ऋणायनी जल-अपघटन से गुजरने वाले लवण (जैसे CH3COONa) के विलयन के लिए pH दिया जाता है:
(a) CH3COO- + H2O CH3COOH + OH-
... [OH-] = c.h =
अथवा -log OH = [logKw + log c- logKa]
अथवा pOH = [pKw -log c - pKa]
अब, pH + pOH = pKw
pH= [pKw + log c + pKa]
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ऋणायनी जल-अपघटन से गुजरने वाले लवण (जैसे CH3COONa) के विलयन के लिए pH दिया जाता है:
(a) CH3COO- + H2O CH3COOH + OH-
... [OH-] = c.h =
अथवा -log OH = [logKw + log c- logKa]
अथवा pOH = [pKw -log c - pKa]
अब, pH + pOH = pKw
pH= [pKw + log c + pKa]
यदि अभिक्रिया,
Fe(OH)3(s) Fe3+(aq) + 3OH- (aq)
में OH- आयनों की सांद्रता 1/4 गुना घटा दी जाए, तो Fe3+ की साम्य सांद्रता बढ़ जाएगी
(c) Fe(OH)3(s) Fe3+(aq) + 3OH- (aq)
K =[Fe3+][OH-]3/Fe(OH)3] ....(i)
साम्य स्थिरांक बनाए रखने के लिए, माना OH- की सांद्रता 1/4 गुना घटाने पर Fe3+ की सांद्रता x गुना बढ़ जाती है।
K=[xFe3+][1/4 x OH-]3/ [Fe(OH)3] .....(ii)
समी. (i) तथा (ii) से
1/64 x x=1
x = 64 गुना
(b) HI(g) 1/2 H2(g) + 1/2 I2(g)
K= [I2]1/2[H2]1/2/[HI] . ........(i)
H2(g) + I2(g) 2HI
K' = [HI]2/[H2][I2] .....(ii)
समी. (i) तथा (ii) से
K x =1
K' =1/K2 = 1/82 =1/64
CuS, CdS तथा HgS के विलेयता गुणनफल क्रमशः 10-31, 10-44, 10-54 हैं। इन सल्फाइडों की विलेयता का क्रम है
(d) सभी द्विअंगी लवण हैं, अतः इनकी विलेयता इनके विलेयता गुणनफलों के वर्गमूल के बराबर है। अतः, विलेयता का क्रम CuS>CdS>HgS है अथवा विलेयता गुणनफल का मान जितना अधिक होगा, विलेयता उतनी ही अधिक होगी।
अभिक्रिया, A + B C+D के लिए, A तथा B की प्रारंभिक सांद्रताएँ समान हैं, परंतु C की साम्य सांद्रता A की साम्य सांद्रता की दोगुनी है। साम्य स्थिरांक है:
(a) A + B C+D
a a 0 0
(a-x) (a-x) x x
दिया है, x = 2(a-x) अथवा x = 2a/3
Kc = x2/(a-x)2 = = 4
स्थिर ताप पर, अपघटन अभिक्रिया N2O4 2NO2 के लिए साम्य स्थिरांक (Kp) इस प्रकार व्यक्त किया जाता है,
Kp = (4x2P)/(1-x2)
जहाँ P= दाब, x = अपघटन की मात्रा। निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
(d) Kp किसी दी गई अभिक्रिया के लिए एक अभिलाक्षणिक स्थिरांक है और केवल ताप के साथ बदलता है।
अमोनियम ऐसीटेट का जलीय विलयन है:
(d) CH3COONH4 दुर्बल अम्ल तथा दुर्बल क्षार का लवण है और
Kacid Kbase
CH3COOH NH4OH
निम्नलिखित में से कौन-सा सर्वाधिक विलेय है?
(b) इन सभी यौगिकों में MnS सर्वाधिक विलेय है क्योंकि इसका विलेयता गुणनफल अधिकतम है।
NH2- का संयुग्मी अम्ल है
(d) क्षार में प्रोटॉन जोड़ने के बाद बनी स्पीशीज को उस क्षार का संयुग्मी अम्ल कहते हैं तथा प्रोटॉन खोने के बाद बनी स्पीशीज को अम्ल का संयुग्मी क्षार कहते हैं। अतः,
N + H+ NH3
क्षार संयुग्मी अम्ल
60 ml 1M CH3COOH को 20 ml 1 M NaOH के साथ मिलाया जाता है तो परिणामी विलयन का pH होगा
(Ka = 1.8 X 10-5, log1.8 = 0.25)
t=0 पर 60ml 1M 20ml 1M 0 0
t='t' पर 40ml 1M 0 20ml 1M -
अब यह अम्लीय बफर विलयन है।
साम्य में स्थिर दाब पर अक्रिय गैस मिलाने पर वियोजन की मात्रा :
स्थिर दाब पर अक्रिय गैस मिलाने पर, साम्य उस दिशा में विस्थापित होता है जहाँ मोलों की संख्या अधिक होती है।
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