Laws of Motion NEET प्रश्न हिंदी में — भौतिक विज्ञान (Physics) MCQ उत्तर सहित

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किसी दृढ़ पिंड के यांत्रिक संतुलन में होने के लिए कौन-सी दो शर्तें पूरी होनी चाहिए?

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NCERT पाठ (अध्याय: SYSTEMS_OF_PARTICLES_AND_ROTATIONAL_MOTION, POINTS TO PONDER, बिंदु 11) स्पष्ट रूप से कहता है: 'कोई दृढ़ पिंड यांत्रिक संतुलन में होता है यदि (1) वह स्थानांतरीय संतुलन में हो, अर्थात् उस पर कुल बाह्य बल शून्य हो : $F_i = \sum F_i = 0$, और (2) वह घूर्णी संतुलन में हो, अर्थात् उस पर कुल बाह्य बल-आघूर्ण शून्य हो : $\tau = \sum \tau_i = \sum r_i \times F_i = 0$।'

एक हल्की छड़ (AB) पर विचार कीजिए जिसके सिरों पर समान परिमाण के और एक ही दिशा में कार्यरत दो समांतर बल छड़ के लंबवत लगाए गए हैं। छड़ की संतुलन अवस्था क्या है?

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NCERT (अध्याय: SYSTEMS_OF_PARTICLES_AND_ROTATIONAL_MOTION, दृढ़ पिंड का संतुलन खंड) के चित्र 6.20(a) और उसके विवरण के आधार पर, जब समान परिमाण के दो समांतर बल छड़ के सिरों पर एक ही दिशा में कार्य करते हैं, तो छड़ पर नेट आघूर्ण (बल-आघूर्ण) शून्य होगा (घूर्णी संतुलन) परंतु नेट बल शून्य नहीं होगा ($\sum F \neq 0$), अर्थात् वह स्थानांतरीय संतुलन में नहीं होगी।

एकल कण पर कार्यरत सभी बल परिभाषा के अनुसार होते हैं:

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NCERT पाठ (अध्याय: SYSTEMS_OF_PARTICLES_AND_ROTATIONAL_MOTION, दृढ़ पिंड का संतुलन खंड) कहता है, 'चूँकि ये सभी बल एकल कण पर कार्य करते हैं, वे संगामी होने चाहिए। संगामी बलों के अंतर्गत संतुलन की चर्चा पिछले अध्यायों में की गई है।'

किसी कण की तुलना में दृढ़ पिंड की संतुलन शर्तों में प्राथमिक अंतर क्या है?

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NCERT पाठ (अध्याय: SYSTEMS_OF_PARTICLES_AND_ROTATIONAL_MOTION, दृढ़ पिंड का संतुलन खंड) स्पष्ट करता है: 'चूँकि घूर्णी गति का विचार किसी कण पर लागू नहीं होता, अतः कण पर केवल स्थानांतरीय संतुलन की शर्तें (समीकरण 6.30 a) लागू होती हैं। इस प्रकार, कण के संतुलन के लिए उस पर लगे सभी बलों का सदिश योग शून्य होना चाहिए।' दृढ़ पिंड के लिए शून्य नेट बल और शून्य नेट बल-आघूर्ण दोनों आवश्यक हैं ('POINTS TO PONDER' बिंदु 11 के अनुसार)।

यदि कोई पिंड घूर्णी संतुलन में है परंतु स्थानांतरीय संतुलन में नहीं, तो इसका उस पर कार्यरत बलों और बल-आघूर्णों के विषय में क्या तात्पर्य है?

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घूर्णी संतुलन का अर्थ है नेट बल-आघूर्ण शून्य है। स्थानांतरीय संतुलन में न होने का अर्थ है नेट बल अशून्य है। यह NCERT पाठ (अध्याय: SYSTEMS_OF_PARTICLES_AND_ROTATIONAL_MOTION) में उल्लिखित आंशिक संतुलन की परिभाषा के अनुरूप है।

किसी दृढ़ पिंड के लिए जहाँ उस पर कार्यरत सभी बल समतलीय हैं, यांत्रिक संतुलन के लिए कितनी शर्तों की आवश्यकता होती है?

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NCERT पाठ (अध्याय: SYSTEMS_OF_PARTICLES_AND_ROTATIONAL_MOTION, दृढ़ पिंड का संतुलन खंड) कहता है: 'अनेक प्रश्नों में पिंड पर कार्यरत सभी बल समतलीय होते हैं। तब यांत्रिक संतुलन के लिए केवल तीन शर्तों का पूरा होना आवश्यक है। इनमें से दो शर्तें स्थानांतरीय संतुलन से संबंधित हैं... तीसरी शर्त घूर्णी संतुलन से संबंधित है।'

न्यूटन के द्वितीय नियम में कणों के किसी निकाय के लिए नेट बाह्य बल की गणना करते समय आंतरिक बलों को क्यों शामिल नहीं किया जाता?

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यद्यपि आंतरिक बल अलग-अलग कणों को प्रभावित करते हैं, न्यूटन के तृतीय नियम के अनुसार निकाय के भीतर कणों के बीच के बल समान और विपरीत होते हैं, अतः पूरे निकाय के लिए उनका योग शून्य होता है। NCERT पाठ (अध्याय: LAWS_OF_MOTION, उदाहरण 4.2 के बाद बिंदु 3) कहता है: 'निकाय के किसी भी आंतरिक बल को F में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।'

न्यूटन के गति के तृतीय नियम के विषय में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है?

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NCERT पाठ के अनुसार, 'क्रिया और प्रतिक्रिया भिन्न पिंडों पर कार्य करते हैं, अतः उन्हें निरस्त नहीं किया जा सकता।' यह एक सामान्य भ्रांति है, क्योंकि बल केवल तभी निरस्त हो सकते हैं जब वे एक ही पिंड पर कार्य करें।

एक गुब्बारे को फुलाकर छोड़ दिया जाता है। हवा नोज़ल से बाहर निकलती है और गुब्बारा विपरीत दिशा में गति करता है। यह परिघटना न्यूटन के गति के किस नियम को सर्वोत्तम रूप से प्रदर्शित करती है?

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हवा का निष्कासन (क्रिया) गुब्बारे पर विपरीत दिशा में एक प्रणोद बल (प्रतिक्रिया) उत्पन्न करता है, जिससे वह गति करता है। यह न्यूटन के तृतीय नियम का प्रत्यक्ष अनुप्रयोग है: 'प्रत्येक क्रिया की सदैव एक बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है'।

जब कोई व्यक्ति चलता है, तो वह अपने पैरों से ज़मीन को पीछे की ओर धकेलता है। न्यूटन के तृतीय नियम के अनुसार, ज़मीन एक साथ:

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NCERT कहता है, 'पिंड B द्वारा पिंड A पर बल, A द्वारा पिंड B पर बल के बराबर और विपरीत होता है।' जब व्यक्ति ज़मीन को पीछे धकेलता है (क्रिया), तो ज़मीन व्यक्ति को आगे धकेलती है (प्रतिक्रिया), जिससे वह गति कर पाता है।

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Frequently Asked Questions

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