस क्रियाविधि को सुसाध्य परिवहन कहते हैं। (पृष्ठ-264)
ऐमीनो अम्ल, ग्लूकोस, Na+ जैसे विद्युत-अपघट्य किसके द्वारा अवशोषित होते हैं:
ऐमीनो अम्ल जैसे पोषक तत्व, ग्लूकोस जैसे मोनोसैकेराइड, Na+ जैसे विद्युत-अपघट्य सक्रिय परिवहन द्वारा अवशोषित होते हैं, जो सांद्रता प्रवणता के विरुद्ध होता है और इसलिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। (पृष्ठ-265)
काइलोमाइक्रॉनों के विषय में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?
I. काइलोमाइक्रॉन छोटी आँत की उपकला कोशिकाओं में बनते हैं
II. इनमें ट्राइग्लिसराइड, कोलेस्ट्रॉल तथा फॉस्फोलिपिड होते हैं
III. ये प्रोटीन-लेपित छोटी पुटिकाएँ हैं
IV. काइलोमाइक्रॉन उपकला कोशिका से लैक्टियलों में मुक्त होते हैं
वसा अम्ल तथा ग्लिसरॉल पहले मिसेल नामक छोटी बूँदों में समाविष्ट होते हैं, जो आंत्र श्लेष्मिका में जाती हैं। वे पुनः काइलोमाइक्रॉन नामक बहुत छोटे प्रोटीन-लेपित वसा गोलिकाओं में बनते हैं, जो रसांकुरों की लसीका वाहिकाओं (लैक्टियलों) में परिवहित होते हैं। ये लसीका वाहिकाएँ अंततः अवशोषित पदार्थों को रक्त प्रवाह में मुक्त करती हैं। (पृष्ठ- 265)
जठर रस में नहीं होता:
ऐमाइलेज अग्न्याशयी रस में स्रावित होता है। जठर रस में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल तथा रेनिन, पेप्सिन आदि एंजाइम होते हैं। (पृष्ठ-262)
एंटेरोकाइनेज है:
ट्रिप्सिनोजन आंत्र श्लेष्मिका द्वारा स्रावित एंजाइम एंटेरोकाइनेज द्वारा सक्रिय ट्रिप्सिन में सक्रिय होता है, जो बदले में अग्न्याशयी रस के अन्य एंजाइमों को सक्रिय करता है (पृष्ठ-262).
ओड्डी का संकोचक किसके बीच उपस्थित होता है:
पित्त नलिका तथा अग्न्याशयी नलिका एक साथ सामान्य यकृत-अग्न्याशयी नलिका के रूप में ग्रहणी में खुलती हैं, जो ओड्डी के संकोचक नामक संकोचक द्वारा नियंत्रित होती है। (पृष्ठ- 261).
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