Alternating Current NEET प्रश्न हिंदी में — भौतिक विज्ञान (Physics) MCQ उत्तर सहित

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धारितीय प्रतिघात ($X_C$) शुद्ध धारितीय AC परिपथ में धारा के आयाम को सीमित करता है। धारितीय प्रतिघात के विषय में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?

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संदर्भ के अनुसार, 'यह (धारितीय प्रतिघात) आवृत्ति और धारिता के व्युत्क्रमानुपाती है।' (पृष्ठ 185) और समीकरण 7.17 कहता है $X_C = 1/\omega C$। अतः यह धारिता के व्युत्क्रमानुपाती है, अनुक्रमानुपाती नहीं।

शुद्ध धारितीय AC परिपथ में, संधारित्र के सिरों पर तात्क्षणिक वोल्टता और उससे प्रवाहित तात्क्षणिक धारा के बीच कला संबंध क्या है?

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संदर्भ कहता है, 'समीकरण (7.16) की स्रोत वोल्टता के समीकरण (7.1) से तुलना दर्शाती है कि धारा वोल्टता से $\pi/2$ आगे है।' इसका अर्थ है कि धारा वोल्टता से $\pi/2$ या 90 डिग्री अग्रगामी है।

जब संधारित्र के सिरों पर AC वोल्टता आरोपित की जाती है, तो एक पूर्ण चक्र में संधारित्र को दी गई औसत शक्ति क्या होती है?

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संदर्भ स्पष्ट रूप से कहता है, 'अतः, प्रेरक की स्थिति की तरह, औसत शक्ति $P_C = \frac{1}{2} i_m v_m \langle \sin(2\omega t) \rangle = 0$ क्योंकि एक पूर्ण चक्र में $\langle \sin(2\omega t) \rangle = 0$।' (समीकरण 7.19 और संलग्न पाठ)। साथ ही, सारांश का बिंदु 4 पुष्टि करता है कि 'एक पूर्ण चक्र में संधारित्र को दी गई औसत शक्ति शून्य होती है।'

एक संधारित्र को DC स्रोत से जोड़ा गया है। लंबे समय के बाद धारा प्रवाह के संबंध में क्या प्रेक्षण होगा?

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पाठ स्पष्ट करता है, 'जब dc परिपथ में संधारित्र को वोल्टता स्रोत से जोड़ा जाता है, तो संधारित्र को आवेशित करने के लिए आवश्यक थोड़े समय तक धारा प्रवाहित होगी। जैसे-जैसे संधारित्र की प्लेटों पर आवेश संचित होता है, उनके सिरों पर वोल्टता बढ़ती है, जो धारा का विरोध करती है। ... जब संधारित्र पूर्णतः आवेशित हो जाता है, परिपथ में धारा शून्य हो जाती है।' (पृष्ठ 184)।

एक लैंप को संधारित्र के साथ श्रेणी में AC स्रोत से जोड़ा गया है। यदि संधारित्र की धारिता कम कर दी जाए, तो लैंप की चमक पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

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उदाहरण 7.3 इस स्थिति की चर्चा करता है: 'C कम करने से प्रतिघात बढ़ेगा और लैंप पहले से कम चमकीला होगा।' ऐसा इसलिए है क्योंकि $X_C = 1/\omega C$। यदि C घटता है, तो $X_C$ बढ़ता है, जो धारा ($i_m = v_m / X_C$) को कम करता है, जिससे चमक कम होती है।

शुद्ध धारितीय AC परिपथ में, दोलनी धारा का आयाम ($i_m$) दिया जाता है:

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संदर्भ कहता है, 'जहाँ दोलनी धारा का आयाम $i_m = \omega C v_m$ है।' (पृष्ठ 184)।

AC परिपथ में निम्नलिखित में से कौन-सा अवयव ऊर्जा का क्षय करता है?

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'POINTS TO PONDER' (पृष्ठ 199) का बिंदु 7 स्पष्ट करता है: 'ac परिपथ में शुद्ध धारिताओं और शुद्ध प्रेरकत्वों से संबद्ध कोई शक्ति क्षय नहीं होता। ac परिपथ में ऊर्जा का क्षय करने वाला एकमात्र अवयव प्रतिरोधी अवयव है।'

शुद्ध धारितीय AC परिपथ के फेज़र आरेख में, धारा फेज़र (I) वोल्टता फेज़र (V) के सापेक्ष कैसे स्थित होता है?

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चित्र 7.8(a) और संलग्न विवरण स्पष्ट रूप से कहते हैं: 'यहाँ धारा फेज़र I वोल्टता फेज़र V से $\pi/2$ आगे है, जब वे वामावर्त घूर्णन करते हैं।' यह गणितीय व्युत्पत्ति से मेल खाता है कि धारा वोल्टता से $\pi/2$ अग्रगामी है।

जब किसी शुद्ध प्रेरकीय परिपथ पर AC वोल्टता लगाई जाती है, तो धारा अपने अधिकतम मान पर वोल्टता से आवर्तकाल के _________ _________ पहुँचती है।

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दिए गए पाठ के अनुसार, 'हम देखते हैं कि धारा अपने अधिकतम मान पर वोल्टता से आवर्तकाल के एक-चौथाई बाद पहुँचती है $T/4 = \pi/(2\omega)$'।

AC वोल्टता के एक पूर्ण चक्र में शुद्ध प्रेरक को दी गई औसत शक्ति क्या है?

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पाठ कहता है, 'अतः एक पूर्ण चक्र में औसत शक्ति $(P_L) = \text{average of } [- (v_m i_m/2) \sin(2\omega t)]$ = 0 है, क्योंकि एक पूर्ण चक्र में $\sin (2\omega t)$ का औसत शून्य होता है। इस प्रकार, एक पूर्ण चक्र में प्रेरक को दी गई औसत शक्ति शून्य है'।

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Frequently Asked Questions

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